महंगा तेल पड़ा भारी! मार्च में थोक महंगाई में बड़ा उछाल, 3 साल के शिखर पर पहुंचा WPI; फरवरी के मुकाबले 3.88% रहा
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई बढ़ी है, जो थोक महंगाई का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में यह 3.39 फीसदी हो गई. टेक्सटाइल, केमिकल, लेदर और मेटल जैसे सेक्टर में लागत बढ़ने लगी है, जिससे कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं.
WPI: देश में महंगाई को लेकर एक बार फिर चिंता बढ़ने लगी है. मार्च महीने में थोक महंगाई (WPI) बढ़कर 3.88 फीसदी पर पहुंच गई, जो पिछले लगभग 3 साल (38 महीनों) का सबसे ऊंचा स्तर है. फरवरी में यह 2.13 फीसदी थी. सरकार के आंकड़ों के मुताबिक, इस बढ़ोतरी की सबसे बड़ी वजह क्रूड ऑयल की कीमतों में तेज उछाल है, जिसका असर अब धीरे-धीरे पूरी अर्थव्यवस्था पर दिखने लगा है.
तेल की कीमतों ने बढ़ाई टेंशन
मार्च में कच्चे पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस के दामों में भारी तेजी आई. इस सेक्टर में महंगाई -2.56 फीसदी से उछलकर 35.98 फीसदी हो गई. खास तौर पर कच्चे तेल की महंगाई 51.57 फीसदी तक पहुंच गई, जो पहले गिरावट में थी. इससे साफ है कि ग्लोबल मार्केट में तेल महंगा होने का असर अब भारत में भी दिखने लगा है.
पेट्रोल-डीजल भी हुए महंगे
तेल महंगा होने का सीधा असर पेट्रोल और डीजल की कीमतों पर पड़ा है. पेट्रोल की कीमतों में करीब 2.5 फीसदी की बढ़ोतरी हुई, जबकि डीजल की महंगाई 3.26 फीसदी तक पहुंच गई. ईंधन और बिजली से जुड़े सेक्टर में भी महंगाई -3.78 फीसदी से बढ़कर 1.05 फीसदी हो गई, यानी अब इस सेक्टर में भी राहत खत्म हो रही है.
खाने-पीने की चीजें भी हुईं महंगी
थोक बाजार में खाने-पीने की चीजों की कीमतें भी बढ़ी हैं. कुल फूड इंफ्लेशन 3.47 फीसदी से बढ़कर 3.87 फीसदी हो गया. अंडा, मांस और मछली की कीमतों में ज्यादा तेजी देखी गई, जहां महंगाई 6.63 फीसदी रही. दूध 2.62 फीसदी और फल 2.11 फीसदी महंगे हुए. हालांकि, कुछ चीजों ने राहत भी दी. गेहूं 4.6 फीसदी सस्ता हुआ, दालों में 5.17 फीसदी की गिरावट आई और प्याज-आलू की कीमतें भी पहले के मुकाबले कम रहीं.
फैक्ट्री में बनने वाले सामान भी महंगे
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी महंगाई बढ़ी है, जो थोक महंगाई का सबसे बड़ा हिस्सा होता है. फरवरी के 2.92 फीसदी से बढ़कर मार्च में यह 3.39 फीसदी हो गई. टेक्सटाइल, केमिकल, लेदर और मेटल जैसे सेक्टर में लागत बढ़ने लगी है, जिससे कंपनियां अपने प्रोडक्ट्स के दाम बढ़ा सकती हैं.
आम आदमी पर क्या असर पड़ेगा?
हालांकि अभी खुदरा महंगाई (CPI) 4 फीसदी के लक्ष्य से नीचे 3.4 फीसदी पर है, लेकिन थोक महंगाई में तेजी इस बात का संकेत है कि आने वाले समय में रोजमर्रा की चीजें महंगी हो सकती हैं. यानी अभी जो दबाव थोक स्तर पर दिख रहा है, वह धीरे-धीरे आम लोगों तक पहुंच सकता है.
Latest Stories
साइबर स्टॉक हैं निवेश का नया ‘पावर हाउस’! इन 4 डिजिटल सिक्योरिटी शेयरों पर टिकी है दिग्गजों की नजर
Gold and Silver Rate Today: सोने में दिखा उतार-चढ़ाव तो चांदी की चमक बरकरार, 2200 रुपये हुई महंगी
महंगी हो जाएगी जरूरी दवाइयां, कीमत में 10-15% की बढ़ोतरी की तैयारी, ईरान युद्ध से कच्चे माल के दाम में इजाफा
