NSE ने दी कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज को चलाने के लिए यूनिट बनाने की मंजूरी, सोमवार को BCCL के शेयरों में दिख सकती है हलचल
एक्सचेंज ऑपरेटर ने कहा कि एक यूनिफाइड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की कमी के कारण कीमतों में गड़बड़ी, छोटे पार्टिसिपेंट्स के लिए सीमित पहुंच और एक भरोसेमंद स्पॉट बेंचमार्क की कमी हुई है. इस फैसले का असर कोल इंडिया और बीसीसीएल के शेयरों पर सोमवार को नजर आ सकता है.
भारत के नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने शुक्रवार को प्रस्तावित नेशनल कोल ट्रेडिंग एक्सचेंज को चलाने के लिए एक यूनिट बनाने की मंजूरी दे दी. पिछले साल, भारत ने बढ़ते उत्पादन के बीच देश में उत्पादित कोयले को खरीदने और बेचने के लिए एक कोल ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म स्थापित करने की योजना की घोषणा की थी. एक्सचेंज ऑपरेटर ने एक फाइलिंग में बताया कि NSE की कोल एक्सचेंज में कम से कम 60 फीसदी हिस्सेदारी होगी और बाकी 40 फीसदी हिस्सेदारी संभावित रूप से दूसरे शेयरहोल्डर्स को दी जाएगी.
कोयले की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग
NSE ने कहा, ‘यह प्लेटफॉर्म स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स के जरिए फिजिकल कोयले की इलेक्ट्रॉनिक ट्रेडिंग को संभव बनाएगा और फिजिकल डिलीवरी और भविष्य में रेगुलेटरी मंजूरी मिलने पर डेरिवेटिव प्रोडक्ट्स को आसान बनाएगा.’
कोल इंडिया का दबदबा
एक्सचेंज ऑपरेटर ने कहा कि एक यूनिफाइड ट्रेडिंग प्लेटफॉर्म की कमी के कारण कीमतों में गड़बड़ी, छोटे पार्टिसिपेंट्स के लिए सीमित पहुंच और एक भरोसेमंद स्पॉट बेंचमार्क की कमी हुई है. सरकारी कंपनी कोल इंडिया अभी भारत में खनन किए जाने वाले 1 अरब टन से ज्यादा कोयले का लगभग तीन-चौथाई हिस्सा संभालती है, जो चीन के बाद दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा कोयला बाजार है. NSE ने कहा कि वह प्रस्तावित एक्सचेंज के लिए भारत के कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइज़ेशन को लाइसेंस एप्लीकेशन जमा करेगा.
फैसले का क्या है मतलब?
कोयले से भारत की ज्यादातर बिजली बनती है, लेकिन इसकी ट्रेडिंग अभी भी अलग-अलग इलाकों और कॉन्ट्रैक्ट्स में फैली हुई है, जिससे खरीदारों को कीमतों में ट्रांसपेरेंसी नहीं मिल पाती और उनकी पहुंच भी सीमित रहती है. NSE फिजिकल कोयले के लिए एक सिंगल इलेक्ट्रॉनिक मार्केटप्लेस चाहता है, जिसमें स्टैंडर्ड कॉन्ट्रैक्ट्स और डिलीवरी हो, जिससे एक भरोसेमंद स्पॉट प्राइस बेंचमार्क बन सके.
यह एक्सचेंज कम से कम 60 फीसदी NSE के मालिकाना हक वाला होगा और इसके लिए भारत के कोल कंट्रोलर ऑर्गनाइजेशन से लाइसेंस की जरूरत होगी. अगर यह सफल होता है और रेगुलेटर इसकी इजाजत देते हैं, तो NSE का कहना है कि वह बाद में कोल डेरिवेटिव्स को लिस्ट कर सकता है, जिससे पावर प्रोड्यूसर्स और भारी इंडस्ट्री को कीमतों में उतार-चढ़ाव से बचने के लिए टूल्स मिल जाएंगे.
शेयरों में दिख सकती है हलचल
इस फैसले का असर कोल इंडिया और बीसीसीएल के शेयरों पर सोमवार को नजर आ सकता है. कोल इंडिया के शेयर शुक्रवार को 0.35 फीसदी की तेजी के साथ 432 रुपये पर बंद हुए. वहीं, बीसीसीएल के शेयर 0.75 फीसदी की तेजी के साथ 37.15 रुपये पर बंद हुए.
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