ट्रंप के एक साल में बदला अमेरिका, यूनिवर्सिटी में भारतीय छात्रों की संख्या 75% गिरी, 8000 वीजा भी रद्द

अमेरिका पढ़ाई और नौकरी के लिए जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अब पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा. विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों का नामांकन तेजी से गिरा है. जो छात्र पहले से अमेरिका में थे, उन्हें भी वीजा रद्द होने और देश छोड़ने के नोटिस मिले.

इंडिया-अमेरिका Image Credit: @Canva/Money9live

डोनाल्ड ट्रंप के राष्ट्रपति बनने का एक साल पूरा हो चुका है, लेकिन भारतीय छात्रों और पेशेवरों के लिए अमेरिका पहले जैसा सुरक्षित और स्थिर नहीं रह गया है. कभी अवसरों की धरती कहे जाने वाले अमेरिका में अब डर, अनिश्चितता और कड़े नियम रोजमर्रा की सच्चाई बन गए हैं. खासकर भारतीय छात्र, IT पेशेवर और ग्रीन कार्ड धारक लगातार बदलते आव्रजन नियमों के बीच असमंजस में जी रहे हैं. वीजा नियमों में अचानक बदलाव, बढ़ती जांच, नौकरी पर संकट और संभावित निर्वासन ने हजारों परिवारों की नींद उड़ा दी है.

अमेरिका पढ़ाई और नौकरी के लिए जाने का सपना देखने वाले युवाओं के लिए अब पहले जैसा आकर्षक नहीं रहा. विश्वविद्यालयों में भारतीय छात्रों का नामांकन तेजी से गिरा है. जो छात्र पहले से अमेरिका में थे, उन्हें भी वीजा रद्द होने और देश छोड़ने के नोटिस मिले. वहीं एच-1बी वीजा पर काम कर रहे पेशेवर भारी फीस और नौकरी के खतरे से जूझ रहे हैं. कई लोग वर्षों से अमेरिका में रहने के बाद भी खुद को असुरक्षित महसूस कर रहे हैं. भारतीय दूतावासों में मदद मांगने वालों की संख्या बढ़ी है.

अमेरिकी कैंपस में भारतीय छात्रों की बड़ी गिरावट

ट्रंप सरकार के कड़े नियमों का पहला असर अमेरिकी विश्वविद्यालयों पर दिखा. साल 2025 के फॉल सेमेस्टर में भारतीय छात्रों का नामांकन 70 से 75 प्रतिशत तक गिर गया. वीजा इंटरव्यू स्लॉट बेहद कम हो गए, जिससे कई छात्रों को अपनी योजना टालनी पड़ी. केवल वही छात्र आगे बढ़ सके जिन्होंने फरवरी या मार्च तक आवेदन पूरा कर लिया था. यह दशकों में पहली बार था जब इतनी बड़ी गिरावट देखी गई. वीजा रिजेक्शन बढ़ने और जांच कड़ी होने से छात्रों का भरोसा टूटा. स्प्रिंग सेमेस्टर में भी स्थिति नहीं सुधरी.

हजारों छात्र वीजा रद्द

अमेरिका में पढ़ रहे छात्रों के लिए हालात और कठिन रहे. दिसंबर 2025 तक करीब 8,000 छात्र वीजा रद्द कर दिए गए. कई छात्रों को अचानक ईमेल मिला कि उनका एफ-1 स्टेटस खत्म कर दिया गया है और उन्हें देश छोड़ना होगा. कुछ मामलों में पुराने, पहले ही निपटे मामलों को आधार बनाया गया. एक छात्र ने बताया कि सिर्फ ओवरस्पीडिंग टिकट के कारण उसका वीजा रद्द हो गया, जिसे बाद में वकील की मदद से बहाल किया गया. लेकिन डर कायम रहा.

H-1बी पर भारी बोझ और बढ़ता खतरा

H-1बी वीजा धारकों पर भी दबाव बढ़ा. सरकार ने 100000 डॉलर की नई फीस का प्रस्ताव रखा, जिससे कंपनियां और कर्मचारी घबरा गए. लगभग 72 प्रतिशत H-1बी धारक भारतीय हैं, ज्यादातर IT सेक्टर में काम करते हैं. कंपनियों ने नौकरी ऑफर रोकना, वीजा ट्रांसफर फ्रीज करना और कई मामलों में ऑफर रद्द करना शुरू कर दिया. कई युवा पेशेवरों के सपने टूट गए.

रिकॉर्ड निर्वासन और कड़ी निगरानी

पिछले एक साल में लगभग एक लाख वीजा रद्द हुए और करीब 3,800 लोगों को निर्वासित किया गया, जिनमें कई भारतीय थे. सबसे ज्यादा निष्कासन वाशिंगटन DC और ह्यूस्टन से हुए. साथ ही नए नियमों के तहत वीजा आवेदकों को अपने सोशल मीडिया अकाउंट सार्वजनिक रखने को कहा गया. रोजगार अनुमति दस्तावेज की स्वचालित अवधि भी खत्म कर दी गई, जिससे कई लोग अचानक बेरोजगार हो गए.

मदद की गुहार और बढ़ती शिकायतें

इस डर के माहौल में भारतीय दूतावासों में शिकायतें बढ़ गईं. साल भर में 620 से ज्यादा शिकायतें दर्ज हुईं. लोग दस्तावेज जांच, वीजा स्टेटस और काम करने की अनुमति को लेकर मदद मांग रहे हैं. साल 2026 से 250 डॉलर अतिरिक्त फीस लागू होगी. सोशल मीडिया की कड़ी जांच होगी. visa renewal सिर्फ चुनिंदा शहरों में होगा. ऑन-कैंपस नौकरी और ओपीटी पर सख्ती बढ़ेगी. कार्यस्थल निरीक्षण बढ़ेंगे. H-1बी प्रायोजक कंपनियों पर भारी लागत आएगी.

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