अमेरिकी फेड पर टिकी बाजार की सांस, निवेशकों की नजर इस हफ्ते बड़ी घोषणाओं पर, शेयर बाजार पर भी पड़ेगा असर
इस हफ्ते घरेलू बाजार एक बड़े वैश्विक संकेत का इंतजार कर रहा है, जो निवेशकों की धारणा और बाजार की दिशा दोनों तय कर सकता है. रुपये की कमजोरी, विदेशी फंडों की हरकत और एक अहम अंतरराष्ट्रीय मीटिंग, ये सब मिलकर माहौल को बेहद दिलचस्प बना रहे हैं. आगे क्या होगा, नजरें वहीं टिकी हैं.
घरेलू शेयर बाजार इस हफ्ते फिर से वैश्विक संकेतों के साए में आगे बढ़ेगा. बीते सप्ताह सेंसेक्स और निफ्टी लगभग सपाट बंद हुए, जिससे निवेशकों के मन में यह सवाल और गहरा गया है कि आगे रुख कैसा रहेगा. ऐसे माहौल में दुनिया की सबसे बड़ी अर्थव्यवस्था अमेरिका का ब्याज दर फैसला भारतीय निवेशकों की उम्मीदों और चिंताओं, दोनों का सबसे बड़ा आधार बन गया है.
अमेरिकी फेड का फैसला करेगा दिशा तय
विश्लेषकों का मानना है कि अमेरिकी फेडरल रिजर्व की इस हफ्ते होने वाली बैठक भारतीय शेयर बाजार के लिए टोन सेट करेगी. अगर फेड ब्याज दरों को लेकर सख्त रुख अपनाता है, तो उभरते बाजारों में जोखिम लेने की भूख घट सकती है. वहीं, नरम संकेत मिलने पर विदेशी निवेशक emerging markets की ओर दोबारा रुख कर सकते हैं. रिलिगेयर ब्रोकिंग के शोध प्रमुख अजीत मिश्रा के अनुसार, यह फैसला पहले से मुद्रा दबाव झेल रहे बाजारों की धारणा को बदल सकता है.
रुपये की कमजोरी भी चिंता का विषय
पिछले हफ्ते रुपये ने पहली बार 90 के स्तर को छुआ, जिसे निवेशक करीब से ट्रैक कर रहे हैं. डॉलर की मजबूती और बॉन्ड यील्ड में उतार-चढ़ाव भारतीय बाजारों पर असर डाल सकते हैं, क्योंकि विदेशी पूंजी प्रवाह अक्सर मुद्रा के रुख से प्रभावित होता है.
स्वस्तिका इन्वेस्टमार्ट के वरिष्ठ विश्लेषक प्रवेश गौड़ का कहना है कि 9 और 10 दिसंबर को जारी होने वाले रोजगार और वेतन से जुड़े अमेरिका के आंकड़े भी बाजार की धारणा तय करेंगे. डॉलर इंडेक्स और ट्रेजरी बॉन्ड यील्ड में उछाल भारतीय इक्विटी और डेब्ट बाजारों में जोखिम लेने की क्षमता पर सीधा असर डाल सकता है.
भारतीय अर्थव्यवस्था की मजबूती एक सहारा
एंरिच मनी के सीईओ पोनमुड़ी आर का मानना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था मजबूत बनी हुई है. यदि विदेशी फंड फिर से उभरते बाजारों की ओर रुख करते हैं, तो भारत को इसका बड़ा फायदा मिल सकता है. हालांकि, उनके मुताबिक असली संकेत वही होंगे जो फेड इस बैठक के बाद भविष्य की ब्याज दरों पर देगा.
कुल मिलाकर, घरेलू बाजार इस हफ्ते अमेरिकी संकेतों की दिशा देखेगा. अगर संदेश राहत भरा आता है, तो भारतीय निवेशकों की आशा फिर मजबूत हो सकती है, वरना सतर्कता का माहौल और बढ़ेगा.
डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.
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