बीकानेर भुजिया हो सकती है महंगी, ईरान-इजरायल तनाव का दिख सकता है लोकल असर

यूएस-ईरान संघर्ष का असर अब बीकानेर की मशहूर नमकीन इंडस्ट्री पर साफ दिखाई दे रहा है. खाड़ी देशों और यूरोप में एक्सपोर्ट धीमा होने से सप्लाई चेन बाधित हो गई है और लागत में तेज बढ़ोतरी दर्ज की जा रही है. फ्रेट चार्ज, पैकेजिंग और खाद्य तेल की कीमतों में उछाल ने उत्पादन लागत बढ़ा दी है. शिपमेंट में देरी के कारण व्यापारियों की पूंजी फंस रही है और ऑर्डर प्रभावित हो रहे हैं.

बीकानेर भुजिया Image Credit: AI/canva

Bikaner Bhujia Price: पश्चिम एशिया में चल रहे यूएस-ईरान संघर्ष का असर अब भारत के पारंपरिक उद्योगों तक पहुंच चुका है. राजस्थान के बीकानेर की मशहूर नमकीन इंडस्ट्री इस वैश्विक तनाव की सीधी मार झेल रही है. खाड़ी देशों और यूरोप में होने वाला एक्सपोर्ट धीमा पड़ गया है, जिससे न सिर्फ सप्लाई चेन प्रभावित हुई है, बल्कि लागत में भी तेजी से बढ़ोतरी देखने को मिल रही है. उद्योग से जुड़े कारोबारी अब आशंका जता रहे हैं कि अगर हालात जल्द नहीं सुधरे, तो आने वाले समय में बीकानेरी नमकीन की कीमतों में बढ़ोतरी तय है.

एक्सपोर्ट पर पड़ा सीधा असर

बीकानेर की नमकीन इंडस्ट्री का बड़ा हिस्सा खाड़ी देशों और यूरोप में एक्सपोर्ट पर निर्भर है. पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, मौजूदा हालात में समुद्री मार्गों पर बाधाएं और जहाजों की आवाजाही में कमी के कारण एक्सपोर्ट बुरी तरह प्रभावित हुआ है. जहां पहले शिपमेंट को पहुंचने में करीब 30 दिन लगते थे, अब वही समय बढ़कर 60 दिन या उससे ज्यादा हो गया है. इस देरी से व्यापारियों की पूंजी फंस रही है और ऑर्डर समय पर पूरे नहीं हो पा रहे हैं, जिससे विदेशी बाजार में भरोसे पर भी असर पड़ रहा है.

लागत में तेज बढ़ोतरी

युद्ध के चलते फ्रेट चार्ज में जबरदस्त उछाल आया है. इसके साथ ही कच्चे माल की कीमतें भी तेजी से बढ़ रही हैं. खासकर खाने के तेल की कीमत में पिछले एक महीने में करीब 20 फीसद तक बढ़ोतरी दर्ज की गई है. इसके अलावा पेट्रोलियम उत्पाद महंगे होने से पैकेजिंग लागत में भी 30 से 40 फीसद तक इजाफा हुआ है. इन सभी कारणों से उत्पादन लागत बढ़ रही है, जिसका सीधा असर अंतिम कीमतों पर पड़ सकता है.

कंटेनर की कमी और सप्लाई चेन बाधित

निर्यातकों के अनुसार, युद्ध के कारण कंटेनर की भारी कमी हो गई है. इससे न सिर्फ एक्सपोर्ट, बल्कि इंपोर्ट भी प्रभावित हो रहा है. पाम ऑयल और सोयाबीन जैसे जरूरी कच्चे माल की आपूर्ति में देरी हो रही है, जिससे उत्पादन प्रक्रिया पर दबाव बढ़ गया है. इनपुट की अनिश्चितता के कारण कई यूनिट्स को अपनी उत्पादन क्षमता घटानी पड़ रही है.

उद्योग पर बढ़ता आर्थिक दबाव

बीकानेर की नमकीन इंडस्ट्री हजारों लोगों को रोजगार देती है और शहर की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा है. व्यापारियों का कहना है कि अगर स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है, तो छोटे और मझोले कारोबारियों के लिए टिके रहना मुश्किल हो सकता है. भुगतान में देरी, बढ़ती लागत और घटती सप्लाई ये तीनों मिलकर इंडस्ट्री पर आर्थिक दबाव बढ़ा रहे हैं.

बीकानेर से माल समुद्र के रास्ते ईरान, इराक, ओमान, यूएई, कतर और बहरीन जैसे कई देशों के साथ-साथ ब्रिटेन, जर्मनी, फ्रांस, इटली और स्पेन सहित यूरोपीय देशों को भेजा जाता है. व्यापारियों ने चेतावनी दी है कि यदि स्थिति बनी रहती है, तो इसका शहर की निर्यात-आधारित अर्थव्यवस्था पर महत्वपूर्ण प्रभाव पड़ सकता है.

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