Trump Tariff Case: सुप्रीम कोर्ट ने टाला फैसला, ग्लोबल मार्केट में बढ़ी बेचैनी; भारत पर भी पड़ेगा असर?
अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी को डोनाल्ड ट्रंप की टैरिफ नीति से जुड़े मामलों पर कोई फैसला नहीं सुनाया. फैसले में देरी से ग्लोबल मार्केट और निवेशकों की अनिश्चितता बढ़ गई है. यह मामला राष्ट्रपति की शक्तियों, टैरिफ की वैधता और भारत समेत कई देशों की अर्थव्यवस्था के लिए बेहद अहम माना जा रहा है.
Trump Tariff Case Supreme Court: अमेरिका के सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार, 9 जनवरी को राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा लगाए गए टैरिफ से जुड़े मामलों पर कोई फैसला नहीं सुनाया. इससे ग्लोबल मार्केट और निवेशकों की अनिश्चितता और बढ़ गई है. माना जा रहा था कि कोर्ट ट्रंप की टैरिफ नीति को चुनौती देने वाले कम से कम एक अहम मामले पर अपना रुख साफ करेगा, लेकिन ऐसा नहीं हुआ. सुप्रीम कोर्ट ने 9 जनवरी को इन मामलों के लिए “ऑपिनियन डे” तय किया था, लेकिन फैसला टाल दिया गया.
कब आएगा कोर्ट का फैसला?
कोर्ट ने यह भी साफ नहीं किया है कि अगला फैसला कब सुनाया जाएगा. हालांकि, उम्मीद की जा रही है कि अगले दो हफ्तों के भीतर कोर्ट कुछ मामलों में अपने निर्णय जारी कर सकता है. यह मामला इसलिए बेहद अहम माना जा रहा है क्योंकि इसे राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा और ट्रंप के व्यापक अधिकारों के दावों की कसौटी के रूप में देखा जा रहा है. जनवरी 2025 में सत्ता में लौटने के बाद ट्रंप ने जिस तरह से टैरिफ को हथियार के तौर पर इस्तेमाल किया, उस पर अब न्यायिक नजर टिकी हुई है. कोर्ट का फैसला न सिर्फ अमेरिकी राजनीति, बल्कि पूरी वैश्विक अर्थव्यवस्था पर असर डाल सकता है.
क्या है कोर्ट के सामने सवाल?
सुप्रीम कोर्ट के सामने दो बड़े सवाल हैं. पहला, क्या ट्रंप प्रशासन को International Emergency Economic Powers Act (IEEPA) के तहत इतने बड़े पैमाने पर टैरिफ लगाने का अधिकार है? और दूसरा, अगर कोर्ट यह मानता है कि ये टैरिफ राष्ट्रपति की शक्तियों की सीमा से बाहर हैं, तो क्या उन आयातकों को पैसा वापस करना होगा, जिन्होंने पहले ही ये शुल्क चुकाए हैं? अगर यह फैसला आता है, तो यह पहली बार होगा जब अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ट्रंप के व्यापक टैरिफ फैसलों पर सीधा निर्णय देगा. गौरतलब है कि 2 अप्रैल 2025 को ट्रंप ने “लिबरेशन डे” के नाम पर कई देशों से आयात होने वाले सामान पर 10 से 41 फीसदी तक के जवाबी टैरिफ लगाए थे, जिससे वैश्विक ट्रेड वॉर और तेज हो गया था.
भारत के लिए जरूरी मसला
इस टैरिफ युद्ध में भारत भी सबसे ज्यादा प्रभावित देशों में शामिल रहा. शुरुआत में भारत पर 25 फीसदी टैरिफ लगाया गया था, जिसे अगस्त 2025 में बढ़ाकर 50 फीसदी कर दिया गया. यह अतिरिक्त शुल्क भारत द्वारा रूस से तेल आयात जारी रखने के चलते लगाया गया था. 50 फीसदी टैरिफ का असर भारत के टेक्सटाइल, जेम्स एंड ज्वेलरी, फुटवियर, फर्नीचर और केमिकल जैसे अहम निर्यात सेक्टर्स पर पड़ा. हालांकि, फार्मास्यूटिकल्स, सेमीकंडक्टर, चाय, कॉफी और मसालों जैसे कुछ क्षेत्रों को इस टैरिफ से छूट दी गई है. अब पूरी दुनिया की नजरें सुप्रीम कोर्ट के अगले फैसले पर टिकी हैं, क्योंकि यही तय करेगा कि ट्रंप की टैरिफ नीति को कानूनी मंजूरी मिलती है या उस पर लगाम लगती है.
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