India-USA ट्रेड डील से पहले ही 40% उत्पादों पर जीरो ड्यूटी, इलेक्ट्रॉनिक्स से लेकर फार्मा प्रोडक्ट ड्यूटी फ्री
भारत और अमेरिका के बीच व्यापार संबंधों में मजबूती के संकेत पहले से ही दिख रहे हैं. अमेरिका को भारत के 40 फीसदी से अधिक निर्यात पर पहले ही शून्य शुल्क लागू है. इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और पेट्रोलियम उत्पादों में तेज बढ़ोतरी ने कुछ क्षेत्रों में गिरावट के बावजूद कुल निर्यात को मजबूती दी है.
India-USA Trade Deal: India-USA ट्रेड डील के बाद भारतीय सामानों पर टैरिफ 50 फीसदी से घटकर 18 फीसदी हो जाएगा, लेकिन भारत से अमेरिका को होने वाले निर्यात का एक बड़ा हिस्सा पहले से ही बिना किसी आयात शुल्क के जा रहा है. अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान अमेरिका को भारत के कुल निर्यात का 40 फीसदी से अधिक हिस्सा जीरो ड्यूटी पर हुआ. यह स्थिति भारत और अमेरिका के बीच हाल ही में घोषित नए व्यापार समझौते से पहले की है.
इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में तेज उछाल
बिजनेस स्टैंडर्ड की एक रिपोर्ट के अनुसार, जीरो ड्यूटी पर अमेरिका भेजे जाने वाले उत्पादों में इलेक्ट्रॉनिक्स सबसे बड़ा क्षेत्र बनकर उभरा है. इस दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात $16.7 बिलियन तक पहुंच गया. स्मार्टफोन, खासकर Apple iPhone, ने इसमें अहम भूमिका निभाई. अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात में 120 फीसदी की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि iPhone निर्यात में 200 फीसदी की छलांग लगते हुए यह $12.54 बिलियन पर पहुंच गया. भारत अब अमेरिकी स्मार्टफोन बाजार में एक महत्वपूर्ण सप्लायर के रूप में उभर रहा है.
फार्मा-पेट्रोलियम उत्पादों का भी बड़ा योगदान
इलेक्ट्रॉनिक्स के अलावा फार्मास्यूटिकल्स और पेट्रोलियम उत्पाद भी अमेरिका को भारत के प्रमुख जीरो ड्यूटी निर्यातों में शामिल रहे. फार्मास्यूटिकल्स का निर्यात $6.18 बिलियन और पेट्रोलियम उत्पादों का निर्यात $2.7 बिलियन रहा. फार्मा सेक्टर में बल्क ड्रग्स के निर्यात में 13 फीसदी से अधिक की बढ़ोतरी दर्ज की गई, जबकि दवा फॉर्मुलेशन का निर्यात लगभग स्थिर रहा. कैलेंडर वर्ष के आधार पर देखें तो इलेक्ट्रॉनिक्स, फार्मा और पेट्रोलियम उत्पाद मिलकर अमेरिका को जीरो ड्यूटी पर हुए कुल निर्यात का 41.8 फीसदी हिस्सा रखते हैं.
50% टैरिफ से कुछ सेक्टर प्रभावित
अमेरिका द्वारा लगाए गए 50 फीसदी दंडात्मक शुल्क का असर जेम्स एवं ज्वेलरी, टेक्सटाइल और ऑटोमोबाइल कंपोनेंट्स जैसे क्षेत्रों में देखने को मिला, जहां निर्यात में गिरावट दर्ज की गई. हालांकि अब टैरिफ 18 फीसदी होने पर इन सेक्टर्स को भी राहत मिलेगी. हालांकि, इलेक्ट्रॉनिक्स और फार्मा सेक्टर की मजबूत बढ़ोतरी ने इस नुकसान की भरपाई कर दी. नतीजतन, अप्रैल–नवंबर 2025 के दौरान अमेरिका को भारत का कुल निर्यात 11.28 फीसदी बढ़ा.
ट्रेड डील से निर्यात को और रफ्तार मिलने की उम्मीद
भारत और अमेरिका के बीच हुए नए व्यापार समझौते के तहत टैरिफ को 50 फीसदी से घटाकर 18 फीसदी किए जाने की योजना है. इससे प्रभावित क्षेत्रों में दोबारा तेजी आएगी और अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पादों की हिस्सेदारी और बढ़ेगी.
Trade Deal के बावजूद सभी क्षेत्रों को समान राहत नहीं मिली है. अमेरिका के सेक्शन 232 के तहत राष्ट्रीय सुरक्षा के आधार पर जिन उत्पादों पर शुल्क लगाया गया है, वे अब भी ऊंचे टैरिफ के दायरे में रहेंगे. स्टील, एल्युमिनियम और कॉपर जैसे मेटल्स के भारतीय निर्यात पर अमेरिका में 50 फीसदी तक का टैरिफ लागू रह सकता है. बजाज ब्रोकिंग के मुताबिक, इन सेक्टर्स में फ्री ट्रेड एग्रीमेंट होने के बावजूद टैरिफ में छूट मिलने की संभावना आम तौर पर कम होती है. वहीं, ऑटो सेक्टर से जुड़े कुछ चुनिंदा ऑटो कंपोनेंट्स पर भी 25 फीसदी का टैरिफ जारी रह सकता है, जो अमेरिकी बाजार पर अधिक निर्भर कंपनियों के लिए एक बड़ी चुनौती बना रहेगा.
Latest Stories
भारत को कहीं से भी तेल खरीदने की आजादी, ट्रंप के दावे पर रूस का बयान; सप्लाई जारी रखने के तैयार मास्को
Gold Silver Rate Today 05-02-2026: औंधे मुंह लुढ़का सोना-चांदी, MCX पर गोल्ड ₹1.50 लाख के आया नीचे, सिल्वर 24000 से ज्यादा सस्ती
एंट्री-लेवल IT सैलरी से बेहतर है Urban Company के सर्विस पार्टनर्स की कमाई, को-फाउंडर का बड़ा दावा, शेयर की रिपोर्ट
रिलायंस कम्युनिकेशंस ‘बैंक फ्रॉड’ मामले में SC का बड़ा फैसला, ED को दिया SIT गठित करने का आदेश; भारत नहीं छोड़ेंगे अनिल अंबानी
