न करती है ज्यादा शोर, न दिखाती है तेज रफ्तार, लेकिन खेती की रीढ़ है यह इंडस्ट्री, स्थिरता है इस कंपनी की असली ताकत
खेती की अर्थव्यवस्था में कुछ कंपनियां ऐसी होती हैं जो सुर्खियों में नहीं रहतीं, लेकिन उनका असर हर मौसम में महसूस होता है. हालिया तिमाही आंकड़े इशारा करते हैं कि यह कंपनी शोर और रफ्तार से दूर रहकर स्थिरता पर काम कर रही है. सवाल यह है कि क्या यह संतुलन आगे भी बना रह पाएगा?
Fertiliser stock: खेती की चर्चा अक्सर फसलों, मौसम या MSP तक सिमट जाती है, लेकिन जिस बुनियाद पर पूरा कृषि ढांचा खड़ा है, वह आमतौर पर नजरों से ओझल रहती है. उर्वरक वही बुनियाद हैं. अगर खाद की आपूर्ति बिगड़े, तो पैदावार पर असर पड़ता है, महंगाई बढ़ती है और उसका दबाव शहरों तक महसूस होता है. ऐसे ही एक सेक्टर में काम करने वाली कंपनी है Southern Petrochemical Industries Corporation Ltd (SPIC), जो न तो तेजी से बढ़ने वाली कहानी है और न ही चमकदार टर्नअराउंड की. यह कहानी है टिके रहने की, झटकों से उबरने की और धीरे-धीरे संतुलन बनाने की.
फर्टिलाइजर कंपनियां आमतौर पर सीधी रेखा में नहीं चलतीं. सरकार की नीतियां, सब्सिडी का समय, गैस और ऊर्जा की कीमतें, बारिश और बुआई का चक्र, ये सभी चीजें एक साथ असर डालती हैं. जब हालात बिगड़ते हैं, तो अक्सर सब कुछ एक साथ बिगड़ता है. और जब सुधार आता है, तो उसकी सीमा भी तय होती है. SPIC के हालिया नतीजे इसी सच्चाई को दिखाते हैं.
कंपनी के ताजा नतीजे क्या कहते हैं
FY26 की पहली छमाही में SPIC का ऑपरेशंस से रेवेन्यू करीब 1,598 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल के मुकाबले लगभग स्थिर है. मार्जिन में भी बड़ा उतार-चढ़ाव नहीं दिखा. Q1 में ऑपरेटिंग मार्जिन 12% था, जो Q2 में घटकर 9% हो गया, लेकिन साल-दर-साल तुलना करें तो यह स्तर बहुत अलग नहीं है. Q2 FY26 में कंपनी का रेवेन्यू करीब 817 करोड़ रुपये रहा, जो पिछले साल की समान तिमाही के 760 करोड़ रुपये से ज्यादा है. प्रॉफिट बिफोर टैक्स लगभग 81 करोड़ रुपये रहा, जबकि साल भर पहले यह करीब 48 करोड़ रुपये था.
| वित्तीय आंकड़े | Q2 FY26 | Q2 FY25 |
|---|---|---|
| ऑपरेशंस से रेवेन्यू (₹ करोड़) | ~817 | ~760 |
| ऑपरेटिंग मार्जिन (%) | ~9% | ~9% |
| प्रॉफिट बिफोर टैक्स (₹ करोड़) | ~81 | ~48 |
उर्वरक जैसे अस्थिर सेक्टर में, जहां नतीजे तेजी से बदल सकते हैं, ऐसे स्थिर आंकड़े अपने आप में एक तरह की प्रगति माने जा सकते हैं. यहां बहुत तेज ग्रोथ से ज्यादा जरूरी है कि कारोबार बिना रुकावट चलता रहे.
SPIC का असली कारोबार
SPIC का मुख्य काम एग्री-इनपुट्स, खासतौर पर उर्वरक बनाना और बेचना है. कंपनी यूरिया, कॉम्प्लेक्स फर्टिलाइजर और अन्य जरूरी पौध पोषक तत्व तैयार करती है. ये ऐसे प्रोडक्ट नहीं हैं जिन्हें किसान ब्रांड देखकर चुनते हों. ये खेती की जरूरत हैं.
