भारत से इंपोर्ट हो रहे सोलर पैनल पर अमेरिका की पैनी नजर, चीन से कनेक्शन का लगाया आरोप; जानें पूरा मामला

अमेरिका ने भारत, लाओस और इंडोनेशिया से आने वाले सोलर पैनल इंपोर्ट पर जांच शुरू कर दी है, जिससे 1.6 बिलियन डॉलर के भारतीय सोलर निर्यात इंडस्ट्री को खतरा हो सकता है. अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन का कहना है कि चीनी कंपनियां इन देशों के जरिये टैरिफ से बचकर सस्ते पैनल भेज रही हैं.

अमेरिका ने भारत से आने वाले सोलर पैनल इंपोर्ट पर जांच शुरू कर दी है. Image Credit: CANVA

US Tariff Indian Solar Export: अमेरिका ने भारत समेत लाओस और इंडोनेशिया से आने वाले सोलर पैनल इंपोर्ट पर जांच शुरू कर दी है. यह कदम इसलिए उठाया गया है ताकि यह पता लगाया जा सके कि क्या चीनी कंपनियां इन देशों के जरिये अमेरिकी बाजार में सस्ते पैनल भेजकर पहले से लगे टैरिफ से बच रही हैं. इस जांच का असर सीधे भारत के 1.6 अरब डॉलर के तेजी से बढ़ते सोलर एक्सपोर्ट इंडस्ट्री पर पड़ सकता है. अमेरिका और भारत के बीच व्यापारिक तनाव पहले से ही बढ़ा हुआ है और अब यह मामला रिश्तों को और खराब बना सकता है.

अमेरिकी सोलर मैन्युफैक्चरर की शिकायत

अमेरिकी सोलर कंपनियों का दावा है कि चीन समर्थित फर्म भारत और अन्य देशों के जरिये अमेरिकी बाजार में सस्ते पैनल भेज रही हैं. इससे अमेरिकी कंपनियों का प्रोडक्शन प्रभावित हो रहा है और अरबों डॉलर के ग्रीन एनर्जी इंवेस्टमेंट पर असर पड़ रहा है. अमेरिकी इंटरनेशनल ट्रेड कमीशन ने सर्वसम्मति से इस जांच को आगे बढ़ाने की मंजूरी दी है.

भारत पर बड़ा असर

भारत सोलर मैन्युफैक्चरिंग में निवेश आकर्षित करने और एक्सपोर्ट बढ़ाने की कोशिश कर रहा है. पिछले साल भारत से अमेरिका को सोलर एक्सपोर्ट अचानक बढ़कर 1.6 अरब डॉलर पहुंच गया जबकि 2022 में यह केवल 289 मिलियन डॉलर था. अब जांच के बाद अगर नए टैरिफ लगाए जाते हैं तो भारत के लिए यह बड़ा झटका होगा.

कब तक होगी जांच

अब अमेरिकी वाणिज्य विभाग समानांतर जांच करेगा. इसमें शुरुआती फैसला 10 अक्टूबर तक आ सकता है और डंपिंग से जुड़ा अंतिम फैसला 24 दिसंबर तक होने की उम्मीद है. यदि भारत के खिलाफ आरोप साबित होते हैं तो उस पर एंटी डंपिंग और एंटी सब्सिडी ड्यूटी लगाई जा सकती है.

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इंडो पैसिफिक में व्यापार पर असर

इस जांच के नतीजे अमेरिका के सोलर डेवेलपर्स की सोर्सिंग रणनीति को बदल सकते हैं. भारत के लिए यह चुनौती ऐसे समय आई है जब वह मेक इन इंडिया अभियान के तहत ग्लोबल सोलर निवेश को आकर्षित करने की कोशिश कर रहा है. इसका असर केवल भारत पर ही नहीं बल्कि पूरे इंडो पैसिफिक क्षेत्र के व्यापारिक समीकरणों पर पड़ सकता है.