Budget 2026: क्रिप्टो इंडस्ट्री को बजट से है ये उम्मीद, जानें अभी कितना लगता है टैक्स, कम हो TDS का बोझ
बजट 2026 को लेकर क्रिप्टो निवेशकों की उम्मीदें बढ़ गई हैं. हालांकि सरकार की ओर से कोई आधिकारिक संकेत नहीं मिला है, लेकिन माना जा रहा है कि इस बार डिजिटल एसेट्स से जुड़े नियमों को सरल और स्पष्ट किया जा सकता है. खासतौर पर क्रिप्टो ट्रांजैक्शन पर लगने वाले 1% TDS में राहत की उम्मीद जताई जा रही है.
Budget 2026: 1 फरवरी को वित्त वर्ष 2026-27 के लिए बजट पेश किया जाएगा. आम नागरिकों से लेकर निवेशकों और कारोबारी तक, सभी की निगाहें इस बजट पर टिकी हुई हैं. बीते कुछ वर्षों में निवेश के नए विकल्प तेजी से उभरे हैं, जिनमें क्रिप्टोकरेंसी प्रमुख रूप से शामिल है. हाल के वर्षों में निवेशकों के बीच इसकी लोकप्रियता में बढ़ोतरी हुई है. फिलहाल क्रिप्टोकरेंसी को लेकर कोई व्यापक और स्पष्ट नियामक ढांचा मौजूद नहीं है, लेकिन यह भी तथ्य है कि इसे अवैध नहीं माना गया है. ऐसे में क्रिप्टोकरेंसी सहित अन्य Virtual Digital Assets (VDA) से जुड़े नियमों में स्पष्टता और टैक्स व्यवस्था में संभावित राहत को लेकर उम्मीदें जताई जा रही हैं. इस रिपोर्ट में भारतीय कानून के तहत VDA की परिभाषा, मौजूदा नियमों और लागू कर व्यवस्था की जानकारी दी गई है.
क्या है Virtual Digital Assets की परिभाषा?
भारत में क्रिप्टोकरेंसी और इससे जुड़े डिजिटल एसेट्स को Virtual Digital Assets (VDA) की कैटेगरी में रखा गया है. सरकार ने पहली बार Finance Act, 2022 के जरिए इनकम टैक्स एक्ट, 1961 में Section 2(47A) जोड़कर VDA की स्पष्ट परिभाषा दी.
इस प्रावधान के अनुसार, Virtual Digital Asset का मतलब किसी भी ऐसी जानकारी, कोड, संख्या या टोकन से है,
- जो क्रिप्टोग्राफिक तरीकों या किसी अन्य तकनीक से तैयार किया गया हो.
- जो डिजिटल रूप में किसी वैल्यू के बराबर हो.
- जिसे इलेक्ट्रॉनिक तरीके से ट्रांसफर, स्टोर या ट्रेड किया जा सकता हो.
हालांकि, इस परिभाषा में भारतीय करेंसी (जैसे रुपये) और विदेशी मुद्रा को साफ तौर पर शामिल नहीं किया गया है. इसके अलावा, केंद्र सरकार को यह अधिकार भी दिया गया है कि वह भविष्य में कुछ अन्य एसेट्स को VDA की परिभाषा से बाहर कर सके. भारत में क्रिप्टोकरेंसी, डिजिटल टोकन और ब्लॉकचेन आधारित एसेट्स को टैक्स के उद्देश्य से Virtual Digital Assets माना जाता है और उन पर इनकम टैक्स कानून लागू होता है.
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कितना लगता है टैक्स?
इनकम टैक्स एक्ट के अनुसार, किसी भी वर्चुअल डिजिटल एसेट की बिक्री, ट्रांसफर या एक्सचेंज से होने वाली आय पर Section 115BBH के तहत सीधे 30% टैक्स लगाया जाता है. इसके अलावा इस टैक्स पर सरचार्ज और सेस भी लागू होता है. क्रिप्टो से हुए नुकसान को किसी अन्य आय से सेट-ऑफ नहीं किया जा सकता न ही इस नुकसान को आने वाले वर्षों में आगे ले जाया जा सकता है. केवल क्रिप्टो खरीदने की लागत ही घटाने की अनुमति है. इसके साथ ही, क्रिप्टो ट्रांजेक्शन पर 1% TDS भी लागू है, जो ट्रांजेक्शन के समय काटा जाता है.
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बजट 2026 से क्या है उम्मीद?
हालांकि सरकार की ओर से अभी तक कोई औपचारिक संकेत नहीं दिया गया है, लेकिन बजट 2026 से यह उम्मीद की जा रही है कि इसमें डिजिटल एसेट्स को लेकर ज्यादा स्पष्टता और नियमों को सरल बनाने पर जोर दिया जाएगा. ET की एक रिपोर्ट के अनुसार, बाजार की सबसे बड़ी उम्मीद Section 194S के तहत लगने वाले 1% TDS को लेकर है. साथ ही निवेशकों को उम्मीद है कि इससे होने वाले मुनाफे पर लगने वाले टैक्स में कटौती की जाए.
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