V2V टेक्नोलॉजी से आपस में बात करेंगी गाड़ियां, सड़क हादसों पर लगेगा लगाम; ऐसे काम करेगा सिस्टम

भारत में सड़क हादसों को कम करने के लिए सरकार V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी लागू करने की तैयारी कर रही है. इस टेक्नोलॉजी के जरिए गाड़ियां आपस में रियल-टाइम जानकारी साझा कर सकेंगी, जिससे ड्राइवर को पहले ही खतरे का अलर्ट मिल जाएगा. इस टेक्नोलॉजी से कोहरा, तेज रफ्तार और अचानक ब्रेक जैसी स्थितियों में हादसों को काफी हद तक रोका जा सकेगा.

V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी Image Credit: tv9 bharatvarsh

V2V Communication Technology: भारत में सड़क हादसों को कम करने की दिशा में सरकार एक बड़ा कदम उठाने की तैयारी कर रही है. केंद्र सरकार अब वाहन-से-वाहन यानी V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी को देश में लागू करने पर काम कर रही है, जिसके जरिए गाड़ियां आपस में रियल-टाइम जानकारी साझा कर सकेंगी. इस टेक्नोलॉजी का मकसद ड्राइवर को पहले से अलर्ट देकर संभावित हादसों को रोकना है. केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने इस बारे में जानकारी देते हुए कहा कि V2V तकनीक सड़क सुरक्षा को नई दिशा दे सकती है.

क्या है V2V कम्युनिकेशन टेक्नोलॉजी

V2V कम्युनिकेशन एक वायरलेस टेक्नोलॉजी है, जिसमें वाहन बिना किसी मानवीय हस्तक्षेप के एक-दूसरे से सीधे संवाद करते हैं. इसके तहत गाड़ियां अपनी स्पीड, लोकेशन, दिशा, एक्सेलेरेशन, ब्रेकिंग स्टेटस और ब्लाइंड स्पॉट से जुड़ी जानकारी आसपास मौजूद अन्य वाहनों को भेजती हैं और उनसे प्राप्त करती हैं. जैसे ही सिस्टम को किसी संभावित खतरे का संकेत मिलता है, ड्राइवर को तुरंत अलर्ट मिल जाता है.

कैसे करेगा हादसों को कम

V2V टेक्नोलॉजी खासतौर पर उन परिस्थितियों में बेहद उपयोगी साबित हो सकती है, जहां ड्राइवर को सामने या आसपास मौजूद खतरे का अंदाजा नहीं हो पाता. उदाहरण के तौर पर, अचानक ब्रेक लगाने वाली गाड़ी, मोड़ पर दिखाई न देने वाला वाहन या ब्लाइंड स्पॉट में मौजूद कार की जानकारी पहले ही मिल जाएगी. इससे टक्कर की आशंका काफी हद तक कम हो सकती है. यह सिस्टम 360 डिग्री तरीके से काम करेगा. ऐसे में अगर कोहरे में आगे की गाड़ी दिखाई नहीं दे रही हो या पीछे से कोई गाड़ी तेज रफ्तार से आ रही हो, तो उसकी भी जानकारी ड्राइवर को मिल जाएगी.

टेलीकॉम विभाग के साथ बनी संयुक्त टास्क फोर्स

नितिन गडकरी ने बताया कि इस तकनीक को लागू करने के लिए दूरसंचार विभाग के साथ एक संयुक्त टास्क फोर्स का गठन किया गया है. टेलीकॉम विभाग ने V2V कम्युनिकेशन के लिए 5.875–5.905 GHz बैंड में 30 MHz स्पेक्ट्रम आवंटित करने पर सहमति जताई है. यह स्पेक्ट्रम शॉर्ट-रेंज रेडियो सिग्नल के जरिए गाड़ियों को आपस में जोड़ने में इस्तेमाल होगा. परिवहन मंत्रालय इसे 2026 के अंत तक नोटिफाई कर सकता है और चरणबद्ध तरीके से लागू किया जाएगा.

नई दिल्ली में हुई बैठक

यह जानकारी नई दिल्ली में आयोजित राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों की वार्षिक बैठक के बाद दी गई. यह दो दिवसीय कार्यशाला भारत मंडपम में 7 और 8 जनवरी 2026 को आयोजित की गई थी. पहले दिन परिवहन सचिवों के साथ बैठक हुई, जबकि दूसरे दिन परिवहन मंत्रियों के साथ अहम मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की गई.

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