India-EU डील से एक ही झटके में चित होंगे बांग्लादेश, पाकिस्तान, 4 करोड़ भारतीय को सीधा फायदा, जानें कैसे
भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच हुआ फ्री ट्रेड एग्रीमेंट भारत के लिए बड़ी आर्थिक जीत माना जा रहा है. इस डील से टेक्सटाइल और गारमेंट सेक्टर को सीधा फायदा मिलेगा. यूरोप में भारतीय प्रोडक्ट पर लगने वाला इंपोर्ट ड्यूटी कम या खत्म हो सकता है. इससे निर्यात बढ़ेगा और रोजगार के नए अवसर बनेंगे.
India EU- FTA: भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच 27 जनवरी को फ्री ट्रेड एग्रीमेंट साइन हो गया है. इस डील को ‘मदर ऑफ ऑल डील्स’ कहा जा रहा है. इससे दोनों पक्षों को फायदा होने की उम्मीद है. खासकर भारत के लिए यह एक विन- विन एग्रीमेंट माना जा रहा है. इस समय भारत के कई सेक्टर अमेरिका के टैरिफ दबाव झेल रहे हैं. इस एग्रीमेंट के लागू होने के बाद उन्हें राहत मिलने की उम्मीद है. इससे भारत न केवल ट्रंप टैरिफ के दबाव से बाहर निकलेगा बल्कि इस सेक्टर में अपने कंपटीटर पाकिस्तान और बांग्लादेश पर भी बढ़त हासिल करेगा.
इस डील से भारतीय टेक्सटाइल इंडस्ट्री को सीधा फायदा मिलने की उम्मीद है. अभी भारतीय प्रोडक्ट पर यूरोप में भारी इंपोर्ट ड्यूटी लगता है. डील लागू होने के बाद यह बोझ काफी हद तक कम हो सकता है. इससे भारत के निर्यातक दोबारा मजबूत स्थिति में आ सकेंगे. रोजगार और निवेश दोनों को बढ़ावा मिलने की संभावना है.
टेक्सटाइल इंडस्ट्री को सीधा फायदा
इस डील का सबसे बड़ा फायदा कपड़ा और गारमेंट सेक्टर को मिलेगा. अभी यूरोपीय बाजार में भारतीय प्रोडक्ट पर 10 से 16 फीसदी तक टैरिफ लगता है. डील के बाद यह शून्य या बेहद कम हो सकता है. इससे भारतीय गारमेंट ज्यादा सस्ते और कंपटीटर बनेंगे. यूरोपीय खरीदारों के लिए भारत एक बेहतर विकल्प बनेगा. इससे ऑर्डर और प्रोडक्शन दोनों बढ़ सकते हैं.
निर्यात में सालाना बढ़त की उम्मीद
इस समझौते से हर साल निर्यात में बड़ी बढ़ोतरी हो सकती है. अनुमान है कि कपड़ा निर्यात में सालाना डेढ़ से 2 अरब डॉलर तक की बढ़त आ सकती है. यूरोपीय संघ के 27 देशों तक भारतीय कंपनियों की पहुंच आसान होगी. इससे भारत का ट्रेड बैलेंस भी मजबूत होगा.
बांग्लादेश और पाकिस्तान पर मिलेगी बढ़त
अब तक भारत को बांग्लादेश और पाकिस्तान से कड़ी टक्कर मिलती रही है. इन देशों को यूरोप में पहले से बिना टैरिफ के पहुंच मिलती है. भारत को अब तक ज्यादा टैक्स देना पड़ता था. FTA के बाद यह फर्क खत्म हो जाएगा. भारतीय प्रोडक्ट बराबरी के लेवल पर कंपटीशन कर पाएंगे. इससे भारत की बाजार हिस्सेदारी बढ़ सकती है.
कपास से कपड़े तक पूरी चेन को फायदा
इस डील का असर केवल गारमेंट तक सीमित नहीं रहेगा. कपास किसानों से लेकर फैब्रिक और रेडीमेड कपड़े बनाने वालों तक सभी को फायदा होगा. मांग बढ़ने से उत्पादन तेज होगा. छोटे और मझोले उद्योगों को नए ऑर्डर मिलेंगे. सप्लाई चेन मजबूत होगी और लागत भी संतुलित बनी रहेगी.
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रोजगार और निवेश को मिलेगा बढ़ावा
टेक्सटाइल इंडस्ट्री भारत में सबसे ज्यादा रोजगार देने वाले सेक्टरों में शामिल है. निर्यात बढ़ने से नए कारखाने और यूनिट शुरू हो सकती हैं. इससे लाखों नए रोजगार पैदा होने की संभावना है. यह सेक्टर देश में 4.5 करोड़ लोगों को रोजगार देता है. विदेशी कंपनियां भी भारत में निवेश के लिए आगे आ सकती हैं. कुल मिलाकर यह डील भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में अहम भूमिका निभा सकती है. रिपोर्ट के मुताबिक यह सेक्टर 2030 तक US$ 2.3 बिलियन डॉलर तक पहुंच सकता है.