बजट 2026 से पहले क्या पेट्रोल-डीजल पर बढ़ेगी एक्साइज ड्यूटी? तेल कंपनियों पर JM फाइनेंशियल ने दी ऐसी रेटिंग
केंद्र सरकार पर अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर दबाव है. जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल ब्रेंट कीमत पर ऑटो फ्यूल पर लगभग 3.50 रुपये प्रति लीटर का नॉर्मल ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) कमा रही थीं.
जेएम फाइनेंशियल ने गुरुवार को कहा कि 1 फरवरी को यूनियन बजट से पहले पेट्रोल और डीजल जैसे ऑटो फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी में 3 से 4 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी ‘काफी हद तक मुमकिन’ है, क्योंकि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां ज मार्केटिंग मार्जिन कमा रही हैं और केंद्र सरकार पर अपनी वित्तीय स्थिति को लेकर दबाव है. जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि ऑयल मार्केटिंग कंपनियां (OMCs) लगभग 72 डॉलर प्रति बैरल ब्रेंट कीमत पर ऑटो फ्यूल पर लगभग 3.50 रुपये प्रति लीटर का नॉर्मल ग्रॉस मार्केटिंग मार्जिन (GMM) कमा रही थीं.
इंटीग्रेटेड मार्जिन नॉर्मल लेवल
ब्रोकरेज ने कहा कि लगभग 61 डॉलर प्रति बैरल की मौजूदा स्पॉट ब्रेंट कीमत पर, GMM और इंटीग्रेटेड मार्जिन नॉर्मल लेवल से काफी ज्यादा थे. इसने मौजूदा GMM को लगभग 10.60 रुपये प्रति लीटर बताया, जबकि ऐतिहासिक औसत 3.50 रुपये प्रति लीटर था, वहीं इंटीग्रेटेड ग्रॉस मार्जिन का अनुमान लगभग 19.20 रुपये प्रति लीटर लगाया गया, जबकि ऐतिहासिक लेवल लगभग 12.20 रुपये प्रति लीटर था.
रेवेन्यू रन रेट
फाइनेंशियल साइड पर JM फाइनेंशियल की इकोनॉमिस्ट टीम ने कहा कि केंद्र सरकार का FY26 रेवेन्यू रन रेट बजट अनुमानों से पीछे चल रहा है. उसने कहा कि अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान रेवेन्यू रिसीट्स FY26 के बजट अनुमान का लगभग 56 फीसदी रहा, जबकि पिछले साल इसी अवधि में यह 60 फीसदी था और अंडरलाइंग डेटा टैक्स कलेक्शन में मंदी का संकेत दे रहा है.
साथ ही, अप्रैल से नवंबर 2025 के दौरान कैपिटल एक्सपेंडिचर 6.58 लाख करोड़ रुपये पर मजबूत बना रहा, जो FY26 के बजट अनुमान का 58.7 फीसदी है, जबकि एक साल पहले यह 46.2 फीसदी था.
फिस्कल डेफिसिट टारगेट
जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि पहले एडवांस अनुमानों के अनुसार, डिफ्लेशन के कारण FY26 में नॉमिनल GDP ग्रोथ लगभग 8 फीसदी रहने की संभावना है, जिससे केंद्र सरकार के 4.4 फीसदी के फिस्कल डेफिसिट टारगेट को पूरा करने पर दबाव पड़ सकता है. ब्रोकरेज ने आगे कहा कि उसे उम्मीद है कि सरकार FY27 में फिस्कल डेफिसिट टारगेट को और कम करके GDP के 4 फीसदी से 4.2 फीसदी तक कर देगी.
सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ी
इस बैकग्राउंड में जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि सरकार ने रेवेन्यू बढ़ाने के लिए 1 फरवरी, 2026 से सिगरेट पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ा दी है, जिससे सालाना लगभग 5,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ेगा. उसने कहा कि सरकार बजट से पहले रेवेन्यू बढ़ाने के लिए कई रास्ते तलाश सकती है, जिसमें भारतीय रिजर्व बैंक से ज्यादा डिविडेंड, पब्लिक सेक्टर की कंपनियों से ज्यादा पेआउट और विनिवेश से मिलने वाला पैसा शामिल है.
