वैश्विक अनिश्चितताओं के बीच भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा! फिच रेटिंग ने GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर किया 7.5%
वैश्विक अनिश्चितताओं और तेल की कीमतों को लेकर चिंताओं के बीच फिच रेटिंग्स ने भारत की अर्थव्यवस्था पर भरोसा जताया है. एजेंसी ने चालू वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान बढ़ाकर 7.5% कर दिया है और कहा है कि घरेलू मांग इस साल आर्थिक वृद्धि की सबसे बड़ी ताकत बनी रहेगी.
दुनिया भर में आर्थिक अनिश्चितता, भू-राजनीतिक तनाव और महंगाई के दबाव के बावजूद भारत की अर्थव्यवस्था को लेकर अंतरराष्ट्रीय रेटिंग एजेंसी फिच रेटिंग्स (Fitch Ratings) का भरोसा बरकरार है. फिच ने मौजूदा वित्त वर्ष के लिए भारत की GDP ग्रोथ का अनुमान थोड़ा बढ़ाते हुए 7.5 फीसदी कर दिया है. एजेंसी का कहना है कि घरेलू मांग यानी देश के भीतर बढ़ती खपत और निवेश इस साल आर्थिक वृद्धि की सबसे बड़ी ताकत बने हुए हैं.
मौजूदा वित्त वर्ष के लिए अनुमान बढ़ा
फिच रेटिंग्स ने अपने ताजा ग्लोबल इकोनॉमिक आउटलुक (मार्च 2026) में कहा कि वित्त वर्ष 2025-26 के लिए भारत की GDP ग्रोथ 7.5 फीसदी रहने का अनुमान है. इससे पहले दिसंबर में एजेंसी ने 7.4 फीसदी की ग्रोथ का अनुमान लगाया था.
फिच के मुताबिक, इस साल भारत की आर्थिक वृद्धि में घरेलू मांग का अहम योगदान रहेगा. एजेंसी का अनुमान है कि मौजूदा वित्त वर्ष में उपभोक्ता खर्च करीब 8.6 फीसदी और निवेश लगभग 6.9 फीसदी की दर से बढ़ सकता है.
अगले वित्त वर्ष के लिए भी सुधरा अनुमान
फिच ने अगले वित्त वर्ष 2026-27 के लिए भी भारत की ग्रोथ का अनुमान बढ़ाया है. अब एजेंसी को उम्मीद है कि उस साल भारत की अर्थव्यवस्था 6.7 फीसदी की दर से बढ़ेगी. इससे पहले दिसंबर 2025 में यह अनुमान 6.4 फीसदी था. हालांकि फिच ने यह भी कहा कि 2026-27 की पहली छमाही में आर्थिक वृद्धि कुछ धीमी पड़ सकती है. इसकी वजह बढ़ती महंगाई हो सकती है, जो लोगों की वास्तविक आय पर दबाव डाल सकती है और उपभोक्ता खर्च को सीमित कर सकती है.
वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर चिंता
फिच ने वैश्विक अर्थव्यवस्था को लेकर भी सावधानी जताई है. एजेंसी के मुताबिक 2026 में दुनिया की GDP ग्रोथ करीब 2.6 फीसदी रहने का अनुमान है. यह अनुमान इस धारणा पर आधारित है कि ईरान से जुड़े युद्ध या तनाव के कारण तेल की कीमतों में बड़ा और लंबे समय तक रहने वाला उछाल नहीं आएगा.
फिच के मुख्य अर्थशास्त्री ब्रायन कूल्टन के अनुसार, अगर तेल की कीमतें 100 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंचकर लंबे समय तक वहीं बनी रहती हैं, तो यह वैश्विक अर्थव्यवस्था के लिए बड़ा झटका साबित हो सकता है.
भारत की अर्थव्यवस्था बनी हुई है मजबूत
फिच का कहना है कि जनवरी और फरवरी में आर्थिक गतिविधियों में थोड़ी सुस्ती के संकेत जरूर दिखे हैं, लेकिन इसके बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था अभी भी मजबूत बनी हुई है. बैंक क्रेडिट ग्रोथ अभी भी दो अंकों में बनी हुई है, जो आर्थिक गतिविधियों में मजबूती का संकेत है.
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