मांग इस बात पर निर्भर करती है कि कितनी जमीन पर बुआई हो रही है, कौन सी फसल बोई जा रही है और मौसम कैसा है. कीमतें भी पूरी तरह कंपनी के हाथ में नहीं होतीं. सरकार सब्सिडी और नीति के जरिए दाम तय करने में बड़ी भूमिका निभाती है. इसका मतलब यह है कि SPIC के पास प्रयोग करने की गुंजाइश सीमित रहती है.
कंपनी का मॉडल पूंजी-प्रधान है. प्लांट लगातार चलें तभी लागत काबू में रहती है. अगर उत्पादन रुका, तो खर्च बढ़ता जाता है. ऐसे में यहां ग्रोथ से ज्यादा अहमियत स्थिरता की होती है.
हालिया मुनाफे के पीछे की कहानी
FY26 की पहली छमाही में प्रॉफिट बिफोर टैक्स में जो सुधार दिखा, उसका बड़ा हिस्सा “अन्य आय” से आया. इस अवधि में कंपनी ने करीब 43 करोड़ रुपये की अन्य आय दिखाई, जबकि एक साल पहले यह 4 करोड़ रुपये से भी कम थी.
यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से बाढ़ से हुए नुकसान और दिसंबर 2023 से मार्च 2024 के बीच प्लांट बंद रहने पर मिले बीमा दावों से आई. कंपनी ने कुल करीब 85 करोड़ रुपये के क्लेम डाले थे. सितंबर 2025 तक उसे 55 करोड़ रुपये मिल चुके थे और 21 करोड़ रुपये अभी प्रक्रिया में हैं. इसके अलावा, करीब 20 करोड़ रुपये का मुनाफा-हानि मुआवजा भी दर्ज किया गया.
बीमा से मिले ये पैसे कैश फ्लो सुधारते हैं और बैलेंस शीट को साफ करते हैं, लेकिन ये कंपनी की स्थायी कमाई की ताकत नहीं बदलते. जब ये एकमुश्त आय खत्म होगी, तब फिर से नजर ऑपरेशनल परफॉर्मेंस पर ही जाएगी.
बैलेंस शीट में क्या बदला
FY24 में बाढ़ से जुड़े व्यवधानों के बाद कर्ज एक चिंता का विषय था, लेकिन FY25 तक स्थिति सुधरी. कंपनी का डेट-इक्विटी रेशियो घटकर 0.35 पर आ गया, जो एक साल पहले 0.49 था.
डेट सर्विस कवरेज रेशियो भी FY25 में बढ़कर 2.51 हो गया, जबकि एक साल पहले यह 0.89 था. यानी ऑपरेटिंग कैश फ्लो अब कर्ज चुकाने के लिए पर्याप्त है. FY25 में कंपनी ने 2 रुपये प्रति शेयर का डिविडेंड दिया, जो 20% पेआउट के बराबर है. रेगुलेटेड और साइक्लिकल बिजनेस में डिविडेंड यह संकेत देता है कि मैनेजमेंट को अपनी नकदी स्थिति पर भरोसा है.
| संकेतक | स्थिति |
|---|---|
| डेट-इक्विटी | 0.35 |
| डेट सर्विस कवरेज | 2.51 |
| डिविडेंड | ₹2 प्रति शेयर |
बोर्ड और मैनेजमेंट का संकेत
SPIC के चेयरमैन अश्विन सी मुथैया हैं और ई. बालू पूरे समय के डायरेक्टर के तौर पर ऑपरेशंस संभालते हैं. कंपनी पूरी तरह प्रमोटर-ड्रिवन नहीं है. FY25 में 11 सदस्यों के बोर्ड में 6 स्वतंत्र निदेशक हैं. मुश्किल दौर के बाद, यह संरचना नियंत्रण और अनुशासन पर जोर दिखाती है.
वैल्यूएशन क्या कहता है
करीब 9 गुना P/E पर SPIC अपने लंबे औसत के आसपास ट्रेड कर रही है. लेकिन इस सेक्टर में सिर्फ मुनाफा देखना काफी नहीं होता. यहां प्राइस-टू-बुक ज्यादा अहम होता है. SPIC करीब 1.25 गुना बुक वैल्यू पर ट्रेड कर रही है, जो इसके पांच साल के औसत 1.6 से नीचे है. साफ है कि बाजार अभी पूरी तरह आश्वस्त नहीं है. बीमा से आए मुनाफे के बाद निवेशक यह देखना चाहते हैं कि ऑपरेटिंग परफॉर्मेंस बिना किसी सहारे के कितनी टिकाऊ रहती है.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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