जेएम फाइनेंशियल ने कहा कि ऑटो फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी बढ़ाना रेवेन्यू बढ़ाने का एक बड़ा जरिया हो सकता है. उसने अनुमान लगाया कि प्रति लीटर 3 से 4 रुपये की बढ़ोतरी से सालाना आधार पर लगभग 50,000 से 70,000 करोड़ रुपये का रेवेन्यू बढ़ सकता है, जो GDP का लगभग 0.15 से 0.2 फीसदी है. उसने यह भी कहा कि ऑटो फ्यूल पर एक्साइज ड्यूटी में हर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी से केंद्र सरकार का रेवेन्यू सालाना लगभग 17,000 करोड़ रुपये बढ़ जाता है.
कितनी रहेंगी ब्रेंट की कीमतें?
ब्रोकरेज ने कहा कि उसका मानना है कि अमेरिका में नवंबर 2026 के मिड टर्म चुनावों तक ब्रेंट की कीमतें लगभग $65 प्रति बैरल पर कम रहने की संभावना है, क्योंकि सऊदी अरब के नेतृत्व वाला OPEC प्लस हर दिन 2 से 3 मिलियन बैरल की बड़ी ओवरसप्लाई बनाए हुए है. उसने कहा कि सरकार ने पहले एक्साइज ड्यूटी बढ़ाने का फैसला इसलिए टाल दिया होगा क्योंकि वह यह साफ होने का इंतजार कर रही थी कि ब्रेंट की कीमतें कहां स्थिर होती हैं, क्योंकि ब्रेंट की कीमत 70 डॉलर प्रति बैरल के करीब होने से ऐसी बढ़ोतरी की गुंजाइश कम हो गई थी.
ऑटो फ्यूल मार्जिन
जेएम फाइनेंशियल ने ऑटो फ्यूल मार्जिन में बदलाव के प्रति OMC की कमाई की संवेदनशीलता पर भी जोर दिया. उसने कहा कि ऑटो फ्यूल GMM में हर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी या कमी से कंसोलिडेटेड Ebitda में 12 से 17 फीसदी की बढ़ोतरी या कमी होती है, जिसका असर HPCL के लिए 16.6 फीसदी, BPCL के लिए 14.5 फीसदी और IOCL के लिए 12.4 फीसदी होने का अनुमान है.
उसने यह भी कहा कि GMM में हर 1 रुपये प्रति लीटर के बदलाव से कंपनियों के वैल्यूएशन में भी 17 फीसदी से 26 फीसदी का बदलाव होता है. इसके अलावा, उसने कहा कि ऐतिहासिक 3.5 रुपये प्रति लीटर के स्तर से ऊपर GMM में हर 1 रुपये प्रति लीटर की बढ़ोतरी या कमी से OMCs की बुक वैल्यू में प्रति माह 0.2 से 0.5 फीसदी की बढ़ोतरी या कमी होती है.
रिफाइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिम
JM फाइनेंशियल ने वैल्यूएशन के आधार पर और मौजूदा हाई GMM की सस्टेनेबिलिटी के जोखिम के कारण OMCs पर सतर्क रुख बनाए रखा है. ब्रोकरेज ने कहा, ‘हम HPCL पर SELL की रेटिंग बनाए रखते हैं. इसके पीछे कारण बताते हुए कहा कि यह हिस्टोरिकल वैल्यूएशन से 10 फीसदी प्रीमियम पर ट्रेड कर रहा है, मार्केटिंग बिजनेस में एक्सपोजर और इसके 73,000 करोड़ रुपये के राजस्थान रिफाइनिंग प्रोजेक्ट से जुड़े जोखिम हैं, जिसके बारे में उसने कहा कि समय और लागत बढ़ने के कारण इस पर लगाई गई पूंजी पर सिंगल डिजिट रिटर्न मिल सकता है. इसने IOCL पर 160 रुपये के अपरिवर्तित टारगेट प्राइस के साथ ‘रिड्यूस’ रेटिंग बनाए रखी और BPCL पर 350 रुपये के अपरिवर्तित टारगेट प्राइस के साथ ‘रिड्यूस’ रेटिंग दोहराई.
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