क्या आपका Ola-Uber हो जाएगा सस्ता? बजट से पहले TATA ने सरकार के सामने रखी फ्लीट EV पर इंसेंटिव की मांग

टाटा मोटर्स ने आगामी बजट में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों के लिए इंसेंटिव की मांग की है. कंपनी का कहना है कि पेट्रोल कारों पर GST घटने के बाद सस्ती पेट्रोल कारें बाजार में आ गई हैं. इससे सस्ती ईवी कारों पर दबाव बढ़ गया है.

टाटा मोटर्स Image Credit: Getty image

Fleet EV: भारत में इलेक्ट्रिक मोबिलिटी तेजी से बढ़ रही है, लेकिन आम आदमी के लिए सवाल वही है कि क्या EV कारें सचमुच सस्ती होंगी. खासकर ओला, उबर और दूसरी कैब सेवाओं में चलने वाली इलेक्ट्रिक गाड़ियां. इन गाड़ियों का किराया सीधे आपकी जेब से जुड़ा है. ऐसे में टाटा मोटर्स ने आगामी केंद्रीय बजट से पहले सरकार से एक बड़ी मांग रख दी है. कंपनी चाहती है कि एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों और फ्लीट में चलने वाली EV कारों को खास इंसेंटिव मिले.

टाटा मोटर्स का तर्क है कि फ्लीट EV कारें ज्यादा चलती हैं, ज्यादा प्रदूषण बचाती हैं और तेल आयात भी घटाती हैं. इसलिए इन्हें ज्यादा समर्थन मिलना चाहिए. सरकार पहले FAME-2 योजना में फ्लीट EV को शामिल कर चुकी है, लेकिन नई PM E-DRIVE योजना में इन्हें जगह नहीं मिली. अब टाटा मोटर्स चाहती है कि इन्हें फिर से शामिल किया जाए. अगर सरकार यह मांग मान लेती है, तो इसका सीधा असर कैब किराए, EV की कीमत और एयर क्वालिटी पर पड़ सकता है.

टाटा मोटर्स की बजट से बड़ी मांग

टाटा मोटर्स ने आगामी बजट में एंट्री-लेवल इलेक्ट्रिक कारों के लिए इंसेंटिव की मांग की है. कंपनी का कहना है कि पेट्रोल कारों पर GST घटने के बाद सस्ती पेट्रोल कारें बाजार में आ गई हैं. इससे सस्ती EV कारों पर दबाव बढ़ गया है. टाटा मोटर्स के पैसेंजर व्हीकल्स के MD और CEO शैलेश चंद्रा ने कहा कि सरकार ने GST 2.0, रेपो रेट में कटौती और टैक्स नियमों में बदलाव के जरिए ऑटो सेक्टर की मांग को बढ़ाया है. लेकिन EV के एंट्री सेगमेंट को अभी भी सहारे की जरूरत है.

क्यों जरूरी है फ्लीट ईवी पर इंसेंटिव

शैलेश चंद्रा ने बताया कि फ्लीट EV कारें कुल पैसेंजर व्हीकल बिक्री का सिर्फ 7 फीसदी हैं. लेकिन ये कुल पैसेंजर किलोमीटर का करीब 33 से 35 फीसदी कवर करती हैं. यानी ये गाड़ियां बहुत ज्यादा चलती हैं. एक फ्लीट कार औसतन निजी कार से पांच गुना ज्यादा चलती है. इसलिए अगर सरकार इन्हें सपोर्ट देती है, तो प्रदूषण कम करने और तेल आयात घटाने पर इसका बड़ा असर पड़ेगा.

पहले ये गाड़ियां FAME-2 योजना का हिस्सा थीं. लेकिन नई PM E-DRIVE योजना में इन्हें शामिल नहीं किया गया. टाटा मोटर्स चाहती है कि सरकार इस गलती को सुधारे और फ्लीट EV को फिर से प्रोत्साहन दे. अगर ऐसा होता है तो ओला-उबर जैसी कैब कंपनियों की लागत कम हो सकती है. इसका फायदा यात्रियों को सस्ते किराए के रूप में मिल सकता है.

क्या बढ़ेंगी टाटा की कारों की कीमतें

टाटा मोटर्स ने यह भी संकेत दिया है कि आने वाले दिनों में कारों की कीमत बढ़ सकती है. कंपनी का कहना है कि डॉलर के मुकाबले रुपये की कमजोरी और कच्चे माल की महंगाई से उसकी लागत करीब 2 फीसदी बढ़ी है. अभी तक कंपनी यह बोझ पूरी तरह ग्राहकों पर नहीं डाल पाई है. हालांकि कुछ लागत कटौती के उपाय किए गए हैं. फिर भी जल्द ही कीमत बढ़ाने पर फैसला लिया जाएगा. टाटा अकेली कंपनी नहीं है. कई ऑटो कंपनियां पहले ही कीमतें बढ़ा चुकी हैं.

आम आदमी पर असर क्या होगा

अगर सरकार एंट्री-लेवल EV और फ्लीट EV को इंसेंटिव देती है, तो सस्ती इलेक्ट्रिक कारें बाजार में आ सकती हैं. कैब कंपनियों की ऑपरेटिंग कॉस्ट कम होगी. इससे ओला-उबर का किराया स्थिर रह सकता है या कुछ मामलों में कम भी हो सकता है. साथ ही प्रदूषण घटेगा और पेट्रोल-डीजल पर निर्भरता कम होगी.

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