सेमीकंडक्टर स्टॉक्स बन रहे निवेशकों की पसंद, 5 साल में दिए 850% से ज्यादा का रिटर्न; 2026 में रखें रडार पर
सेमीकंडक्टर सेक्टर में निवेश की चर्चा इसलिए भी बढ़ रही है, क्योंकि यह सेक्टर लंबी अवधि की ग्रोथ स्टोरी के तौर पर देखा जा रहा है. भारत में इकोसिस्टम धीरे-धीरे मजबूत हो रहा है और कई कंपनियां वैल्यू चेन में अपनी जगह बना रही हैं. ऐसे में आइए समझते हैं कि 2026 में किन सेमीकंडक्टर-लिंक्ड स्टॉक्स पर नजर रखी जा सकती है.
आज के समय में सेमीकंडक्टर सिर्फ टेक्नोलॉजी सेक्टर की कहानी नहीं रह गई है. मोबाइल फोन, इलेक्ट्रिक व्हीकल, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI), डेटा सेंटर और डिफेंस सिस्टम लगभग हर एडवांस टेक्नोलॉजी चिप्स पर टिकी है. यही वजह है कि पिछले कुछ सालों में सेमीकंडक्टर इंडस्ट्री को लेकर पूरी दुनिया में गंभीर चर्चा देखने को मिली है. सप्लाई चेन संकट और जियोपॉलिटिकल टेंशन ने यह साफ कर दिया कि चिप्स का कारोबार अब केवल बिजनेस नहीं, बल्कि स्ट्रेटजिक अहमियत भी रखता है. भारत अभी पूरी तरह सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग हब नहीं है, लेकिन India Semiconductor Mission (ISM) और PLI योजनाओं के चलते तस्वीर तेजी से बदल रही है.
भारतीय लिस्टेड कंपनियां फिलहाल डिजाइन, इंजीनियरिंग, पैकेजिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स मैन्युफैक्चरिंग से जुड़ी हैं. ऐसे में निवेशकों की दिलचस्पी इस थीम में लगातार बढ़ती जा रही है. तो ऐसे में आइए समझते हैं कि 2026 में किन सेमीकंडक्टर-लिंक्ड स्टॉक्स पर नजर रखी जा सकती है.
Bharat Electronics (BEL)
Bharat Electronics देश की प्रमुख डिफेंस इलेक्ट्रॉनिक्स कंपनी है. कंपनी रडार, कम्युनिकेशन सिस्टम, एवियोनिक्स और कई एडवांस इलेक्ट्रॉनिक सिस्टम बनाती है. कंपनी का सबसे बड़ा फोकस डिफेंस पर है, जहां से इसकी कमाई का बड़ा हिस्सा आता है.
2025 में BEL ने Tata Electronics के साथ सेमीकंडक्टर वैल्यू चेन में सहयोग के लिए समझौता किया. इस साझेदारी का मकसद माइक्रोकंट्रोलर, सिस्टम-ऑन-चिप (SoCs), MMICs और एडवांस प्रोसेसर जैसे स्वदेशी प्रोडक्ट विकसित करना है. आसान शब्दों में समझें तो BEL अब केवल डिफेंस इक्विपमेंट कंपनी नहीं रहना चाहती, बल्कि चिप इकोसिस्टम में भी अपनी पकड़ मजबूत कर रही है.
BEL का प्रॉफिट ट्रेंड
अगर कंपनी के मुनाफे के आंकड़ों पर नजर डालें तो एक साफ ट्रेंड दिखाई देता है. FY23 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 2,986 करोड़ रुपये रहा. इसके बाद FY24 में यह बढ़कर 3,985 करोड़ रुपये हो गया. FY25 में मुनाफे में और तेज सुधार देखा गया और यह 5,323 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. वहीं 9MFY26 में नेट प्रॉफिट का आंकड़ा 38,093 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.
कंपनी का नेट प्रॉफिट साल दर साल मजबूत होता दिखा है. इसका मतलब यह है कि कंपनी केवल कारोबार बढ़ाने तक सीमित नहीं है, बल्कि कमाई की क्षमता भी बेहतर कर रही है. ऑपरेशन प्रॉफिट के आंकड़े 4,090 करोड़ रुपये से बढ़कर 5,051,करोड़ फिर 6,837 करोड़ और उसके बाद 7,884 करोड़ तक पहुंचते दिखाई देते हैं. ऑपरेशन प्रॉफिट में यह लगातार बढ़त बताती है कि कंपनी का मुख्य कारोबार स्थिर और मजबूत बना हुआ है.
क्या है शेयर का हाल?
शुक्रवार, 13 फरवरी को कंपनी का शेयर 1.88 फीसदी की गिरावट के साथ 435.55 पर कारोबार कर रहा था. पिछले 3 महीनों में कंपनी ने करीब 4 फीसदी का रिटर्न दिया है. वहीं, सिर्फ एक साल में कंपनी के शेयर ने 66 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. अगर पांच साल की बात करें तो इस दौरान शेयर ने लगभग 851 फीसदी तक का रिटर्न दिया है.
