150 डॉलर तक पहुंच सकता है कच्चा तेल! एविएशन, लॉजिस्टिक्स और केमिकल सेक्टर पर बढ़ेगा दबाव, निवेशक रहें सतर्क
वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने कच्चे तेल के बाजार को हिला दिया है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि अगर सप्लाई बाधित हुई तो तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. इसका असर सिर्फ वैश्विक अर्थव्यवस्था ही नहीं बल्कि कई सेक्टरों और निवेशकों की रणनीति पर भी पड़ सकता है.
oil price impact on India: वेस्ट एशिया में बढ़ते सैन्य तनाव ने वैश्विक तेल बाजार को झकझोर दिया है. इजराइल, अमेरिका और ईरान के बीच जारी हमलों के कारण कच्चे तेल की सप्लाई को लेकर चिंता तेज हो गई है. कतर के ऊर्जा मंत्री साद अल-काबी ने फाइनेंशियल टाइम्स से बातचीत के दौरान चेतावनी दी है कि अगर यह संघर्ष लंबा चला और खाड़ी क्षेत्र से तेल की सप्लाई बाधित हुई तो कच्चे तेल की कीमत 150 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच सकती है. विशेषज्ञों का मानना है कि ऐसा हुआ तो इसका सीधा असर दुनिया की अर्थव्यवस्था और भारत जैसे तेल आयातक देशों पर पड़ेगा.
तेल की कीमतों में तेज उछाल
तनाव बढ़ने के बाद अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम तेजी से बढ़े हैं. पिछले हफ्ते तक कच्चा तेल करीब 62 डॉलर प्रति बैरल के आसपास था, लेकिन संघर्ष तेज होने के बाद इसमें बड़ा उछाल आया. ब्रेंट क्रूड शुक्रवार को बढ़कर करीब 92.69 डॉलर प्रति बैरल पर बंद हुआ, जबकि अमेरिकी वेस्ट टेक्सास इंटरमीडिएट (WTI) लगभग 90.90 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया.
ऊर्जा विशेषज्ञों का कहना है कि बाजार को डर है कि अगर खाड़ी क्षेत्र से सप्लाई प्रभावित हुई तो वैश्विक ऊर्जा बाजार में बड़ी कमी पैदा हो सकती है.
होर्मुज जलडमरूमध्य बना बड़ी चिंता
तेल बाजार की सबसे बड़ी चिंता स्ट्रेट ऑफ होरमुज को लेकर है. यह समुद्री मार्ग ईरान और ओमान के बीच स्थित है और दुनिया की करीब 20 प्रतिशत तेल और एलएनजी सप्लाई इसी रास्ते से गुजरती है.
अगर इस रास्ते पर शिपिंग प्रभावित होती है तो कई देशों को तेल की आपूर्ति में बड़ी दिक्कत आ सकती है. यही कारण है कि युद्ध की खबरों से ही बाजार में अस्थिरता बढ़ गई है.
भारत पर क्यों पड़ेगा बड़ा असर
भारत दुनिया के सबसे बड़े तेल आयातकों में से एक है और अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा विदेशों से खरीदता है. भारत के कुल तेल आयात का लगभग आधा हिस्सा इसी होर्मुज मार्ग से आता है. रोजाना करीब 26 लाख बैरल तेल इसी रास्ते से भारत पहुंचता है.
इसके अलावा भारत के करीब 55 प्रतिशत कच्चे तेल की आपूर्ति वेस्ट एशिया से होती है. यही नहीं, इस क्षेत्र से भारत को बड़ी मात्रा में रेमिटेंस भी मिलती है और करीब 17 प्रतिशत भारतीय निर्यात भी इसी क्षेत्र में जाता है. ऐसे में अगर संघर्ष बढ़ता है तो इसका असर भारत की अर्थव्यवस्था पर भी पड़ सकता है.
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शेयर बाजार पर दिख सकता है दबाव
तेल की कीमतों में तेज उछाल का असर शेयर बाजार पर भी पड़ सकता है. महंगा तेल कंपनियों की लागत बढ़ाता है, जिससे मुनाफा कम हो सकता है और उपभोक्ताओं की खर्च करने की क्षमता भी घटती है.
विशेषज्ञों के मुताबिक अगर कच्चा तेल 150 डॉलर के करीब पहुंचता है तो बाजार में जोखिम से बचने का माहौल बन सकता है. खास तौर पर एविएशन, पेंट, केमिकल और लॉजिस्टिक्स जैसे सेक्टर पर ज्यादा दबाव देखने को मिल सकता है.
