मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की बड़ी कार्रवाई, इस केस में राजेंद्र लोढ़ा गिरफ्तार
मनी लॉन्ड्रिंग मामले में ED की कार्रवाई ने रियल एस्टेट सेक्टर में हलचल मचा दी है. लोढ़ा डेवलपर्स से जुड़े केस में राजेंद्र लोढ़ा की गिरफ्तारी के बाद उन्हें मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां 8 दिन की हिरासत को मंजूरी दी गई. जांच मुंबई पुलिस की एफआईआर पर आधारित है, जिसमें फंड डायवर्जन, फर्जी एमओयू और संपत्तियों की अनधिकृत बिक्री के आरोप शामिल हैं.
Rajendra Lodha arrest: भारत में मनी लॉन्ड्रिंग के मामलों पर सख्ती बढ़ाते हुए प्रवर्तन निदेशालय ने राजेंद्र नरपत मल लोढ़ा को गिरफ्तार किया है. यह कार्रवाई लोढ़ा डेवलपर्स लिमिटेड से जुड़े एक बड़े वित्तीय अनियमितता मामले में की गई है. गिरफ्तारी के बाद राजेंद्र लोढ़ा को मुंबई की विशेष अदालत में पेश किया गया, जहां अदालत ने ED की मांग स्वीकार करते हुए उन्हें 8 दिनों की हिरासत में भेज दिया. इस दौरान एजेंसी उनसे पूछताछ कर रही है.
किस कानून के तहत हुई गिरफ्तारी
प्रवर्तन निदेशालय के वरिष्ठ अधिकारियों के अनुसार, मुंबई जोनल कार्यालय ने 12 फरवरी 2026 को राजेंद्र लोढ़ा को प्रिवेंशन ऑफ मनी लॉन्ड्रिंग एक्ट, 2002 के तहत गिरफ्तार किया. ED का कहना है कि यह मामला मनी लॉन्ड्रिंग से जुड़े गंभीर आरोपों पर आधारित है, जिसमें कंपनी के फंड और संपत्तियों के दुरुपयोग के संकेत मिले हैं.
13 फरवरी 2026 को राजेंद्र लोढ़ा को स्पेशल पीएमएलए कोर्ट मुंबई में पेश किया गया. इस दौरान ED ने लंबी पूछताछ की आवश्यकता बताते हुए रिमांड की मांग की. अदालत ने मामले की गंभीरता को देखते हुए 8 दिन की ED कस्टडी मंजूर कर ली.
मुंबई पुलिस की एफआईआर से जुड़ा है मामला
ED की यह कार्रवाई मुंबई पुलिस द्वारा दर्ज की गई एक एफआईआर पर आधारित है. एफआईआर में राजेंद्र लोढ़ा और अन्य के खिलाफ धोखाधड़ी, पद के दुरुपयोग, कंपनी की संपत्तियों की अनधिकृत बिक्री और फर्जी दस्तावेज तैयार करने जैसे आरोप लगाए गए हैं. जांच एजेंसियों का दावा है कि इन कथित गतिविधियों के कारण लोढ़ा डेवलपर्स को 100 करोड़ रुपये से अधिक का वित्तीय नुकसान हुआ.
फंड डायवर्जन और फर्जी एमओयू के आरोप
ED की जांच में सामने आया है कि इस मामले में फंड डायवर्जन और फर्जी मेमोरेंडम ऑफ अंडरस्टैंडिंग तैयार किए गए. एजेंसी के अनुसार, कंपनी की अचल संपत्तियों को बोर्ड की मंजूरी के बिना कम कीमत पर संबंधित व्यक्तियों और प्रॉक्सी संस्थाओं को बेचा गया.
इसके अलावा जमीन खरीद से जुड़े एमओयू में कीमतें बढ़ा-चढ़ाकर दिखाई गईं और बढ़ी हुई राशि का एक हिस्सा कथित तौर पर नकद में वापस लिया गया. इससे कंपनी के फंड का दुरुपयोग हुआ और बैलेंस शीट पर गलत प्रभाव पड़ा.
रिश्तेदारों और सहयोगियों की भूमिका भी जांच के दायरे में
ED का आरोप है कि राजेंद्र लोढ़ा ने अपने रिश्तेदारों, सहयोगियों और संबंधित संस्थाओं के साथ मिलकर धोखाधड़ी के जरिए संपत्तियां हासिल कीं. इन लेनदेन से न केवल कंपनी को नुकसान हुआ, बल्कि शेयरधारकों के हित भी प्रभावित हुए. एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि इन सौदों से लाभ पाने वाले अंतिम लाभार्थी कौन थे और पैसा किन रास्तों से ट्रांसफर किया गया.
पहले भी हो चुकी हैं बड़े स्तर पर छापेमारी
इससे पहले 12 नवंबर 2025 को ED ने मुंबई क्षेत्र में 14 ठिकानों पर छापेमारी की थी. इन तलाशी अभियानों के दौरान करीब 88 करोड़ रुपये की चल संपत्तियां जब्त या फ्रीज की गई थीं, जिनमें नकदी, बैंक बैलेंस और फिक्स्ड डिपॉजिट शामिल हैं. साथ ही करोड़ों रुपये की अचल संपत्तियों से जुड़े दस्तावेज और डिजिटल रिकॉर्ड भी बरामद किए गए थे.
यह भी पढ़ें: India-US Trade Deal से सस्ता होगा कच्चा तेल, पीयूष गोयल ने कहा- IT सेक्टर को मिल सकता है बड़ा बूस्ट
