Union Budget 2026: 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान, कैपेक्स बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया
केंद्रीय बजट की शुरुआती घोषणाओं ने इंफ्रास्ट्रक्चर में बड़ा ऐलान कियी है. कनेक्टिविटी, टिकाऊ परिवहन और सार्वजनिक निवेश से जुड़े संकेत यह बता रहे हैं कि सरकार की प्राथमिकता लॉन्ग-टर्म ग्रोथ पर टिकी है. इन फैसलों का असर आने वाले समय में कई सेक्टरों पर देखने को मिल सकता है.
Union Budget 2026: 7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का ऐलान, कैपेक्स बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने केंद्रीय बजट 2026 पेश करते हुए सरकार के इंफ्रास्ट्रक्चर रोडमैप की एक अहम झलक दी. बजट स्पीच के दौरान उन्होंने साफ किया कि आने वाले वर्षों में भारत की ग्रोथ रणनीति का केंद्र बिंदु कनेक्टिविटी, टिकाऊ परिवहन और बड़े स्तर पर सार्वजनिक निवेश रहेगा. इसी कड़ी में सरकार ने देश में हाई-स्पीड रेल नेटवर्क के बड़े विस्तार और पूंजीगत व्यय (कैपेक्स) में भारी बढ़ोतरी का ऐलान किया, जिसे इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित विकास की दिशा में एक मजबूत कदम माना जा रहा है.
7 हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर का प्रस्ताव
बजट भाषण में वित्त मंत्री ने घोषणा की कि सरकार पर्यावरण के अनुकूल और तेज यात्री परिवहन को बढ़ावा देने के लिए देश में सात नए हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर विकसित करेगी. इन कॉरिडोर का मकसद प्रमुख आर्थिक, औद्योगिक और सांस्कृतिक केंद्रों को जोड़ना है, ताकि लंबी दूरी की यात्रा का समय घटे और सड़क तथा पारंपरिक रेल नेटवर्क पर दबाव कम हो.
प्रस्तावित हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर इस प्रकार हैं-
- मुंबई से पुणे,
- पुणे से हैदराबाद,
- हैदराबाद से बेंगलुरु,
- हैदराबाद से चेन्नई,
- चेन्नई से बेंगलुरु,
- दिल्ली से वाराणसी
- वाराणसी से सिलीगुड़ी
इन रूट्स के जरिए मेट्रो शहरों के साथ-साथ तेजी से विकसित हो रहे शहरी और औद्योगिक हब्स को जोड़ा जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे न सिर्फ यात्रा का समय काफी कम होगा, बल्कि लॉन्ग डिस्टेंस ट्रैवल का कार्बन फुटप्रिंट भी घटेगा.
इंफ्रास्ट्रक्चर-आधारित ग्रोथ पर सरकार का फोकस
हाई-स्पीड रेल कॉरिडोर के साथ ही वित्त मंत्री ने कैपिटल खर्च में बढ़ोतरी का प्रस्ताव रखा है. वित्त मंत्री ने बताया कि वित्त वर्ष 2026-27 के लिए पब्लिक कैपेक्स को बढ़ाकर ₹12.2 लाख करोड़ किया जा रहा है, जो चालू वित्त वर्ष के बजट अनुमान ₹11.2 लाख करोड़ से अधिक है.
उन्होंने यह भी रेखांकित किया कि वर्ष 2014-15 में कैपेक्स करीब ₹2 लाख करोड़ था, जो अब कई गुना बढ़ चुका है.
मैन्युफैक्चरिंग और रोजगार को मिलेगा सपोर्ट
सरकार का कहना है कि बढ़ा हुआ कैपेक्स केवल सड़क, रेल और ट्रांसपोर्ट तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को भी मजबूती मिलेगी और बड़े पैमाने पर रोजगार सृजन होगा. हाई-स्पीड रेल जैसे प्रोजेक्ट्स से स्टील, सीमेंट, इंजीनियरिंग, कंस्ट्रक्शन और कैपिटल गुड्स सेक्टर को भी सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है.
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