Budget 2026: क्रिप्टो एक्सचेंज बनाने की तैयारी! बजट में हो सकता है ऐलान; SEBI और RBI को मिलेगी जिम्मेदारी
वित्त मंत्रालय SEBI और RBI के साथ बजट 2026-27 से पहले क्रिप्टो एक्सचेंज के लिए रेलगुलेटरी स्ट्रक्चर तय करने पर चर्चा कर रहा है. योजना के अनुसार SEBI मुख्य रेगुलेटर होगा, जबकि RBI विदेशी निवेश और सीमा पार लेनदेन की निगरानी करेगा. वर्तमान में निगरानी अलग-अलग एजेंसियों द्वारा की जा रही है.
Crypto Exchange Announcement In Budget: केंद्र सरकार क्रिप्टो एक्सचेंज को लेकर बड़ा कदम उठाने की तैयारी में है. वित्त मंत्रालय ने बजट 2026-27 से पहले SEBI और RBI से चर्चा शुरू की है. सरकार का लक्ष्य क्रिप्टो बाजार के लिए एक स्पष्ट और मजबूत रेगुलेटरी स्ट्रक्चर तैयार करना है. अभी क्रिप्टो पर टैक्स तो लगाया जा रहा है लेकिन कोई एक मुख्य बाजार रेगुलेटर नहीं है. इस वजह से निगरानी, निवेशक सुरक्षा और लेनदेन ट्रैकिंग में दिक्कत आती है. नया फ्रेमवर्क इन कमियों को दूर करने की दिशा में अहम माना जा रहा है.
SEBI को मिल सकती है कमान
बिजनेस स्टैंडर्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार की शुरुआती योजना के अनुसार, SEBI क्रिप्टो एक्सचेंज से जुड़े मामलों का मुख्य रेगुलेटर बनेगी. सभी भारतीय क्रिप्टो एक्सचेंज को SEBI में रजिस्ट्रेशन कराना होगा. ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की निगरानी, डिस्क्लोजर नियम और निवेशक सुरक्षा SEBI के दायरे में आएंगे. इससे क्रिप्टो बाजार में ट्रांसपेरेंसी बढ़ेगी और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा. रेगुलेटरी स्ट्रक्चर के आने से एक्सचेंज की विश्वसनीयता भी बढ़ेगी.
RBI देखेगा विदेशी निवेश
RBI को क्रिप्टो ट्रांजेक्शन में विदेशी निवेश और सीमा पार ट्रांजेक्शन की निगरानी दी जा सकती है. इससे ऑफशोर एक्सचेंज और विदेशी वॉलेट से जुड़े लेनदेन को ट्रैक करना आसान होगा. RBI की निगरानी से वित्तीय स्थिरता और कैपिटल फ्लो पर कंट्रोल मजबूत होगा. यह कदम निवेशकों और बाजार दोनों के लिए सुरक्षा का काम करेगा. इससे संभावित धोखाधड़ी और अनियमित लेनदेन पर कड़ी नजर रखी जा सकेगी.
अभी कैसा है सिस्टम
फिलहाल क्रिप्टो एसेट की निगरानी अलग-अलग एजेंसियां कर रही हैं. इनकम टैक्स विभाग वर्चुअल डिजिटल एसेट पर टैक्स देखता है. FIU मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े मामलों की निगरानी करता है. प्रवर्तन एजेंसियां अवैध लेनदेन की जांच करती हैं. एकल रेगुलेटर की कमी को सरकार लंबे समय से बड़ी कमजोरी मानती रही है.
रेगुलेशन की कमी
भारत में क्रिप्टो लेनदेन पर 1 फीसदी टीडीएस लागू है और इनकम टैक्स रिटर्न में शेड्यूल VDA के तहत जानकारी देनी होती है. बैंक और क्रिप्टो प्लेटफॉर्म ट्रांजेक्शन डेटा टैक्स विभाग को रिपोर्ट करते हैं. लेकिन ये व्यवस्था बाद में जांच तक सीमित है. इससे मार्केट कंडक्ट, निवेशक सुरक्षा और रियल टाइम निगरानी की समस्याएं बनी रहती हैं. रेगुलेटरी फ्रेमवर्क इन कमियों को दूर करेगा.
मनी लॉन्ड्रिंग और आतंकी फंडिंग की चिंता
प्रवर्तन एजेंसियों ने क्रिप्टो से जुड़े जोखिमों को लेकर चिंता जताई है. क्रिप्टो लेनदेन गोपनीय और सीमा रहित होते हैं. प्राइवेट वॉलेट और डिसेंट्रलाइज्ड प्लेटफॉर्म ट्रैकिंग को कठिन बनाते हैं. इस वजह से सरकार कड़े नियम लाने पर विचार कर रही है. नया फ्रेमवर्क सुरक्षा एजेंसियों को निगरानी में मजबूती देगा और जोखिम कम करेगा.
अंतरराष्ट्रीय दबाव और भारत की तैयारी
भारत ने OECD के क्रिप्टो एसेट रिपोर्टिंग फ्रेमवर्क का समर्थन किया है. लेकिन रेगुलेशन के बिना इसे लागू करना मुश्किल है. यूरोप ने मार्केट्स इन क्रिप्टो एसेट नियम लागू कर दिए हैं. अमेरिका भी स्टेबलकॉइन समेत कई हिस्सों पर कानून बना रहा है. भारत वैश्विक मानकों के अनुरूप कदम बढ़ाने की तैयारी में है. यह निवेशकों और बाजार के लिए एक सकारात्मक संकेत है.