अब बारिश में चाइनीज छाता खोलना होगा महंगा, सस्ते विदेशी इंपोर्ट का मिनिमम प्राइस ₹100 रुपया हुआ तय

सरकार ने छातों के इंपोर्ट पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस तय कर दिया है. अब कोई भी तैयार छाता अगर 100 प्रति पीस से कम कीमत का है, तो उसका आयात यानी इंपोर्ट भारत में नहीं हो सकेगा. यह फैसला गुरुवार को जारी एक अधिसूचना के जरिए लिया गया. ऐसे में सरकार का यह कदम सस्ते चीनी उत्पादों पर निर्भरता कम करने और भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को मौके देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

छातों के इंपोर्ट पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस हुआ तय

बारिश के मौसम से पहले सरकार ने छाता बाजार से जुड़ा एक अहम फैसला लिया है. विदेश से सस्ते दामों पर आने वाले छातों पर अब लगाम कसी गई है. इस कदम का सीधा मकसद देश में बनने वाले छातों को बढ़ावा देना और घरेलू उद्योग को मजबूत करना है. सरकार ने छातों के इंपोर्ट पर मिनिमम इंपोर्ट प्राइस (Minimum Import Price) तय कर दिया है. अब कोई भी तैयार छाता अगर 100 प्रति पीस से कम कीमत का है, तो उसका आयात यानी इंपोर्ट भारत में नहीं हो सकेगा. यह फैसला गुरुवार को जारी एक अधिसूचना के जरिए लिया गया.

‘फ्री’ से ‘रिस्ट्रिक्टेड’ हुई इंपोर्ट पॉलिसी

डायरेक्टोरेट जनरल ऑफ फॉरेन ट्रेड के मुताबिक, तैयार छातों की इंपोर्ट पॉलिसी को अब फ्री से बदलकर रिस्ट्रिक्टेड कर दिया गया है. हालांकि, अगर छाते की CIF (cost, insurance, freight) वैल्यू 100 रुपये या उससे ज्यादा है, तो उसका आयात अब भी अनुमति के दायरे में रहेगा.

इन सेक्टर्स को मिली राहत

सरकार ने यह भी साफ किया है कि यह पाबंदी एडवांस ऑथराइजेशन, एक्सपोर्ट ओरिएंटेड यूनिट्स और स्पेशल इकोनॉमिक जोन में काम करने वाली इकाइयों पर लागू नहीं होगी यानी एक्सपोर्ट से जुड़े सेक्टर्स को इससे छूट दी गई है.

बजट में पहले ही बढ़ चुका है इंपोर्ट ड्यूटी

इससे पहले बजट 2026-27 में सरकार छातों पर इंपोर्ट ड्यूटी बढ़ा चुकी है. अब छातों पर 60 रुपये प्रति पीस या 20 फीसदी, जो भी ज्यादा हो, उतना शुल्क देना होगा. वहीं, छातों के पार्ट्स, ट्रिमिंग्स और एक्सेसरीज पर भी ड्यूटी बढ़ाकर 10 फीसदी कर दी गई है. रिपोर्ट के मुताबिक, भारत में छातों और सन अंब्रेला की सप्लाई का बड़ा हिस्सा चीन से आता है. ऐसे में सरकार का यह कदम सस्ते चीनी उत्पादों पर निर्भरता कम करने और भारतीय मैन्युफैक्चरर्स को मौके देने की दिशा में अहम माना जा रहा है.

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ऐसे में छातों पर न्यूनतम आयात मूल्य तय करने का फैसला घरेलू उद्योग के लिए राहत लेकर आया है. इससे देश में मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलेगा और लोकल कारोबार को विदेशी सस्ते माल से मुकाबला करने में मदद मिलेगी.