Budget 2026: फुटवियर इंडस्ट्री पर सरकार का फोकस, 1 अरब डॉलर के पैकेज से बूस्ट की तैयारी, टैरिफ की मार से मिलेगी राहत!
Budget 2026 में सरकार फुटवियर इंडस्ट्री को राहत देने के लिए विशेष पैकेज ला सकती है, जिससे अमेरिकी टैरिफ की मार से उबरने में मदद मिलेगी. यह पैकेज कच्चे माल से लेकर तैयार जूतों तक पूरी वैल्यू चेन को कवर करेगा और घरेलू उत्पादन, निवेश व निर्यात को बढ़ावा देने में मदद करेगा.
Budget 2026 Focus on Footwear Industry: अमेरिका की ओर से भारतीय निर्यात पर लगाए गए 50 फीसदी टैरिफ की मार फुटवियर इंडस्ट्री पर काफी पड़ी है. ऐसे में उद्योग को राहत देने के लिए सरकार बजट 2026 पर इस पर फोकस कर सकती है. टीओआई की रिपोर्ट के मुताबिक सरकार करीब 1 अरब डॉलर का विशेष पैकेज लाने पर विचार कर रही है. अधिकारियों का कहना है कि पैकेज पर बातचीत अंतिम चरण में है और जल्द ही इसकी घोषणा की जा सकती है.
पूरी वैल्यू चेन को साधने की तैयारी
इससे पहले उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग यानी DPIIT ने जूता उद्योग के लिए PLI योजना का प्रस्ताव रखा था, लेकिन बदली हुई सरकारी नीति के बाद वह आगे नहीं बढ़ सका. इसके बाद सरकार ने एक समग्र पैकेज तैयार किया है, जो कच्चे माल से लेकर इनपुट्स और तैयार जूते तक पूरी सप्लाई चेन को कवर करेगा. यह योजना खास तौर पर श्रम-प्रधान सेक्टर में निवेश को प्रोत्साहित करने के लिए बनाई गई है.
खास मॉडल तैयार करने की प्लानिंग
सरकार इलेक्ट्रॉनिक्स सेक्टर की तरह फुटवियर इंडस्ट्री में भी ऐसा मॉडल अपनाने पर विचार कर रही है, जिसमें कंपोनेंट्स और इनपुट्स को भी प्रोत्साहन के दायरे में लाया जाए. इसका मकसद भारत को वैश्विक वैल्यू चेन का अहम हिस्सा बनना है. इससे घरेलू उत्पादन के साथ-साथ निर्यात को भी बढ़ावा मिलेगा.
घरेलू मांग भी बनेगी सहारा
घरेलू स्तर पर भी फुटवियर बाजार में तेज बढ़ोतरी की संभावना है. फिलहाल भारत में एक व्यक्ति औसतन साल में दो जोड़ी जूते खरीदता है, जो बढ़कर तीन जोड़ी तक पहुंच सकता है. जबकि वैश्विक औसत छह से सात जोड़ी का है. सरकार को उम्मीद है कि घरेलू मांग और निर्यात दोनों मिलकर फुटवियर इंडस्ट्री को नई रफ्तार देंगे.
FTA से खुलेंगे नए बाजार
यह पहल ऐसे समय में हो रही है जब भारत फ्री ट्रेड एग्रीमेंट्स को आक्रामक तरीके से आगे बढ़ा रहा है. यूरोपीय यूनियन और ब्रिटेन के साथ संभावित समझौतों से भारतीय जूतों को ड्यूटी में राहत मिलने की उम्मीद है. इससे आने वाले महीनों में बनने वाली अतिरिक्त क्षमता को अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने में मदद मिलेगी.
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दुनिया में दूसरा सबसे बड़ा उत्पादक भारत
भारत दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा फुटवियर उत्पादक देश है. कभी भारत लेदर फुटवियर में बड़ा खिलाड़ी था, लेकिन समय के साथ ग्लोबल ट्रेंड बदल गया. स्पोर्ट्स शूज और एथलीट शूज का दबदबा बढ़ा, जिसमें चीन आगे निकल गया और वियतनाम ने मेगा फैक्ट्रियों के जरिए मजबूत पकड़ बना ली. कई भारतीय कंपनियां अब विदेशी ब्रांड्स, खासकर ताइवान की कंपनियों, के लिए कॉन्ट्रैक्ट मैन्युफैक्चरिंग कर रही हैं. लेकिन अमेरिकी टैरिफ ने सेक्टर की निवेश योजनाओं को झटका दिया है.
घरेलू जूता निर्माताओं के मुताबिक भारतीय फुटवियर इंडस्ट्री की सबसे बड़ी समस्या इनपुट्स की है. सोल और जूते के अन्य हिस्सों के लिए जरूरी कच्चा माल बड़े पैमाने पर चीन से आता है. ऊपर से इन कच्चे माल पर लगने वाले ऊंचे टैरिफ घरेलू उत्पादन को नुकसान पहुंचाते हैं, जिससे आयात बढ़ जाता है. इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखते हुए सरकार इस बजट में इंडस्ट्री को राहत देने और टैरिफ के प्रभाव से बचाने के लिए खास कदम उठा सकती है.
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