2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली प्रोडक्शन का लक्ष्य; बजट में ₹20000 करोड़ की PLI योजना लाने की तैयारी
केंद्र सरकार घरेलू लेवल पर परमाणु उपकरण बनाने को बढ़ावा देना चाहती है. इसी दिशा में आगामी केंद्रीय बजट 2026 में एक नई और खास योजना लाने पर विचार चल रहा है. इस योजना के तहत देश की कंपनियों को रिएक्टर और उससे जुड़े अहम पुर्जे बनाने के लिए आर्थिक मदद दी जा सकती है.
PIL for Nuclear on Cards: आने वाले सालों में बिजली की बढ़ती जरूरत, कार्बन उत्सर्जन घटाने का टारगेट और energy security को ध्यान में रखते हुए केंद्र सरकार घरेलू लेवल पर परमाणु उपकरण बनाने को बढ़ावा देना चाहती है. इसी दिशा में आगामी केंद्रीय बजट 2026 में एक नई और खास योजना लाने पर विचार चल रहा है. इस योजना के तहत देश की कंपनियों को रिएक्टर और उससे जुड़े अहम पुर्जे बनाने के लिए आर्थिक मदद दी जा सकती है. इससे भारत को आयात पर निर्भरता कम होगी और भविष्य में बड़े स्तर पर परमाणु प्लांट लगाने में आसानी होगी.
20 हजार करोड़ रुपये की PLI योजना पर विचार
सरकार परमाणु उपकरणों के निर्माण के लिए लगभग ₹18000 से ₹20000 करोड़ की प्रोडक्शन लिंक्ड इंसेंटिव यानी PLI योजना लाने पर विचार कर रही है. FE के मुताबिक अभी इस पर चर्चा चल रही है और अंतिम फैसला बजट के समय लिया जा सकता है. इस योजना के तहत भारी फोर्जिंग, रिएक्टर प्रेशर वेसल, खास किस्म की स्टील और दूसरे जरूरी परमाणु उपकरण बनाने वाली कंपनियों को प्रोत्साहन मिलेगा.
हाल ही में लागू हुए SHANTI कानून के बाद निजी कंपनियों के लिए परमाणु क्षेत्र में काम करना आसान हुआ है. इस कानून से नियमों में साफ-साफ व्यवस्था आई है और उपकरण सप्लायरों पर दुर्घटना से जुड़ी जिम्मेदारी की सीमा तय की गई है. सरकार मानती है कि PLI योजना और नया कानून मिलकर इस क्षेत्र में निवेश को बढ़ावा देंगे.
2047 तक 100 गीगावाट का लक्ष्य
भारत ने साल 2047 तक 100 गीगावाट परमाणु बिजली प्रोडक्शन का लक्ष्य रखा है. इतना बड़ा लक्ष्य तभी पूरा होगा जब देश में उपकरण बनाने की मजबूत क्षमता होगी. अभी कई अहम पुर्जों के लिए विदेशों पर निर्भर रहना पड़ता है, जिससे समय और लागत दोनों बढ़ जाते हैं. सरकार छोटे मॉड्यूलर रिएक्टर यानी SMR को भी आगे बढ़ाना चाहती है. इनके लिए एक मजबूत और भरोसेमंद सप्लाई चेन जरूरी होती है. नई PLI योजना से कंपनियां लंबे समय के लिए निवेश कर सकेंगी और प्रोडक्शन तेजी से बढ़ा पाएंगी.
अत्याधुनिक फैक्ट्रियां लगेंगी
इससे देश में अत्याधुनिक फैक्ट्रियां लगेंगी, नए निवेश आएंगे और भारत वैश्विक स्तर पर परमाणु उपकरण बनाने वाला मजबूत केंद्र बन सकता है. सरकार ने साफ किया है कि योजना के नियम, एलिजिबिलिटी और समय-सीमा पर अभी चर्चा चल रही है. अगर यह योजना लागू होती है तो यह भारत के परमाणु ऊर्जा क्षेत्र में एक बड़ा बदलाव साबित हो सकती है और लंबे समय में देश की ऊर्जा सुरक्षा को मजबूत करेगी.
ये भी पढ़ें- 1 महीने में अशीष कचोलिया के डूबे ₹232 करोड़, अब इन 2 शेयरों पर लगाया नया दांव, भारी डिस्काउंट पर स्टॉक्स