RBI MPC 2026: ब्याज दरों में कोई बदलाव नहीं, रेपो रेट 5.25% पर बरकरार, EMI पर राहत नहीं
RBI की मौद्रिक नीति समिति ने फरवरी बैठक में रेपो रेट 5.25% पर स्थिर रखने का फैसला लिया, जिससे लोन और ईएमआई पर फिलहाल कोई राहत नहीं मिलेगी. हालांकि पिछले एक साल में चार बार दरों में कटौती हो चुकी है, लेकिन इस बार आरबीआई ने महंगाई और वैश्विक अनिश्चितताओं को देखते हुए जस का तस बनाए रखने का विकल्प चुना.
RBI MPC Meeting 2026: केंद्रीय बजट और यूएस ट्रेड डील की खबर के बाद लोगों की निगाहें RBI के ब्याज दरों की घोषणा पर टिकी हुई थी. रिजर्व बैंक ऑफ इंडिया के गवर्नर संजय मल्होत्रा ने 6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक में लिए गए फैसले की घोषणा की. इसमें रेपो रेट में कोई भी बदलाव न करने का फैसला लिया गया है. यानी रेपो रेट 5.25% पर बरकरार रहेगी. इससे लोगों को EMI में कोई राहत नहीं मिली है.
तीन दिन चली बैठक
6 सदस्यीय मौद्रिक नीति समिति (MPC) की बैठक 4 फरवरी से शुरू हुई थी, जिसके नतीजों की घोषणा आज यानी 6 फरवरी को की गई. तीन दिनों की इस बैठक में ब्याज दर नीति की आगे की दिशा पर विचार-विमर्श किया गया. यह बैठक वैश्विक और घरेलू दोनों परिस्थितियों के लिहाज से काफी अहम मानी जा रही थी. साल 2026 की यह आरबीआई की पहली एमपीसी बैठक है. जिसमें देश की आर्थिक दिशा तय की गई.
चार बार रेट हुए हैं कट
पिछले साल फरवरी से अब तक समिति ने चार बार रेपो रेट में कटौती की है. दिसंबर की नीति समीक्षा के बाद रेपो रेट 6.25% से घटकर 5.25% पर आ गया था.
क्या है SDF और MSF रेट?
आरबीआई की मौद्रिक नीति समिति (MPC) ने तीन दिन की बैठक में पॉलिसी रेपो रेट पर विस्तार से चर्चा की और मौजूदा आर्थिक हालात व भविष्य के आउटलुक का आंकलन किया. इसके बाद समिति ने सर्वसम्मति से रेपो रेट को जस का तस रखने का फैसला किया. साथ ही आरबीआई गवर्नर संजय मल्होत्रा ने बताया कि एसडीएफ दर 5% और एमएसएफ व बैंक रेट 5.5% पर बरकरार रहेंगे.
गवर्नर ने कहा कि बढ़ते भू-राजनीतिक तनाव और व्यापारिक टकराव वैश्विक अर्थव्यवस्था के मौजूदा ढांचे को प्रभावित कर रहे हैं. अलग-अलग देशों में महंगाई के नतीजे भी अलग हैं और ज्यादातर विकसित अर्थव्यवस्थाओं में यह अभी लक्ष्य से ऊपर बनी हुई है. इसी वजह से दुनिया भर के केंद्रीय बैंक अपनी मौद्रिक नीतियों में अलग-अलग रुख अपना रहे हैं और कई बैंक अपने easing cycle के अंतिम चरण में पहुंच चुके हैं.
काबू में रही मंहगाई दर
आरबीआई के गवर्नर ने कहा कि नवंबर और दिसंबर के दौरान हेडलाइन महंगाई दर आरबीआई के तय टॉलरेंस बैंड के भीतर बनी रही यानी काबू में रही. हालांकि अगले वित्त वर्ष की पहली दो तिमाहियों के लिए CPI महंगाई का अनुमान थोड़ा बढ़ाया गया है, जिसमें Q1 के लिए 4% और Q2 के लिए 4.2% का संशोधित आकलन किया गया है.
GDP ग्रोथ का क्या है अनुमान?
आरबीआई गवर्नर का कहना है कि वैश्विक चुनौतियों के बावजूद भारतीय अर्थव्यवस्था लगातार स्थिर और बेहतर दिशा में आगे बढ़ रही है. चालू वर्ष में वास्तविक जीडीपी ग्रोथ 7.4% रहने का अनुमान है, जो पिछले साल के मुकाबले ज्यादा है. प्राइवेट खपत और फिक्स्ड निवेश ने ग्रोथ को मजबूत सहारा दिया है. हालांकि बाहरी मांग कमजोर रही और आयात, निर्यात से ज्यादा रहे, जिससे नेट एक्सपोर्ट पर दबाव बना. सप्लाई साइड पर सर्विस सेक्टर के मजबूत प्रदर्शन और मैन्युफैक्चरिंग में सुधार के चलते रियल जीवीए ग्रोथ इस साल 7.3% रहने का अनुमान है.
Latest Stories
फ्लाइट से करते हैं यात्रा, तो चेक करें यह लिस्ट; 377 विमानों में बार-बार खराबी की शिकायतें, इस कंपनी के सबसे ज्यादा
Gold Silver Rate Today 06-02-2026: सोना-चांदी में बिकवाली हावी, MCX पर गोल्ड 2% तो सिल्वर 6% टूटा, डॉलर की मजबूती से बढ़ा दबाव
रक्षा मंत्रालय की अगले हफ्ते 114 राफेल फाइटर जेट की मेगा डील पर बैठक, स्वदेशी डिफेंस मैन्युफैक्चरिंग को बढ़ावा मिलने की उम्मीद
जॉब मार्केट में आया बड़ा बदलाव, नौकरी बदलने पर 30 फीसद तक बढ़ सकती है सैलरी; रिपोर्ट
