India-US Trade Deal पर फिलहाल ब्रेक, नई अमेरिकी टैरिफ पॉलिसी के बाद ही होगा समझौते पर साइन
भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते पर फिलहाल अंतिम मुहर नहीं लग पाएगी. अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट द्वारा पुराने टैरिफ को रद्द किए जाने के बाद वॉशिंगटन नई टैरिफ स्ट्रक्चर तैयार कर रहा है, जिसके बाद ही इस डील पर हस्ताक्षर होने की संभावना है.
India US Trade Deal Delay: भारत और अमेरिका के बीच प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते यानी Bilateral Trade Agreement को लेकर प्रक्रिया जारी है, लेकिन इस पर अंतिम हस्ताक्षर फिलहाल टल सकते हैं. सरकार ने सोमवार, 16 मार्च को बताया कि यह समझौता तब तक साइन नहीं किया जाएगा जब तक अमेरिका अपनी नई टैरिफ स्ट्रक्चर को अंतिम रूप नहीं दे देता. दरअसल, इस साल की शुरुआत में अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने एक अहम फैसला सुनाते हुए राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा कार्यकारी अधिकारों के जरिए लगाए गए कुछ टैरिफ को अमान्य करार दे दिया था. इस फैसले के बाद पहले से लागू टैरिफ व्यवस्था खत्म हो गई और अब अमेरिकी प्रशासन ग्लोबल ट्रेड के लिए एक नई टैरिफ नीति तैयार करने में जुटा हुआ है.
मार्च में होने वाला था समझौता
इस व्यापार समझौते पर पहले मार्च 2026 में हस्ताक्षर होने की उम्मीद थी. लेकिन सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद स्थिति बदल गई. अदालत के निर्णय के चलते पहले लगाए गए टैरिफ प्रभावहीन हो गए, जिसके बाद अमेरिकी प्रशासन को नई व्यवस्था तैयार करने की जरूरत पड़ी. फिलहाल अमेरिका Trade Act 1974 की धारा 122 के तहत कुछ प्रोडक्ट्स पर लगभग 10 फीसदी का अस्थायी टैरिफ लगा रहा है. यह व्यवस्था लगभग पांच महीनों तक लागू रह सकती है, जब तक नई व्यापक टैरिफ नीति तैयार नहीं हो जाती.
पश्चिम एशिया टेंशन का व्यापार पर असर
इसी बीच, पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव को लेकर भी चिंता जताई जा रही है. अधिकारियों के अनुसार, अमेरिका और इजराइल के ईरान के खिलाफ सैन्य संघर्ष का असर भारत के व्यापार पर भी पड़ सकता है, खासकर खाड़ी देशों के साथ होने वाले आयात-निर्यात पर. वाणिज्य सचिव राजेश अग्रवाल ने यह भी बताया कि इस संघर्ष के कारण लॉजिस्टिक्स से जुड़ी चुनौतियां सामने आ रही हैं. समुद्री मार्ग से जहाजों की आवाजाही प्रभावित हो रही है और एयर कार्गो संचालन में भी कुछ बाधाएं देखने को मिल रही हैं. इन परिस्थितियों का असर भारत के पश्चिम एशिया के लिए होने वाले निर्यात और वहां से होने वाले आयात दोनों पर पड़ सकता है. हालांकि अधिकारियों का कहना है कि इसका प्रभाव बहुत बड़ा नहीं होगा, क्योंकि भारत लगातार कूटनीतिक स्तर पर संपर्क बनाए हुए है.
निर्यात को सहारा देने की तैयारी
सरकार इस संभावित असर को ध्यान में रखते हुए पश्चिम एशिया के लिए निर्यात को समर्थन देने के उपायों पर भी विचार कर रही है. सूत्रों के अनुसार, इस संबंध में कुछ कदम जल्द ही घोषित किए जा सकते हैं, ताकि भारतीय निर्यातकों को राहत मिल सके. हालांकि पश्चिम एशिया में तनाव के कारण कुछ असर जरूर पड़ सकता है, लेकिन सरकार को उम्मीद है कि भारत का कुल वस्तु और सेवा निर्यात लगभग 860 अरब डॉलर तक पहुंच सकता है.
दूसरे बाजारों पर बढ़ेगा फोकस
सरकार की रणनीति यह भी है कि अगर पश्चिम एशिया में निर्यात में गिरावट आती है तो उसे दूसरे क्षेत्रों में निर्यात बढ़ाकर संतुलित किया जाए. अधिकारियों का कहना है कि वित्त वर्ष के अंत तक भारत मर्चेंडाइज एक्सपोर्ट के मामले में पिछले साल के मुकाबले सकारात्मक वृद्धि हासिल करने की कोशिश करेगा.
भारत-अमेरिका के बीच जारी है बातचीत
राजेश अग्रवाल ने भी कहा कि भारत और अमेरिका के बीच आपसी हितों पर आधारित व्यापार समझौते को लेकर बातचीत जारी है. उन्होंने बताया कि 20 फरवरी 2026 को अमेरिकी सुप्रीम कोर्ट ने रेसिप्रोकल टैरिफ को अमान्य घोषित कर दिया था. इसके बाद ये टैरिफ अब लागू नहीं रहे. हालांकि अमेरिकी सरकार ने Trade Act 1974 की धारा 122 के तहत सभी देशों से आयात होने वाले कुछ उत्पादों पर 10 फीसदी का अस्थायी शुल्क लगाया है. अग्रवाल के मुताबिक, भारत और अमेरिका दोनों ही पक्ष ऐसे व्यापार समझौते पर काम कर रहे हैं जो दोनों देशों के लिए फायदेमंद हो.
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