GST कट के बाद बदला ऑटो इंडस्ट्री का ट्रेंड, पेट्रोल-डीजल गाड़ियों की बिक्री तेज; EV की रफ्तार रही धीमी
भारत के ऑटो सेक्टर में 2025 के दौरान बड़ा बदलाव देखने को मिला है. पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर GST में कटौती के बाद ऑटो इंडस्ट्री का ट्रेंड बदलता नजर आया, जहां EV की कुल बिक्री बढ़ने के बावजूद कई सेगमेंट में इसकी बाजार हिस्सेदारी पर दबाव दिखा. दोपहिया और पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में EV की रफ्तार धीमी पड़ी, जबकि तीन पहिया सेगमेंट में मजबूती बनी रही.
Electric Vehicle Market 2025: भारत में इलेक्ट्रिक व्हीकल मार्केट को लेकर 2025 में एक दिलचस्प तस्वीर सामने आई है. जहां एक ओर इलेक्ट्रिक व्हीकल की कुल बिक्री में सालाना आधार पर बढ़ोतरी दर्ज की गई, वहीं दूसरी ओर पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर GST में कटौती के बाद कई सेगमेंट में EV की बाजार हिस्सेदारी पर दबाव देखा गया है. टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अक्टूबर 2025 से लागू हुए GST कट के बाद उपभोक्ताओं का रुझान दोबारा ICE गाड़ियों की ओर बढ़ा है. सरकार की ओर से पेट्रोल और डीजल गाड़ियों पर टैक्स कम किए जाने से इन वाहनों और इलेक्ट्रिक मॉडल्स के बीच कीमत का अंतर और बढ़ गया. इसका सीधा असर यह हुआ कि दिसंबर तिमाही में ICE गाड़ियों की बिक्री में तेज उछाल देखने को मिला, जबकि EV की बाजार हिस्सेदारी कई सेगमेंट में कमजोर पड़ गई.
दोपहिया और पैसेंजर व्हीकल में घटी EV हिस्सेदारी
रिपोर्ट के मुताबिक, दोपहिया सेगमेंट में 2024 में बैटरी इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की हिस्सेदारी करीब 6 फीसदी थी, जो जनवरी से सितंबर 2025 के बीच बढ़कर 8.1 फीसदी तक पहुंच गई थी. हालांकि, GST कट के बाद दिसंबर तिमाही में इलेक्ट्रिक दोपहिया वाहनों की हिस्सेदारी में गिरावट दर्ज की गई. पूरे साल के आंकड़ों पर नजर डालें तो 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर पेनिट्रेशन घटकर 6.3 फीसदी रह गई.
पैसेंजर व्हीकल सेगमेंट में भी यही ट्रेंड देखने को मिला. हाइब्रिड मॉडल्स को छोड़कर इलेक्ट्रिक कार्स और एसयूवी की हिस्सेदारी 2024 के 2.5 फीसदी से बढ़कर 2025 में करीब 4 फीसदी तक पहुंची, लेकिन GST कट के बाद ICE वाहनों की बढ़ती बिक्री ने EV की रफ्तार को धीमा कर दिया.
तीन पहिया सेगमेंट बना अपवाद
इस पूरे परिदृश्य में इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स एकमात्र ऐसा सेगमेंट रहा, जहां EV पेनिट्रेशन में मजबूत सुधार देखने को मिला. ई-रिक्शा को छोड़कर इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर्स की हिस्सेदारी 2024 में 12 फीसदी थी, जो 2025 में बढ़कर 18 फीसदी हो गई. कुल इलेक्ट्रिक थ्री-व्हीलर बिक्री में करीब 70 फीसदी हिस्सेदारी ई-रिक्शा की रही.
बिक्री बढ़ी, लेकिन हिस्सेदारी पर दबाव
हालांकि कुछ सेगमेंट में EV पेनिट्रेशन में गिरावट आई, लेकिन कुल इलेक्ट्रिक व्हीकल वॉल्यूम में बढ़ोतरी का सिलसिला जारी रहा. वाहन डेटा के मुताबिक, 2025 में इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स, थ्री-व्हीलर्स, कार और एसयूवी की कुल रजिस्ट्रेशन संख्या 16 फीसदी बढ़कर 22.7 लाख यूनिट्स तक पहुंच गई, जबकि 2024 में यह 19.5 लाख यूनिट्स थी.
इलेक्ट्रिक टू-व्हीलर्स की बिक्री 2025 में 11 फीसदी बढ़कर 12.8 लाख यूनिट्स हो गई. वहीं इलेक्ट्रिक पैसेंजर व्हीकल्स की बिक्री में सबसे तेज उछाल देखने को मिला, जहां रजिस्ट्रेशन 77 फीसदी बढ़कर 1.8 लाख यूनिट्स तक पहुंच गया. इसके पीछे नए मॉडल्स की लॉन्चिंग, मौजूदा कंपनियों का विस्तार और नए प्लेयर्स की एंट्री को प्रमुख वजह माना जा रहा है.
पैसेंजर व्हीकल मार्केट में रिकॉर्ड बिक्री
EV सेगमेंट पर दबाव के बावजूद कुल पैसेंजर व्हीकल मार्केट ने 2025 में शानदार प्रदर्शन किया. कार बिक्री सालाना आधार पर करीब 6 फीसदी बढ़कर रिकॉर्ड 4.5 मिलियन यूनिट्स तक पहुंच गई. टैक्स रैशनलाइजेशन और रेपो रेट में कटौती से उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता बढ़ी, जिसका सीधा फायदा ऑटो सेक्टर को मिला.
कुल मिलाकर, 2025 में GST कट ने भारतीय ऑटो मार्केट की दिशा को बदल दिया है. फिलहाल पेट्रोल-डीजल गाड़ियों को बढ़त मिलती दिख रही है और कई उपभोक्ताओं ने अपने EV खरीद के प्लान को कुछ समय के लिए टाल दिया है.
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