मार्च में 12 फीसदी बढ़ा एडिबल ऑयल का इंपोर्ट, 11.73 लाख टन पहुंचा सप्लाई, जानें क्या होगा असर
मार्च में भारत का खाने के तेल का आयात 12 प्रतिशत बढ़कर 11.73 लाख टन हो गया है. इंडस्ट्री बॉडी Solvent Extractors Association of India के अनुसार यह बढ़ोतरी क्रूड पाम ऑयल की ज्यादा शिपमेंट के कारण हुई है. हालांकि आगे आयात घट सकता है क्योंकि वैश्विक कीमतें मजबूत हैं और फ्रेट लागत बढ़ रही है.
Edible Oil Imports India: मार्च महीने के दौरान खाने के तेल का इंपोर्ट बढ़कर 11.73 लाख टन हो गया है. यह पिछले साल के मुकाबले करीब 12 फीसदी ज्यादा है. यह बढ़ोतरी मुख्य रूप से पाम ऑयल की ज्यादा खरीद के कारण हुई है. हालांकि आने वाले महीनों में इंपोर्ट कम हो सकता है. वैश्विक कीमतों में तेजी और बढ़ते फ्रेट खर्च इसकी बड़ी वजह हैं. वेस्ट एशिया में जारी तनाव भी बाजार को प्रभावित कर रहा है और इसका असर घरेलू कीमतों पर दिख सकता है.
मार्च में कितनी बढ़ोतरी हुई
Solvent Extractors Association of India के रिपोर्ट के मुताबिक, मार्च महीने में खाने के तेल का कुल इंपोर्ट 11.73 लाख टन दर्ज किया गया, जो पिछले साल के मुकाबले 12 फीसदी ज्यादा है. इससे पहले के महीनों में इंपोर्ट अपेक्षाकृत कम था, लेकिन मार्च में अचानक बढ़ोतरी देखने को मिली. यह संकेत देता है कि बाजार में मांग मजबूत बनी हुई है. कंपनियों ने भविष्य की जरूरत को देखते हुए स्टॉक बढ़ाने पर जोर दिया है, जिससे इंपोर्ट में यह उछाल आया है.
पाम ऑयल की बढ़ी मांग बना कारण
इस बढ़ोतरी का सबसे बड़ा कारण क्रूड पाम ऑयल का ज्यादा इंपोर्ट रहा है. पाम ऑयल सस्ता और ज्यादा इस्तेमाल होने वाला तेल है, इसलिए कंपनियां इसकी खरीद बढ़ाती हैं. मार्च में इसकी शिपमेंट में तेजी देखने को मिली, जिससे कुल इंपोर्ट बढ़ गया. घरेलू बाजार में इसकी मांग लगातार बनी हुई है और यह कुकिंग ऑयल का एक मेन सोर्स बना हुआ है.
आगे क्यों घट सकता है इंपोर्ट
रिपोर्ट के मुताबिक आने वाले महीनों में इंपोर्ट कम हो सकता है. वैश्विक बाजार में कीमतें मजबूत बनी हुई हैं और फ्रेट यानी ट्रांसपोर्ट लागत भी बढ़ गई है. इन कारणों से इंपोर्ट महंगा पड़ रहा है. कंपनियां लागत को देखते हुए खरीद कम कर सकती हैं. इससे सप्लाई पर असर पड़ सकता है और बाजार में नई स्थिति बन सकती है.
वेस्ट एशिया तनाव का असर
वेस्ट एशिया में जारी तनाव ने वैश्विक सप्लाई चेन को प्रभावित किया है. इससे शिपिंग लागत और जोखिम दोनों बढ़ गए हैं. तेल की कीमतों में उतार चढ़ाव देखने को मिल रहा है, जिसका असर इंपोर्ट पर पड़ रहा है. अगर यह तनाव जारी रहता है तो आने वाले समय में बाजार में और अनिश्चितता बढ़ सकती है और कीमतों पर दबाव बना रह सकता है.
ये भी पढ़ें-CPI Inflation: मार्च में 3.4 फीसदी रही खुदरा महंगाई, पश्चिम एशिया तनाव का दिख रहा असर
घरेलू बाजार पर क्या असर
अगर आने वाले महीनों में इंपोर्ट कम होता है तो घरेलू बाजार में खाने के तेल की कीमतें बढ़ सकती हैं. सप्लाई घटने से मांग के मुकाबले कमी आ सकती है, जिससे दाम बढ़ेंगे. इसका सीधा असर आम लोगों के किचन बजट पर पड़ेगा. सरकार और कंपनियां इस स्थिति पर नजर बनाए हुए हैं और आगे की रणनीति तय कर रही हैं.
Latest Stories
हफ्ते के पहले दिन सस्ती हुई चांदी, सोने का भाव भी ₹300 टूटा; गिरावट के बाद जानें कहां पहुंची कीमतें
मैं नोएडा हूं! जापान से ज्यादा कमाई, UP का सबसे अमीर शहर; फिर क्यों मेरी सड़कों पर मजदूर?
CPI Inflation: मार्च में 3.4 फीसदी रही खुदरा महंगाई, पश्चिम एशिया तनाव का दिख रहा असर
