खाड़ी क्षेत्र में 38 भारतीय जहाज फंसे, हफ्ते भर में 36% तक उछला क्रूड; स्ट्रेट ऑफ होर्मुज तनाव ने बढ़ाई टेंशन

ईरान की ओर से स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही रोकने की चेतावनी के बाद ग्लोबल एनर्जी मार्केट में हलचल बढ़ गई है. इस अहम समुद्री मार्ग से तेल और LNG की सप्लाई प्रभावित होने का खतरा पैदा हो गया है, जिसका सबसे बड़ा असर भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे एशियाई आयातक देशों पर पड़ सकता है.

स्ट्रेट ऑफ हार्मुज और क्रूड ऑयल Image Credit: @Money9live

Strait of Hormuz and Crude Oil Surge: मिडिल ईस्ट में बढ़ते जियो पॉलिटिकल टेंशन का असर अब ग्लोबल एनर्जी मार्केट के साथ-साथ एशियाई अर्थव्यवस्थाओं पर भी साफ दिखाई देने लगा है. ईरान की ओर से रणनीतिक रूप से बेहद अहम स्ट्रेट ऑफ होर्मुज में जहाजों की आवाजाही पर रोक लगाने की चेतावनी के बाद एनर्जी सप्लाई को लेकर गंभीर चिंताएं पैदा हो गई हैं. यह समुद्री मार्ग दुनिया के सबसे अहम तेल ट्रांजिट पॉइंट्स में से एक माना जाता है और यहां किसी भी तरह की बाधा का असर सीधे उन देशों पर पड़ता है जो बड़ी मात्रा में मिडिल ईस्ट से तेल और गैस आयात करते हैं.

एशियाई देशों पर दिख सकता है गंभीर असर

रिपोर्ट्स के मुताबिक 28 फरवरी को इस जलमार्ग से गुजर रहे जहाजों को अंतरराष्ट्रीय समुद्री इमरजेंसी चैनल VHF-16 पर एक संदेश मिला, जिसमें कहा गया कि अगले आदेश तक इस रास्ते से सभी जहाजों की आवाजाही रोक दी जाए. यह संदेश ईरान के रिवोल्यूशनरी गार्ड कॉर्प्स नेवी से जुड़ा बताया गया, जिसके बाद वैश्विक शिपिंग कंपनियों, बीमा कंपनियों और एनर्जी मार्केट में तुरंत चिंता बढ़ गई. विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह स्थिति लंबे समय तक बनी रहती है तो खासकर एशियाई देशों की ऊर्जा सुरक्षा पर गंभीर असर पड़ सकता है.

बड़ी संख्या में फंसे हुए हैं जहाज

तनाव बढ़ने के बाद स्थिति का असर समुद्री यातायात पर भी साफ दिखने लगा है. बिजनेस टुडे की एक रिपोर्ट के मुताबिक, 200 से ज्यादा जहाज फारस की खाड़ी के अंदर फंसे हुए हैं, जबकि करीब 150 से ज्यादा जहाज जलडमरूमध्य के बाहर इंतजार कर रहे हैं. कई तेल टैंकरों की आवाजाही भी प्रभावित हुई है क्योंकि शिपिंग कंपनियां और बीमा कंपनियां जोखिम का दोबारा आकलन कर रही हैं. जानकारी के मुताबिक इस क्षेत्र में करीब 38 भारतीय जहाज भी फंसे हुए हैं, जबकि एशिया की ओर जा रहे कई क्रूड ऑयल कार्गो, जिनमें भारत के लिए भेजे जा रहे रूसी तेल के टैंकर भी शामिल हैं, अपनी यात्रा पूरी नहीं कर पा रहे हैं.

हफ्ते भर में 36 फीसदी उछले क्रूड ऑयल

एनर्जी सप्लाई में संभावित व्यवधान का असर तेल की कीमतों पर भी तेजी से देखने को मिला है. ऐतिहासिक आंकड़ों के अनुसार हाल के दिनों में कच्चे तेल की कीमतों में जो उतार-चढ़ाव आया है, वह पिछले कई वर्षों में सबसे तेज साप्ताहिक उछालों में से एक माना जा रहा है. WTI क्रूड ऑयल एक ही सप्ताह में लगभग 36 फीसदी उछलकर करीब 91 डॉलर प्रति बैरल तक पहुंच गया, जो 2020 के तेल बाजार में आई बड़ी गिरावट के बाद की सबसे तेज बढ़ोतरी में से एक है. आम तौर पर इस तरह के तेज उछाल युद्ध, जियो पॉलिटिकल टेंशन या सप्लाई शॉक जैसी स्थितियों में ही देखने को मिलते हैं.

क्यों इतना खास है ये स्ट्रेट?

दरअसल स्ट्रेट ऑफ होर्मुज दुनिया के सबसे अहम ऊर्जा चेकपॉइंट्स में से एक है, जहां से वैश्विक तेल व्यापार का लगभग पांचवां हिस्सा गुजरता है. इसके अलावा बड़ी मात्रा में लिक्विफाइड नेचुरल गैस (LNG) की सप्लाई भी इसी रास्ते से होती है. यह जलमार्ग फारस की खाड़ी को ओमान की खाड़ी और अरब सागर से जोड़ता है और इसकी चौड़ाई कई जगहों पर बेहद कम है, जिससे जहाजों की आवाजाही सीमित मार्गों से ही संभव होती है. ऐसे में यहां किसी भी तरह की रुकावट ग्लोबल एनर्जी सप्लाई पर बड़ा असर डाल सकती है.

एशियाई देशों पर टूटा पहाड़!

भारत, चीन, जापान और दक्षिण कोरिया जैसे देश ऊर्जा जरूरतों के लिए मिडिल ईस्ट पर काफी हद तक निर्भर हैं. भारत अपनी कुल जरूरत का 80 फीसदी से ज्यादा कच्चा तेल आयात करता है, जबकि जापान और दक्षिण कोरिया भी बड़ी मात्रा में खाड़ी देशों से ऊर्जा खरीदते हैं. चीन, जो दुनिया का सबसे बड़ा क्रूड आयातक है, उसकी भी तेल आपूर्ति का बड़ा हिस्सा इसी क्षेत्र से होकर गुजरता है. एनर्जी मार्केट से जुड़े कारोबारियों का कहना है कि इस संकट ने पहले ही कार्गो शेड्यूल को प्रभावित करना शुरू कर दिया है. कई जहाज फिलहाल खाड़ी क्षेत्र में प्रवेश करने से बच रहे हैं क्योंकि बीमा प्रीमियम और सुरक्षा जोखिम तेजी से बढ़ गए हैं. शिपिंग और बीमा लागत में बढ़ोतरी का सीधा असर एशियाई देशों द्वारा खरीदे जाने वाले तेल की कीमत पर पड़ता है, जिससे आयात बिल बढ़ सकता है और महंगाई का दबाव भी बढ़ने की आशंका रहती है.

ये भी पढ़ें- $90 के पार पहुंचा क्रूड ऑयल, $100 का खतरा कितना बड़ा? जानें भारत के लिए क्यों है ये बुरी खबर, कहां पड़ेगा ज्यादा असर