जांच के बीच HDFC Bank में बड़ा एक्शन, AT-1 बॉन्ड मिस-सेलिंग केस में 3 सीनियर अधिकारियों की छुट्टी: रिपोर्ट

Credit Suisse के AT-1 बॉन्ड्स की कथित मिस-सेलिंग मामले में HDFC Bank ने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को हटाया है. जांच के बीच शेयरों में गिरावट और रेगुलेटरी सख्ती से बैंक पर दबाव बढ़ गया है. जानें क्या है पूरा मामला और शेयरों का प्रदर्शन.

HDFC BANK Image Credit: TV9

HDFC Bank 3 Executive Exits: देश के सबसे बड़े प्राइवेट सेक्टर के बैंक HDFC Bank एक बार फिर विवादों में घिरता नजर आ रहा है. इस बार मामला Credit Suisse के हाई-रिस्क AT-1 बॉन्ड्स की कथित गलत बिक्री यानी मिस-सेलिंग से जुड़ा हुआ है. मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, बैंक ने इस मामले में कार्रवाई करते हुए अपने तीन वरिष्ठ अधिकारियों को पद से हटने के लिए कहा है.

किसके खिलाफ उठा कदम?

मनीकंट्रोल की एक रिपोर्ट के मुताबिक, जिन अधिकारियों के खिलाफ यह कदम उठाया गया है, उनमें ब्रांच बैंकिंग के ग्रुप हेड संपत कुमार, पश्चिम एशिया, अफ्रीका और NRI ऑनशोर बिजनेस के एग्जीक्यूटिव वाइस प्रेसिडेंट हर्ष गुप्ता और सीनियर वाइस प्रेसिडेंट पायल मंध्यान शामिल हैं. रिपोर्ट में सूत्रों के हवाले से बताया गया है कि यह कार्रवाई चल रही जांच के तहत की गई है, हालांकि यह स्पष्ट नहीं है कि इन अधिकारियों को कब हटाया गया.

क्या है पूरा मामला?

यह पूरा मामला Credit Suisse के Additional Tier-1 (AT-1) बॉन्ड्स की बिक्री से जुड़ा है, जिन्हें आमतौर पर हाई-रिस्क निवेश माना जाता है. आरोप है कि HDFC Bank की दुबई शाखा ने इन बॉन्ड्स को कुछ रिटेल ग्राहकों को “सेफ इन्वेस्टमेंट” के रूप में पेश किया, जबकि वास्तव में इनमें जोखिम काफी ज्यादा था. बाद में Credit Suisse के संकट में आने और UBS द्वारा उसके अधिग्रहण के बाद इन बॉन्ड्स को राइट-ऑफ कर दिया गया, जिससे निवेशकों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ा.

नागपुर में दर्ज हुई शिकायत!

एक दूसरी रिपोर्ट के मुताबिक, इस मामले को लेकर एक हाई नेटवर्थ इंडिविजुअल (HNI) ने नागपुर के इकोनॉमिक ऑफेंस विंग (EoW) में शिकायत दर्ज कराई थी, जिसमें HDFC Bank के कुछ अधिकारियों के नाम भी शामिल थे. इसके अलावा, Bloomberg की रिपोर्ट के अनुसार, बैंक पहले ही इस जांच के दौरान अपने दो अधिकारियों को ‘गार्डनिंग लीव’ पर भेज चुका था.

नए ग्राहक पर रोक!

इस विवाद ने बैंक की साख पर असर डाला है, खासकर तब जब दुबई फाइनेंशियल सर्विसेज अथॉरिटी (DFSA) ने HDFC Bank की दुबई ब्रांच को नए ग्राहक जोड़ने से अस्थायी रूप से रोक दिया है. नियामक ने बिक्री प्रक्रिया में खामियों और हाई-रिस्क प्रोडक्ट्स को लेकर पारदर्शिता की कमी पर चिंता जताई है. इस पूरे घटनाक्रम के बीच बैंक के शीर्ष स्तर पर भी हलचल देखने को मिली है. हाल ही में HDFC Bank के पार्ट-टाइम चेयरमैन अतनु चक्रवर्ती ने “मूल्यों और नैतिकता” से जुड़े मतभेदों का हवाला देते हुए अचानक इस्तीफा दे दिया, जिसने इस विवाद को और गंभीर बना दिया है.

शेयरों में गिरावट का सिलसिला जारी

बाजार में भी इस खबर का असर साफ दिखा. HDFC Bank का शेयर 2.2 फीसदी गिरकर 780 रुपये पर बंद हुआ और लगातार दूसरे दिन इसमें कमजोरी दर्ज की गई. पिछले दो कारोबारी सत्रों में स्टॉक करीब 7 फीसदी तक टूट चुका है, जो निवेशकों की बढ़ती चिंता को दर्शाता है. वहीं, महीने भर के दौरान इसमें 15 फीसदी से ज्यादा की गिरावट दर्ज की है. स्टॉक अपने 52 वीक लो (770 रुपये) के काफी करीब ट्रेड कर रहा है. कंपनी का मार्केट कैप 12,30,897 करोड़ रुपये दर्ज किया गया.

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