काजू कतली पर चढ़े चांदी के वर्क की कितनी होती है कीमत, महंगे सिल्वर ने बिगाड़ा मिठास का स्वाद?
काजू कतली पर चढ़ने वाली चांदी की परत, जिसे वर्क कहा जाता है, अब मिठाई की मिठास पर भारी पड़ रही है. चांदी के दाम बढ़ने से वर्क महंगा हुआ और काजू कतली की कीमत भी बढ़ गई है. कुछ महीने पहले तक व्यापारी चांदी की 100 चादरों का एक बंडल लगभग 600 रुपये में बेचते थे. लेकिन चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते अब उसी गठ्ठे की कीमत करीब 1,000 रुपये तक पहुंच गई है.
त्योहार हो, शादी-ब्याह हो या फिर किसी खास खुशी का मौका, काजू कतली का नाम आते ही लोगों के चेहरे पर अलग ही चमक आ जाती है. सफेद, मुलायम काजू कतली और उसके ऊपर चढ़ी चमचमाती चांदी की परत, जिसे वर्क कहा जाता है, इसे शाही मिठाइयों की कतार में खड़ा कर देती है. लेकिन अब यही चांदी का वर्क काजू कतली की मिठास पर भारी पड़ने लगा है. वजह है चांदी के दामों में आई तेज उछाल, जिसने न सिर्फ काजू कतली की कीमत बढ़ा दी है, बल्कि लोगों की जेब और स्वाद दोनों को झटका दिया है.
एक काजू कतली पर कितनी चांदी लगती है
काजू कतली पर जो चांदी की परत दिखाई देती है, वह बेहद पतली होती है. इतनी पतली कि एक ग्राम चांदी से दर्जनों मिठाइयों पर वर्क चढ़ाया जा सकता है. आम तौर पर एक ग्राम शुद्ध चांदी से करीब 50 से 70 वर्ग इंच तक वर्क तैयार हो जाता है यानी एक काजू कतली पर चढ़ने वाला वर्क वजन में तो बेहद हल्का होता है, लेकिन उसकी कीमत पूरी मिठाई की लागत पर असर डाल देती है. जब चांदी सस्ती होती है, तब यह वर्क सिर्फ एक लग्जरी टच होता है, लेकिन जैसे ही सिल्वर के दाम आसमान छूते हैं, यही वर्क मिठाई को महंगा बना देता है.
कुछ महीने पहले तक व्यापारी चांदी की 100 चादरों का एक बंडल लगभग 600 रुपये में बेचते थे. लेकिन चांदी की कीमतों में भारी बढ़ोतरी के चलते अब उसी गठ्ठे की कीमत करीब 1,000 रुपये तक पहुंच गई है. इसका असर सीधे तौर पर वर्क बनाने वाले कारीगरों, मिठाई कारोबारियों और ग्राहकों पर पड़ा है.
चांदी के दाम बढ़े तो वर्क भी हुआ भारी
बीते समय में चांदी की कीमतें अपने पीक टाइम हाई पर पहुंचीं, जब इसका भाव चार लाख रुपये प्रति किलो से अधिक चला गया था. इसी दौर में चांदी के वर्क की कीमत में सबसे ज्यादा इजाफा देखने को मिला. उस समय वर्क की कीमत करीब 1,400 रुपये के आसपास पहुंच गई थी. हालांकि अब चांदी की कीमतों में गिरावट देखी जा रही है. शुक्रवार, 6 फरवरी को चांदी के दाम में जोरदार गिरावट आई. ऑल इंडिया सर्राफा एसोसिएशन के मुताबिक, चांदी करीब 5 फीसदी टूटकर 2 लाख 55 हजार रुपये प्रति किलो पर आ गई. ऐसे में उम्मीद जताई जा रही है कि आने वाले समय में चांदी के वर्क की कीमतों में भी कुछ राहत मिल सकती है और काजू कतली खरीदते वक्त लोगों की जेब पर ज्यादा बोझ नहीं पड़ेगा.
सरकार ने वर्क को लेकर क्या नियम तय किए हैं
खाद्य सुरक्षा एवं मानक विनियम, 2011 में चांदी के वर्क से जुड़े स्पष्ट नियम तय किए गए हैं. नियमों के अनुसार, चांदी की पत्ती एक समान मोटाई की होनी चाहिए और उसमें किसी तरह की सिलवट या तह नहीं होनी चाहिए. चांदी की पत्ती का वजन निर्धारित सीमा के भीतर होना चाहिए और उसकी शुद्धता भी तय मानक के अनुरूप होनी चाहिए. इसके साथ ही यह भी साफ किया गया है कि बर्क बनाने में किसी भी स्तर पर पशु मूल की किसी सामग्री का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए और इसे खाद्य सुरक्षा से जुड़े सभी नियमों का पालन करना जरूरी है.
कैसे तैयार होती है चांदी की बेहद नाजुक परत
चांदी का वर्क तैयार करना बेहद मेहनत का काम है. श्रमिक घंटों तक चमड़े की थैलियों को पीट-पीटकर उनमें रखी चांदी को बेहद पतली चादर में बदलते हैं. आखिर में तैयार होने वाली ये चादरें इतनी नाजुक होती हैं कि त्वचा के संपर्क में आते ही फट जाती हैं. इसी वजह से इन्हें कागज की परतों या खास औजारों की मदद से संभाला जाता है.
नो सिल्वर काजू कतली बेचने पर मजबूर दुकानदार
चांदी की महंगाई का असर अब साफ नजर आने लगा है. कई दुकानदार या तो बर्क की मोटाई कम कर रहे हैं या फिर पूरी तरह से बिना चांदी वाली नो सिल्वर काजू कतली बेच रहे हैं. कुछ जगहों पर खाने योग्य चांदी की जगह मिलावटी या बेहद पतली परत के इस्तेमाल की शिकायतें भी सामने आई हैं, जिससे स्वाद के साथ-साथ सेहत को लेकर भी सवाल खड़े हो रहे हैं. ग्राहक अब सिर्फ चमक देखकर खुश नहीं होता, बल्कि यह भी पूछ रहा है कि वर्क असली है या नहीं और उसकी कीमत वाकई जायज है या नहीं.
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