PM Modi का नेक्स्ट जेन रिफॉर्म का ऐलान, क्या L.A.L पर लगाएंगे दांव, जानें कितनी बड़ी है चुनौती?

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से देशवासियों को संबोधित करते हुए कई अहम घोषणाएं कीं. इस अवसर पर उन्होंने देश की आर्थिक प्रगति और सामाजिक सुधार पर जोर देते हुए नेक्ट जेनरेशन सुधारों के लिए टास्क फोर्स बनाने का ऐलान किया है. इन सुधारों में क्या सरकार फिर से L.A.L पर दांव लगाएगी, जानें यह कितनी बड़ी चुनौती है?

इन तीन सुधारों से खुलेगी विकसित भारत की राह Image Credit: Money9live

PM Modi ने जब 15 अगस्त, 2014 को पहली बार लाल किले से देश को संबोधित किया, तो देश में बड़े बदलावों के लिए एक व्यापक रूपरेखा पेश की, जिसके आधार पर सरकार ने कई काम किए. लेकिन कई मामलों में सरकार को अपने कदम पीछे खींचने पड़े. इस बार PM मोदी ने सामाजिक-आर्थिक सुधारों को लेकर नया संकल्प व्यक्त किया है. खास तौर पर नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म टास्क फोर्स के एलान से संकेत मिलता है कि सरकार इस बार मजबूत इरादे के साथ व्यापक बदलाव करने जा रही है.

क्या करेगी नेक्स्ट जेन रिफॉर्म टास्क फोर्स

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 79वें स्वतंत्रता दिवस पर लाल किले से राष्ट्र को संबोधित करते हुए भविष्य की नीतियों को दिशा देने के लिए नेक्स्ट जेनरेशन रिफॉर्म्स के लिए एक टास्क फोर्स गठित करने की घोषणा की है. यह टास्क फोर्स समयबद्ध तरीके से अपनी सिफारिशें देगी. इन सुधारों में सबसे अहम L.A.L. यानी लैंड, एग्रीकल्चर और लेबर रिफॉर्म हैं. इनके अलावा टैक्स रिफॉर्म, ईज ऑफ डूइंग बिजनेस, इनकम टैक्स, कॉर्पोरेट टैक्स, FDI, रिजर्वेशन, इलेक्टोरल रिफॉर्म जैसी तमाम बातें भी शामिल हो सकती हैं, जिन पर देश में दशकों से चर्चा होती रही है.

सुधारों से खुलेगी विकसित भारत की राह

PM Modi ने विकसित भारत के विजन को साकार करने के लिए हर क्षेत्र में मॉडर्न ईकोसिस्टम बनाने की बात कही, ताकि देश हर तरह से आत्मनिर्भर बन सके. कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि अगर भारत को 2047 तक विकसित देश बनना है, तो तेज और समावेशी आर्थिक प्रगति जरूरी होगी.

विकसित होने के लिए क्या करना होगा

वर्ल्ड बैंक की एक रिपोर्ट के मुताबिक भारत को विकसित देशों की कतार में शामिल होने के लिए अगले 22 साल तक औसतन 7.8% की दर से निरंतर वृद्धि करनी होगी. इसके अलावा सिर्फ GDP ग्रोथ से काम नहीं चलेगा, पर कैपिटा इनकम भी तेजी से बढ़ानी होगी. वर्ल्ड बैंक की मौजूदा कसौटियों के तहत किसी देश को हाई इनकम कंट्री के दायरे में आने के लिए कम से कम 14 हजार डॉलर यानी करीब 12 लाख रुपये सालाना प्रतिव्यक्ति आय होनी चाहिए.

कैसे हासिल होगा यह लक्ष्य

PM मोदी का कहना है कि भारत को विकसित देशों की कतार में लाने के लिए हर क्षेत्र में रिफॉर्म करने होंगे. सरकार का इरादा किसानों की आय बढ़ाने का है, ताकि यह सेक्टर देश की GDP में ज्यादा योगदान दे और रोजगार के स्थायी व बेहतर अवसर पैदा हों. PM ने कहा, “यह प्रगति करने, बड़े सपने देखने और खुद को महान लक्ष्यों के लिए समर्पित करने का अवसर है.”

