मेरठ में बनेगा देश का पहला ड्रोन रनवे, ऑपरेशन सिंदूर के बाद तैयारी तेज; 900 एकड़ में ₹406 करोड़ का स्पेशल एयरबेस
भारत मेरठ में अपना पहला समर्पित ड्रोन रनवे विकसित करने जा रहा है. 900 एकड़ में बनने वाला यह 406 करोड़ रुपये का एयरबेस HALE ड्रोन और ट्रांसपोर्ट विमानों के संचालन के लिए तैयार किया जाएगा. एडवांस नेविगेशन सिस्टम और सालाना 1,500 ड्रोन मिशनों की कैपेसिटी के साथ यह प्रोजेक्ट भारतीय सेना की तकनीक आधारित निगरानी और सुरक्षा रणनीति को नई मजबूती देगी.
Meerut India’s First Drone Runway: भारत अब ड्रोन और रिमोटली पायलटेड एयरक्राफ्ट (RPA) के लिए अपना पहला पूरी तरह से समर्पित रनवे बनाने जा रहा है. उत्तर प्रदेश के मेरठ में प्रस्तावित यह एयरबेस देश की सैन्य रणनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है. हाल के सैन्य अभियानों, खासकर ऑपरेशन सिंदूर, में ड्रोन की बढ़ती भूमिका ने यह स्पष्ट कर दिया है कि आगे की जरूरत और निगरानी अभियानों में मानवरहित प्रणालियां केंद्रीय भूमिका निभाएंगी.
900 एकड़ में बनेगा आधुनिक ड्रोन हब
भारतीय सेना की योजना के तहत यह नया एविएशन बेस 900 एकड़ से अधिक क्षेत्र में विकसित किया जाएगा. इसे इस तरह डिजाइन किया जा रहा है कि यहां से बड़ी संख्या में ड्रोन ऑपरेशन संचालित किए जा सकें. साथ ही कुछ चुनिंदा ट्रांसपोर्ट एयरक्राफ्ट की आवाजाही भी संभव होगी. न्यूज18 की एक रिपोर्ट के मुताबिक, रक्षा मंत्रालय के तहत कार्यरत बॉर्डर रोड्स ऑर्गेनाइजेशन (BRO) ने इस 406 करोड़ रुपये के प्रोजेक्ट के लिए प्रोजेक्ट मैनेजमेंट कंसल्टेंसी सेवाओं के लिए बिड्स आमंत्रित की हैं. इससे साफ है कि सरकार इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता के साथ आगे बढ़ा रही है.
कैसा होगा रनवे?
इस एयरबेस का सबसे ज्यादा हाईलाइटेड पॉइंट 2,110 मीटर लंबा और 45 मीटर चौड़ा रनवे होगा. यह रनवे खास तौर पर हाई एल्टीट्यूड लॉन्ग एंड्योरेंस (HALE) ड्रोन के संचालन के लिए तैयार किया जाएगा. इसके अलावा C-295 और C-130 कैटेगरी के ट्रांसपोर्ट विमानों की लैंडिंग और टेकऑफ भी यहां मुमकिन होगी. रनवे में ICAO CAT-II मानकों के अनुरूप लाइटिंग सिस्टम और एडवांस नेविगेशन इक्विपमेंट लगाए जाएंगे. इससे कम विजिबिलिटी या खराब मौसम में भी सुरक्षित उड़ान संचालन संभव हो सकेगा.
हैंगर और ऑपरेशनल कैपेसिटी कैसी होगी?
रिपोर्ट के मुताबिक, एयरबेस में 60×50 मीटर आकार के दो बड़े हैंगर बनाए जाएंगे. इनका इस्तेमाल ड्रोन और विमानों के रखरखाव, मरम्मत और त्वरित तैनाती के लिए किया जाएगा. अनुमान है कि यह बेस हर साल भारी विमानों की आवाजाही के साथ-साथ लगभग 1,500 ड्रोन ऑपरेशन संभाल सकेगा. यानी औसतन रोजाना करीब चार ड्रोन मिशन यहां से ऑपरेट किए जा सकेंगे.
क्यों जरूरी है समर्पित ड्रोन रनवे?
ऑपरेशन सिंदूर के दौरान ड्रोन ने रियल-टाइम खुफिया जानकारी जुटाने और सैनिकों के रिस्क को कम करने में अहम भूमिका निभाई थी. इस अनुभव ने यह स्पष्ट किया कि लंबी अवधि तक निगरानी और सटीक लक्ष्य भेदन के लिए विशेष बुनियादी ढांचे की आवश्यकता है. HALE ड्रोन ऊंचाई पर लंबे समय तक उड़ान भर सकते हैं और बड़े क्षेत्र की लगातार निगरानी कर सकते हैं. सीमावर्ती इलाकों में इस तरह की निरंतर हवाई मौजूदगी से स्थिति की बेहतर समझ और तेज प्रतिक्रिया संभव होती है.
कब तक पूरा होगा प्रोजेक्ट?
पूरी परियोजना को लगभग 85 महीनों में पूरा करने का लक्ष्य रखा गया है. शुरुआती 7 महीने विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (DPR) और पूर्व-तैयारी में लगेंगे. इसके बाद 18 महीनों में निर्माण कार्य पूरा किया जाएगा. 24 महीने की डिफेक्ट लायबिलिटी अवधि रखी गई है. साथ ही 36 महीने तक रखरखाव और निगरानी की व्यवस्था भी शामिल है.
कितना अहम है ये प्रोजेक्ट?
मेरठ में बनने वाला यह ड्रोन रनवे फ्यूचर में भारत के लिए एक रणनीतिक एविएशन हब के रूप में काम कर सकता है. यह प्रोजेक्ट भारतीय सेना के उस व्यापक दृष्टिकोण को दर्शाती है, जिसमें टेक्नोलॉजी बेस्ड, लगातार निगरानी और तेज प्रतिक्रिया कैपेसिटी को प्राथमिकता दी जा रही है. यानी कुल मिलाकर मेरठ का यह समर्पित ड्रोन एयरबेस भारत की डिफेंस तैयारियों को नई दिशा देगा और मानव रहित युद्ध प्रणालियों के क्षेत्र में देश को मजबूत आधार प्रदान करेगा.
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