क्या है STT जिसने तोड़ी मार्केट की कमर, अब हर F&O ट्रांजैक्शन पर इतना बढ़ जाएगा टैक्स; पैसा लगाने से पहले जानें पूरा कैलकुलेशन

केंद्रीय बजट 2026-27 में सरकार ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस पर सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन टैक्स (STT) बढ़ाने का ऐलान किया है, जिससे डेरिवेटिव निवेशकों की लागत बढ़ गई है. फ्यूचर्स पर STT को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है, जबकि ऑप्शंस पर भी टैक्स बढ़ाने का प्रस्ताव है. इस फैसले के बाद बाजार में तेज गिरावट देखने को मिली और ट्रेडर्स में चिंता बढ़ गई है. जानिए STT क्या है, क्यों इसे लेकर विरोध हो रहा है और निवेशकों के लिए इसके क्या मायने हैं.

क्या है STT? Image Credit: @Money9live

What is STT: केंद्रीय बजट 2026-27 में वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने शेयर बाजार के डेरिवेटिव निवेशकों को बड़ा झटका दिया है. 1 फरवरी, रविवार को संसद में बजट पेश करते हुए वित्त मंत्री ने फ्यूचर्स और ऑप्शंस (F&O) दोनों पर Securities Transaction Tax (STT) बढ़ाने का प्रस्ताव रखा. सबसे बड़ा बदलाव यह है कि फ्यूचर्स पर STT को 0.02 फीसदी से बढ़ाकर 0.05 फीसदी कर दिया गया है. इससे F&O सेगमेंट में ट्रेडिंग करने वालों की लागत और बढ़ जाएगी.

क्या है STT (Securities Transaction Tax)?

STT एक डायरेक्ट टैक्स है, जो भारत के मान्यता प्राप्त स्टॉक एक्सचेंजों पर होने वाले सिक्योरिटीज ट्रांजैक्शन की वैल्यू पर लगाया जाता है. यह टैक्स हर उस सौदे पर लगता है, जिसमें इक्विटी शेयर, इक्विटी म्यूचुअल फंड, फ्यूचर्स और ऑप्शंस की खरीद-बिक्री होती है. खास बात यह है कि STT मुनाफा या नुकसान देखे बिना हर ट्रांजैक्शन पर वसूला जाता है.

ट्रेडर्स को STT से दिक्कत क्यों?

पिछले कुछ बजट में STT और कैपिटल गेन टैक्स दोनों में बढ़ोतरी की गई है. ऑप्शंस की बिक्री पर STT 0.0625 फीसदी से बढ़ाकर 0.1 फीसदी कर दिया गया था वहीं, फ्यूचर्स पर STT पहले ही 0.0125 फीसदी से बढ़कर 0.02 फीसदी हुआ था. अब बजट 2026 में फ्यूचर्स पर STT को और बढ़ाकर 0.05 फीसदी और ऑप्शंस प्रीमियम पर लगने वाला STT को बढ़ाकर 0.15 फीसदी कर दिया गया. इससे इतर, पिछले साल LTCG टैक्स 10 फीसदी से बढ़कर 12.5 फीसदी और STCG टैक्स 15 फीसदी से बढ़कर 20 फीसदी कर दिया गया था.

बाजार ने किया रिएक्ट

इस घोषणा के तुरंत बाद ही बाजार ने रिएक्ट किया और दोनों प्रमुख सूचकांक बड़े स्तर पर टूट गए थे. सेंसेक्स में 2000 अंकों से ज्यादा की गिरावट देखी गई. हालांकि, बाद में बाजार में रिकवरी दिखी. दोपहर 12:45 तक निफ्टी 280 अंक और सेंसेक्स 800 अंक तक टूटकर कारोबार करते दिखे. इससे इतर, बैंक निफ्टी भी 600 अंक तक टूटा है. इसी के साथ कई बड़े स्टॉक्स में भी बिकवाली दिखी.

इंडस्ट्री ने STT घटाने की उठाई थी मांग

नवंबर 2025 में हुई प्री-बजट मीटिंग में कैपिटल मार्केट इंडस्ट्री ने सरकार से साफ तौर पर मांग की थी कि कैश मार्केट में STT कम किया जाए, डेरिवेटिव्स और इक्विटी के बीच टैक्स संतुलन बनाया जाए. इससे मार्केट की लिक्विडिटी और डेप्थ सुधरेगी. हालांकि बजट 2026 में राहत की बजाय टैक्स और बढ़ा दिया गया.

भारत में STT कब लागू हुआ?

भारत में STT की शुरुआत 1 अक्टूबर 2004 को की गई थी. उस समय इसका उद्देश्य था-

  • शेयर बाजार में टैक्स चोरी रोकना
  • टैक्स कलेक्शन को आसान बनाना
  • लॉन्ग टर्म कैपिटल गेन (LTCG) टैक्स की जगह लेना

हालांकि, 2018 के बजट में LTCG टैक्स दोबारा लागू कर दिया गया, लेकिन STT को खत्म नहीं किया गया. इससे निवेशकों पर टैक्स का बोझ दोगुना सा हो गया.

Zerodha के नितिन कामथ ने क्यों जताई चिंता?

Zerodha के को-फाउंडर नितिन कामथ ने STT को लेकर खुलकर नाराजगी जताई है. उन्होंने कहा कि STT तब लाया गया था, जब LTCG टैक्स हटाया गया था लेकिन अब LTCG भी है और STT भी, जिससे निवेशकों पर भारी बोझ पड़ रहा है. कामथ के मुताबिक, FY26 के लिए STT कलेक्शन का अनुमान 78,000 करोड़ रुपये था, लेकिन 1 जनवरी तक सिर्फ करीब 45,000 करोड़ रुपये ही वसूले जा सके. उनका मानना है कि अगर 2024 में STT में 60 फीसदी की बढ़ोतरी नहीं की गई होती, तो सरकार का कुल टैक्स कलेक्शन इससे ज्यादा हो सकता था.

निवेशकों के लिए क्या मतलब?

बजट 2026 में STT बढ़ोतरी का सीधा असर F&O ट्रेडिंग की लागत बढ़ने पर ट्रेडिंग वॉल्यूम में कमी और बाजार की लिक्विडिटी पर देखने को मिल सकता है. अब निवेशकों और ट्रेडर्स की नजर इस बात पर टिकी है कि आने वाले समय में सरकार कैपिटल मार्केट टैक्स स्ट्रक्चर में कोई संतुलन या राहत देती है या नहीं, क्योंकि यही फैसला बाजार की दिशा तय करेगा.

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