Pak को पानी पिलाने वाला S-400 के लिए 288 मिसाइलें खरीदेगा भारत, लागत ₹10000 करोड़, Pantsir सिस्टम से बनेगी दोहरी सुरक्षा
रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद ने रूस से 288 S-400 मिसाइलें खरीदने को मंजूरी दे दी है. करीब ₹10,000 करोड़ की इस डील का मकसद ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान इस्तेमाल हुए भंडार को फिर से भरना और देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाना है. यह खरीद फास्ट ट्रैक प्रक्रिया के तहत की जाएगी.
S-400 Missiles Acquisition: भारत सरकार ने देश की हवाई सुरक्षा को और मजबूत बनाने के लिए रूस से 288 S-400 मिसाइलें खरीदने को मंजूरी दे दी है. रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह की अध्यक्षता में रक्षा अधिग्रहण परिषद यानी DAC ने करीब ₹10,000 करोड़ की इस खरीद को स्वीकृति दी है. ये मिसाइलें Operation SINDOOR के दौरान इस्तेमाल हुए भंडार को फिर से भरने और भविष्य की जरूरतों को ध्यान में रखकर खरीदी जा रही हैं.
रूस से 288 S-400 मिसाइलों की खरीद को हरी झंडी
हिंदुस्तान टाइम्स की एक रिपोर्ट के अनुसार, Defence Acquisition Council (DAC) ने 288 मिसाइलों की खरीद के लिए ‘एक्सेप्टेंस ऑफ नेसेसिटी’ (AoN) दी है. इनमें 120 कम दूरी और 168 लंबी दूरी की मिसाइलें शामिल हैं. यह सौदा फास्ट ट्रैक प्रक्रिया (FTP) के तहत किया जाएगा, ताकि मिसाइलें जल्दी मिल सकें. इन मिसाइलों की कुल लागत लगभग ₹10,000 करोड़ बताई जा रही है.
S-400 और Pantsir से बनेगी दोहरी सुरक्षा ढाल
Indian Air Force ने रूस से पांच और S-400 सिस्टम खरीदने का प्रस्ताव भी रखा है. इसके साथ ही Pantsir शॉर्ट-रेंज एयर डिफेंस सिस्टम लेने पर भी विचार हो रहा है. S-400 लंबी दूरी तक दुश्मन के लड़ाकू विमान, ड्रोन और मिसाइलों को मार गिराने में सक्षम है. वहीं Pantsir-S1 कम दूरी की हवाई खतरों से सुरक्षा देता है. दोनों मिलकर दो-स्तरीय हवाई रक्षा प्रणाली तैयार करेंगे.
ऑपरेशन सिंदूर में हुआ था बड़ा इस्तेमाल
मई 2025 में हुए ‘ऑपरेशन सिंदूर’ के दौरान S-400 सिस्टम का व्यापक उपयोग किया गया था. इस दौरान 400 किमी, 200 किमी, 150 किमी और 40 किमी रेंज की मिसाइलों का इस्तेमाल कर दुश्मन के लड़ाकू विमान, निगरानी विमान और सशस्त्र ड्रोन को निशाना बनाया गया. भारत ने 314 किमी दूर पाकिस्तान के पंजाब क्षेत्र में एक बड़े विमान को भी S-400 मिसाइल से मार गिराया था. इसके बाद पाकिस्तान ने अपने कई विमान पश्चिमी इलाकों की ओर हटा दिए थे.
क्या है खरीद की प्रक्रिया?
भारत में रक्षा खरीद एक तय प्रक्रिया के तहत होती है. पहले सेना की जरूरत का प्रस्ताव तैयार होता है, फिर रक्षा खरीद बोर्ड से होकर मामला DAC तक पहुंचता है. AoN मिलने के बाद लागत पर बातचीत और अंत में कैबिनेट कमेटी ऑन सिक्योरिटी (CCS) की मंजूरी ली जाती है. हाल ही में DAC ने वायुसेना के लिए मल्टी-रोल फाइटर एयरक्राफ्ट (MRFA), राफेल विमान, कॉम्बैट मिसाइल और हाई एल्टीट्यूड स्यूडो सैटेलाइट की खरीद को भी मंजूरी दी है. थलसेना और नौसेना के लिए भी कई अहम प्रस्तावों को स्वीकृति मिली है. इन फैसलों से भारत की सैन्य ताकत और हवाई सुरक्षा क्षमता में बड़ा इजाफा होने की उम्मीद है.
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