कार लोन चुका दिया फिर भी RC में बैंक का नाम? Parivahan Portal से अब ऑनलाइन हटाएं हाइपोथिकेशन; ये है पूरी प्रक्रिया

कार लोन पूरी तरह चुकाने के बाद भी अगर RC में बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम दर्ज है, तो यह आगे चलकर परेशानी का कारण बन सकता है. अब वाहन मालिक परिवहन पोर्टल के जरिए ऑनलाइन हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इस सुविधा के जरिए घर बैठे जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर फीस का भुगतान किया जा सकता है.

कार लोन Image Credit: money9live.com

Car Loan: कई बार ऐसा होता है कि कार लोन पूरी तरह चुकाने के बाद भी रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट यानी RC पर बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम दर्ज रहता है. अगर लोन चुकाने के बाद भी बैंक या फाइनेंस कंपनी का नाम RC में दर्ज है, तो यह भविष्य में परेशानी का कारण बन सकता है. अब इस समस्या का समाधान आसान हो गया है. वाहन मालिक अब परिवहन पोर्टल के जरिए ऑनलाइन तरीके से हाइपोथिकेशन की प्रक्रिया पूरी कर सकते हैं. इससे वाहन पर दर्ज बैंक का अधिकार आधिकारिक रूप से खत्म हो जाता है और RC में केवल वाहन मालिक का नाम दर्ज रहता है.

क्या होता है हाइपोथिकेशन क्लॉज

जब कोई व्यक्ति कार लोन के जरिए वाहन खरीदता है, तो RC में हाइपोथिकेशन क्लॉज दर्ज किया जाता है. इसका मतलब होता है कि वाहन लेंडर के पास कोलेटरल के रूप में बंधक है. जैसे ही पूरा लोन चुका दिया जाता है, वैसे ही हाइपोथिकेशन हटवाना जरूरी हो जाता है. अगर ऐसा नहीं किया गया, तो सरकारी रिकॉर्ड में बैंक या एनबीएफसी का नाम बना रहता है, जिससे गाड़ी बेचने, ओनरशिप ट्रांसफर कराने या री-रजिस्ट्रेशन जैसी प्रक्रियाओं में अड़चन आ सकती है.

पहले हाइपोथिकेशन हटवाने के लिए RTO के कई चक्कर लगाने पड़ते थे, लेकिन अब यह सर्विस ऑनलाइन उपलब्ध है. वाहन मालिक घर बैठे एप्लिकेशन कर सकते हैं, जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड कर सकते हैं और तय फीस का पेमेंट भी ऑनलाइन कर सकते हैं. हालांकि कुछ राज्यों में अभी भी फॉर्म 35 ऑनलाइन भरने के बाद उसकी हार्ड कॉपी RTO और लेंडर को जमा करानी पड़ सकती है.

ऑनलाइन हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की प्रक्रिया

सबसे पहले वाहन मालिक को vahan.parivahan.gov.in/vahaneservice/ वेबसाइट पर लॉगिन करना होगा. लॉगिन के बाद “ऑनलाइन सर्विसेज” में जाकर “व्हीकल रिलेटेड सर्विसेज” का विकल्प चुनना होगा. इसके बाद व्हीकल रजिस्ट्रेशन नंबर और चैसिस नंबर दर्ज कर ओटीपी जनरेट करना होगा. रजिस्टर्ड मोबाइल नंबर पर आए ओटीपी को दर्ज करने के बाद “हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन” विकल्प चुनना होगा.

आगे की प्रक्रिया में इंश्योरेंस डिटेल्स भरनी होती हैं और फिर डीएमएस सेक्शन में जरूरी डॉक्यूमेंट्स अपलोड करने होते हैं. सभी जानकारियां सही से भरने के बाद “फीस डिटेल्स” सेक्शन में जाकर निर्धारित फीस का पेमेंट करना होता है. एप्लिकेशन सफलतापूर्वक सबमिट होने के बाद RTO द्वारा वेरिफिकेशन किया जाता है और प्रक्रिया पूरी होने पर RC से हाइपोथिकेशन हटा दी जाती है.

हाइपोथिकेशन हटवाना क्यों जरूरी है

लोन चुकाने के बाद हाइपोथिकेशन हटवाना केवल औपचारिकता नहीं है, बल्कि कानूनी और व्यावहारिक दोनों ही नजरिए से जरूरी है. अगर वाहन बेचने की योजना है, ओनरशिप ट्रांसफर कराना है या किसी दूसरे राज्य में री-रजिस्ट्रेशन करानी है, तो बिना हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन यह संभव नहीं होगा. इसके अलावा क्लियर RC यह भी साबित करता है कि वाहन पर अब किसी भी लेंडर का दावा नहीं है.

जरूरी डॉक्यूमेंट्स

ऑनलाइन प्रक्रिया के लिए लेंडर द्वारा जारी नो ऑब्जेक्शन सर्टिफिकेट, RTO फॉर्म 35, वैलिड इंश्योरेंस सर्टिफिकेट और ओरिजिनल रजिस्ट्रेशन सर्टिफिकेट की जरूरत होती है. सभी डॉक्यूमेंट्स स्पष्ट और सही होने चाहिए, ताकि एप्लिकेशन में कोई देरी न हो.

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फीस से जुड़ी जानकारी

हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन के लिए एक निर्धारित फीस देनी होती है, जो राज्य के हिसाब से अलग-अलग हो सकती है. यह फीस ऑनलाइन एप्लिकेशन के दौरान ही जमा करनी होती है. कुल मिलाकर, परिवहन पोर्टल पर उपलब्ध यह ऑनलाइन सुविधा वाहन मालिकों के लिए बड़ी राहत है. इससे समय की बचत होती है और RTO के चक्कर लगाने की जरूरत भी कम हो जाती है. अगर आपने कार लोन चुका दिया है, तो बेहतर होगा कि बिना देर किए हाइपोथिकेशन टर्मिनेशन की प्रक्रिया पूरी कर लें और अपनी RC को पूरी तरह क्लियर करा लें.