कैसा है कंपनी का फंडामेंट?
बीते कारोबारी दिन कंपनी का मार्केट कैप 3,18,268 करोड़ रुपये रहा. कंपनी का आरओई 26.41 फीसदी है. पीई रेशियो 53.36 है, जबकि पीबी रेशियो 14.76 है.
ऑर्डर बुक पर कैसी है कंपनी की पकड़?
FY25 में कंपनी के कुल कारोबार का 90 फीसदी हिस्सा डिफेंस से आया, जबकि Non-Defence का हिस्सा 6 फीसदी और Exports का हिस्सा 4% रहा. FY25 तक कंपनी की कुल ऑर्डर बुक Rs. 71,650 करोड़ रही. FY25 में ही लगभग Rs. 18,715 करोड़ के नए ऑर्डर मिले. बड़ा ऑर्डर बुक किसी भी डिफेंस कंपनी के लिए भविष्य की कमाई का मजबूत संकेत माना जाता है.
HCL Technologies
HCL Technologies को ज्यादातर लोग आईटी सर्विसेज कंपनी के तौर पर जानते हैं. लेकिन कंपनी का एक जरूरी कारोबार सेमीकंडक्टर इंजीनियरिंग और डिजाइन से भी जुड़ा है. कंपनी चिप डिजाइन, सिलिकॉन वैलिडेशन और सिस्टम-ऑन-चिप डेवलपमेंट जैसे काम करती है. Intel, Samsung और TSMC जैसे बड़े ग्लोबल खिलाड़ियों के साथ इसकी साझेदारियां हैं. 2025 में कंपनी Samsung के Advanced Foundry Ecosystem की Design Solution Partner बनी.
FY23 में कंपनी का नेट प्रॉफिट 1,48,450 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. इसके बाद FY24 में मुनाफा बढ़कर 1,57,100 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. यानी कंपनी ने सालाना आधार पर लाभ में सुधार दिखाया. FY25 में यह आंकड़ा और मजबूत हुआ और 1,73,990 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. हालांकि 9MFY26 में नेट प्रॉफिट 1,21,620 करोड़ रुपये दर्ज किया गया. यहां ध्यान देने वाली बात यह है कि यह पूरे साल का नहीं, बल्कि नौ महीनों का आंकड़ा है.
क्या है कंपनी के शेयर का हाल?
बीते कारोबारी दिन कंपनी के शेयर में 1.42 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 1,455.20 पर कारोबार करता बंद हुआ. पिछले 6 महीनों में कंपनी के शेयर में करीब 3 फीसदी की गिरावट रही है. वहीं, एक साल में शेयर में लगभग 14 फीसदी की गिरावट देखने को मिली. हालांकि, अगर पांच साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी के शेयर ने 50 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है.
कैसा है कंपनी का फंडामेंटल?
13 फरवरी 2026 तक कंपनी का मार्केट कैप 3,94,825 करोड़ रुपये है. कंपनी का आरओई 23.83 फीसदी है. पीई रेशियो 23.97 है, जबकि पीबी रेशियो 5.54 है.
Dixon Technologies
Dixon Technologies भारत की प्रमुख EMS कंपनियों में से एक है. कंपनी मोबाइल फोन, LED TV, रेफ्रिजरेटर जैसे प्रोडक्ट बनाती है. अब कंपनी डिस्प्ले मॉड्यूल, कैमरा मॉड्यूल और अन्य कॉम्पोनेंट मैन्युफैक्चरिंग पर जोर दे रही है. HKC के साथ Display Manufacturing Unit पर काम चल रहा है. Display Fab के लिए लगभग 3 बिलियन डॉलर के Capex की योजना है.
कंपनी का सबसे बड़ा कारोबार Mobile एंड EMS से आता है. तेज रेवेन्यू ग्रोथ कंपनी की सबसे बड़ी मजबूती मानी जाती है. हालांकि मार्जिन अभी भी अपेक्षाकृत कम हैं, लेकिन स्केल और विस्तार रणनीति कंपनी को ग्रोथ स्टोरी के रूप में पेश करती है.
क्या है कंपनी के शेयर का हाल?
13 फरवरी को कंपनी के शेयर में 1.80 फीसदी की गिरावट दर्ज की गई और यह 11,417 रुपये पर कारोबार करता नजर आया. पिछले एक साल में कंपनी के शेयर में करीब 22 फीसदी की गिरावट रही है. वहीं, अगर पांच साल के प्रदर्शन पर नजर डालें तो कंपनी ने 210 फीसदी से ज्यादा का रिटर्न दिया है. फिलहाल कंपनी का मार्केट कैप 69,271 करोड़ रुपये है. कंपनी का आरओई 31.12 फीसदी है. पीई रेशियो 38.25 है, जबकि पीबी रेशियो 17.04 है.
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