10min डिलीवरी से कितना कमाती हैं Blinkit, Swiggy, Zepto, रोज मिलते हैं 30-50 लाख ऑर्डर, अब कैसे होगी कमाई
केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद क्विक कॉमर्स कंपनियों ने 10 मिनट में डिलीवरी का दावा बंद कर दिया है. इससे Blinkit, Zepto और Swiggy Instamart जैसे प्लेटफॉर्म्स के बिजनेस पर गहरा असर पड़ सकता है. तेज ग्रोथ के बावजूद घाटे से जूझ रहा यह सेक्टर अब मुनाफे और विस्तार के बीच संतुलन की चुनौती झेल रहा है.
Explained Business of Q-commerce Platforms after 10min Delivery Halt Service: अगली बार जब आप Blinkit, Zepto, Swiggy Instamart या Zomato जैसी क्विक कॉमर्स प्लेटफॉर्म्स से सामान ऑर्डर करें, तो ये उम्मीद मत रखिएगा कि आपका ऑर्डर सिर्फ 10 मिनट में आपके दरवाजे पर पहुंच जाएगा. केंद्र सरकार के हस्तक्षेप के बाद अब इन कंपनियों ने 10 मिनट में डिलीवरी का वादा पूरी तरह बंद कर दिया है. इस बदलाव से ग्राहकों को थोड़ा ज्यादा इंतजार करना पड़ सकता है, लेकिन क्विक कॉमर्स कंपनियों के कारोबार पर भी गहरा असर पड़ेगा. पिछले चार सालों में क्विक कॉमर्स मार्केट में 2372% से ज्यादा की जबरदस्त बढ़ोतरी हुई है, जिसकी वजह से हर साल नए प्लेयर इस क्षेत्र में एंट्री कर रहे हैं.
Impact on
कितना बड़ा है क्विक कॉमर्स मार्केट?
भारत का क्विक कॉमर्स बाजार बहुत तेजी से बढ़ा है. रिपोर्ट्स के अनुसार, 2022 में इसका GMV (ग्रॉस मर्चेंडाइज वैल्यू) करीब 2,700 करोड़ रुपये था, जो अब हजारों करोड़ तक पहुंच चुका है. यानी पिछले 4 सालों में 2,300% से ज्यादा की बढ़ोतरी हुई. लोग रोजमर्रा की छोटी-बड़ी जरूरतों के लिए इन प्लेटफॉर्म्स पर भरोसा कर रहे हैं. ऑनलाइन ग्रॉसरी में क्विक कॉमर्स का हिस्सा लगभग 70% है और कुल ई-रिटेल खर्च का करीब 10% इसी से आता है.
रोजाना कितने ऑर्डर होते हैं?
सामान्य दिनों में इन प्लेटफॉर्म्स पर 30 लाख से 50 लाख ऑर्डर आते हैं. पीक टाइम जैसे त्योहारों या स्पेशल दिनों में यह संख्या और बढ़ जाती है. उदाहरण के लिए, 31 दिसंबर 2025 को करीब 75 लाख ऑर्डर हुए थे. औसत ऑर्डर वैल्यू 500 से 700 रुपये के बीच होती है, जिससे उस दिन अकेले 375 करोड़ रुपये से ज्यादा का कारोबार हुआ.
डार्क स्टोर्स का नेटवर्क
तेज डिलीवरी के लिए कंपनियां शहरों में डार्क स्टोर्स (माइक्रो-वेयरहाउस) बनाती हैं. ये सिर्फ ऑनलाइन ऑर्डर पूरे करने के लिए होते हैं. यहां ग्राहक सीधे खरीदारी नहीं कर सकते. देशभर में ऐसे 2,500 से 3,000 डार्क स्टोर्स हैं, जो आमतौर पर घरों से 400 मीटर से 2 किलोमीटर के दायरे में स्थित होते हैं. Blinkit के पास अकेले करीब 1,300 स्टोर्स हैं. अनुमान है कि 2030 तक यह संख्या 7,500 तक पहुंच सकती है.
प्रमुख कंपनियों का वित्तीय हाल
तेज ग्रोथ के बावजूद ये कंपनियां अभी घाटे में चल रही हैं, क्योंकि वे इंफ्रास्ट्रक्चर, कस्टमर एक्विजिशन और एक्सपेंशन पर भारी निवेश कर रही हैं. वित्त वर्ष 2024-25 में Zepto को 1,249 करोड़ रुपये, Blinkit को 158 करोड़ रुपये और Swiggy Instamart को 840 करोड़ रुपये का नुकसान हुआ. भविष्य में ग्रोथ और प्रॉफिटेबिलिटी के बीच संतुलन बनाना इनके लिए चुनौती रहेगा.
| पैरामीटर | Zepto | Blinkit | Swiggy Instamart |
|---|---|---|---|
| रेवेन्यू | ₹11,110 करोड़ | ₹11,679 करोड़ | ₹7,022 करोड़ |
| शुद्ध लाभ/हानि* | -1,249 करोड़ रुपये | -₹158 करोड़ | -₹840 करोड़ |
| डार्क स्टोर्स की संख्या | 1,100 | 1,300–1,500+ | 1,062 |
| बाजार हिस्सेदारी | 26% | 46% | 28% |
| औसत ऑर्डर मूल्य (AOV) | ₹430–470 | ₹625 | 487 रुपये |
| डेली एक्टिव यूजर्स (DAU) | ₹49 लाख | 62 लाख | 11 लाख |
| संचालन वाले शहर | 80 | 204 | 104 |
कंपनियों का पक्ष
Zomato CEO दीपिंदर गोयल का कहना है कि 10 मिनट की डिलीवरी डार्क स्टोर्स की अच्छी लोकेशन और राइडर्स की औसत स्पीड (16 किमी प्रति घंटा) की वजह से संभव होती है. कंपनियां दावा करती हैं कि डिलीवरी पार्टनर्स हर घंटे औसतन 102 रुपये कमाते हैं, जो सेक्टर में प्रतिस्पर्धी कमाई मानी जाती है. पिछले महीनों में 22 शहरों के एक लाख से ज्यादा गिग वर्कर्स ने हड़ताल की. यूनियनों का कहना है कि कंपनियां 10 मिनट डिलीवरी के नाम पर शोषण कर रही है. औसतन 12 से 14 घंटे काम करने पर भी कई वर्कर्स 25 हजार रुपये से कम कमाते हैं. वे न्यूनतम वेतन, तय काम के घंटे, ओवरटाइम और सामाजिक सुरक्षा की मांग कर रहे हैं.
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