सुधारों के केंद्र में किसान

PM मोदी ने अपने भाषण में संकेत दिए कि किसान, रिफॉर्म टास्क फोर्स के एजेंडा के केंद्र में रहेंगे. आज भी देश की करीब 45% आबादी रोजगार के लिहाज से एग्रीकल्चर पर निर्भर है, जबकि इस सेक्टर का GDP में योगदान केवल 18–19% है. ऐसे में सरकार कृषि सुधारों पर फिर से जोर देगी, ताकि एग्रीकल्चर का GDP और रोजगार में योगदान बढ़े.

पहले भी हो चुकी है कोशिश

2020 में केंद्र सरकार ने तीन कृषि कानून बनाए थे. पहला कानून था कृषक उपज व्यापार और वाणिज्य (संवर्धन और सरलीकरण) अधिनियम, 2020. दूसरा कानून था कृषक सशक्तीकरण और संरक्षण (कीमत आश्वासन एवं कृषि सेवा करार) अधिनियम, 2020. तीसरा कानून था आवश्यक वस्तुएं (संशोधन) अधिनियम, 2020. इनके जरिए सरकार तीन बड़े लक्ष्य हासिल करना चाहती थी: किसानों को अपनी उपज बेचने के लिए अधिक विकल्प देना, बुआई से पहले तय मानकों और कीमत पर फसल का करार करने की आजादी देना, और भंडारण व आपूर्ति प्रबंधन बेहतर करके कालाबाजारी पर रोक लगाना.

लेबर रिफॉर्म से बढ़ेगी सामाजिक सुरक्षा

L.A.L. के तहत लेबर और लैंड रिफॉर्म सबसे अहम हैं. लेबर रिफॉर्म के तहत सरकार 29 केंद्रीय श्रम कानूनों को 4 कोड में समेट चुकी है. ये कोड 2020 में संसद से पारित हो गए थे, लेकिन अभी लागू नहीं हुए हैं. श्रम और रोजगार मंत्रालय के अनुसार ये चार कोड हैं: Wage Code, Social Security Code, Industrial Relations Code और Occupational Safety, Health and Working Conditions Code. ये कोड कर्मचारियों के बेहतर वेतन, सुरक्षा और सामाजिक सुरक्षा को सुनिश्चित करेंगे और साथ ही ईज ऑफ डूइंग बिजनेस को बढ़ावा देंगे.

लैंड रिफॉर्म से बढ़ेगी उद्योगों की रफ्तार

मोदी सरकार भूमि सुधार के तहत देशभर में भूमि अभिलेखों का 100% डिजिटलीकरण, हर भूखंड को यूनिक लैंड पार्सल आईडी (ULPIN) देने और SVAMITVA योजना के जरिए ग्रामीण संपत्तियों का सर्वे व संपत्ति कार्ड जारी करने पर काम कर रही है, जिससे विवाद घटेंगे, संपत्ति अधिकार मजबूत होंगे और निवेशकों को जमीन की मालिकाना हक की स्पष्ट जानकारी मिलेगी. इसके अलावा वक्फ संपत्तियों के प्रबंधन में पारदर्शिता लाने के लिए 2025 में नया संशोधन कानून लाया गया है, जिसमें बोर्ड में गैर-मुस्लिम विशेषज्ञों की नियुक्ति, अतिक्रमण हटाने के अधिकार और वक्फ बोर्ड को नियामक संस्था के रूप में पुनर्परिभाषित करना शामिल है. इन कदमों से भूमि विवाद कम होंगे, निवेश और औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन अधिग्रहण आसान होगा, फाइनेंसिंग की सुविधा बढ़ेगी, सप्लाई चेन और लॉजिस्टिक्स हब का विकास तेज होगा और अर्थव्यवस्था में वृद्धि, रोजगार सृजन तथा उद्योगों की प्रतिस्पर्धात्मक क्षमता को मजबूती मिलेगी.