Sport City Meerut: 3 लाख रोजगार, 35 हजार यूनिट्स, 40% एक्सपोर्ट हिस्सेदारी… ट्रंप टैरिफ ने बिगाड़ा मिजाज, अब बजट पर नजर
देश का एक औद्योगिक क्लस्टर, जो दुनिया भर में अपनी कारीगरी और निर्यात क्षमता के लिए जाना जाता है, इन दिनों वैश्विक व्यापार में बदलते समीकरणों से दबाव महसूस कर रहा है. करोड़ों का कारोबार, लाखों रोजगार और विदेशी बाजारों पर निर्भर यह इंडस्ट्री अब सरकार के आगामी फैसलों की ओर उम्मीद भरी नजरों से देख रही है.
Meerut sports goods industry: उत्तर प्रदेश का मेरठ जिला भारत के उन गिने-चुने औद्योगिक क्लस्टर्स में शामिल है जिनका नाम दुनिया के बड़े खेल बाजारों में लिया जाता है. खेल सामान निर्माण के क्षेत्र में मेरठ ने अपनी मेहनत, कारीगरी और निरंतर गुणवत्ता के दम पर अंतरराष्ट्रीय पहचान बनाई है. यही वजह है कि यह जिला ‘Sports City Of India’ के नाम से प्रसिद्ध है.
सालाना करीब 1,500 करोड़ रुपये का कारोबार और देश के कुल खेल सामान निर्यात में 40 फीसदी से ज्यादा हिस्सेदारी, मेरठ की ताकत को साफ दिखाती है.
35 हजार यूनिट्स, 3 लाख से ज्यादा रोजगार
मेरठ में छोटे-बड़े मिलाकर करीब 35,200 खेल सामान निर्माण इकाइयां सक्रिय हैं. इनमें से लगभग 9,800 इकाइयां रजिस्टर्ड हैं और करीब 3,700 MSME के दायरे में आती हैं. इस पूरे इकोसिस्टम से 3 लाख से ज्यादा लोग जुड़े हुए हैं, जिनमें कारीगर, महिलाएं, कुशल और अर्ध-कुशल श्रमिक शामिल हैं.
क्रिकेट बैट, हॉकी स्टिक, इनफ्लेटेबल बॉल, जिम इक्विपमेंट और खासतौर पर कश्मीर विलो क्रिकेट बैट, मेरठ की पहचान बन चुके हैं. ये उत्पाद अमेरिका, ब्रिटेन, जर्मनी और फ्रांस जैसे देशों में निर्यात किए जाते हैं.
कश्मीर विलो बैट, मेरठ की खास पहचान
मेरठ में कश्मीर विलो क्रिकेट बैट की एक बड़ी और संगठित इंडस्ट्री मौजूद है. यहां बने बैट देश ही नहीं, बल्कि विदेशी बाजारों में भी लोकप्रिय हैं. स्थानीय उद्यमियों ने तकनीक और कारीगरी के मेल से इस सेगमेंट में मजबूत पकड़ बनाई है, जिससे क्रिकेट इक्विपमेंट के वैश्विक सप्लाई चेन में मेरठ की भूमिका और मजबूत हुई है.
ट्रंप के रेसिप्रोकल टैरिफ से बढ़ी चिंता
हाल के समय में अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा रेसिप्रोकल टैरिफ लागू किए जाने की घोषणा ने वैश्विक व्यापार को असहज कर दिया है. जालंधर के बाद देश की दूसरी बड़ी खेल सामान इंडस्ट्री मेरठ भी इससे प्रभावित होती दिख रही है. निर्यातकों का कहना है कि यदि यह अतिरिक्त टैरिफ लंबे समय तक लागू रहता है, तो मेरठ से होने वाले कुल निर्यात का 21 से 25 फीसदी हिस्सा प्रभावित हो सकता है. इसका सीधा असर कारोबार के साथ-साथ रोजगार पर भी पड़ेगा, क्योंकि यह सेक्टर बड़े पैमाने पर एमएसएमई और श्रम आधारित इकाइयों पर टिका है.
बजट से राहत की उम्मीद
अब नजरें 1 फरवरी को पेश होने वाले केंद्रीय बजट पर टिकी हैं. उद्योग से जुड़े लोग सरकार से निर्यात प्रोत्साहन योजनाओं को मजबूत करने, एमएसएमई को सस्ता कर्ज, कच्चे माल पर टैक्स राहत और टेक्नोलॉजी अपग्रेडेशन के लिए विशेष पैकेज की मांग कर रहे हैं. बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि यदि बजट में खेल सामान उद्योग को सेक्टर-विशेष राहत दी जाती है, तो वैश्विक अनिश्चितताओं के बावजूद मेरठ का यह क्लस्टर अपनी प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त बनाए रख सकता है.