सिंधु नदी का नाम कैसे पड़ा, इस आदिवासी से है नाता; इन 7 नदियों का है गजब कनेक्शन

भारत सरकार आतंकवाद पर प्रहार करने और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है. इसी कड़ी में भारत इंडस वाटर ट्रीटी को रद्द कर दिया है. ऐसे में आइए जानते है कि सिंधु का कैसे पड़ा. इसके पीछे क्या कारण है. साथ ही इसे अलग-अलग देशों में किस नाम से जाना है आइए विस्तार से जानते है.

सिंधु नदी का नाम कैसे पड़ा Image Credit: Money 9

How did the Indus river get its name: जम्मू-कश्मीर के पहलगाम में हुए आतंकी हमले ने पाकिस्तान की पोल खोल दी है. भारत सरकार आतंकवाद पर प्रहार करने और पाकिस्तान को सबक सिखाने के लिए लगातार बड़े फैसले ले रही है. इसी कड़ी में भारत इंडस वाटर ट्रीटी को रद्द कर दिया है. ऐसे में आइए जानते है कि सिंधु का नाम कैसे पड़ा. इसके पीछे क्या कारण है. साथ ही इसे अलग-अलग देशों में किस नाम से जाना है आइए विस्तार से जानते है.

ऋग्वेद से आया ये नाम

सिंधु नदी का पारंपरिक नाम ‘सिंधु’ तिब्बती और संस्कृत भाषा से आया है. यह नाम बहुत पुराना है और प्राचीन भारत के इतिहास से जुड़ा है. ऋग्वेद में इस नदी का जिक्र मिलता है. ऋग्वेद भारत की सबसे पुराने और पवित्र ग्रंथों में से एक है. सिंधु नदी इतनी महत्वपूर्ण थी कि इससे हमारे देश का नाम ‘भारत’ पड़ा. अंग्रेजी शब्द ‘Indus’ भी इसी सिंधु से आया है. यह शब्द लैटिन और ग्रीक भाषाओं से होकर आया. यह पुराने फारसी शब्द ‘हिंदु’ से लिया गया था. फारसी में ‘हिंदु’ का मतलब था वह इलाका जो सिंधु नदी के आसपास था. इस तरह, सिंधु नदी न सिर्फ भारत के इतिहास और संस्कृति का हिस्सा है. बल्कि यह दुनिया भर में भारत की पहचान से भी जुड़ी है.

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इंडस नाम के पीछे की कहानी

सिंधु नदी तिब्बत से निकल के पाकिस्तान वाले एरिया से अरब सागर में गिरती है. पीर पंजाल रेंज से झेलम नदी निकलती है. बारालाचा ला दर्रा से चिनाब नदी निकलती है और ये दोनों आपस में मिल जाती हैं. हिमाचल प्रदेश से रावी नदी निकलती है. हिमाचल प्रदेश में रोहतांग दर्रे के पास कुल्लू की पहाड़ियां से व्यास नदी निकलती है. तिब्बत में राक्षसताल झील के पश्चिम से सतलुज निकलती है और हर-की-दून ग्लेशियर उत्तराखंड के गढ़वाल से सरस्वती नदी निकलती है.

ये टोटल मिलकर सात नदियां हैं. ये सातों नदियां सिंधु में जाकर मिलती है. यहां पे सात नदियां हैं और सिंधु को मेन नदी माना गया तो इस एरिया को सप्तसिंधु कहा जाने लगा. यहां पर एक ट्राइब रहती थी. इस ट्राईब का नाम भारत था. इस ट्राइब के राजा का नाम सुदास था. उनके साथ दिक्कत ये थी कि वो ‘S’ को ‘H’ की तरह बोलते थे. इसलिए पूरे मिडिल ईस्ट में सप्तसिंधु को हप्तहिंधू बोला जाने लगा.

आगे चल के हप्तहिंधू, हिंदू नाम से ज्यादा फेमस होने लगा और इसी हिंदू से कई लोगों ने हिंदुस्तान भी बोला. अब इसके कुछ टाइम बाद हिंदू वर्ड को ग्रीक ने यूज किया. अब उनके साथ दिक्कत यह थी कि वह ‘H’ बोल ही नहीं पाते. उनके अल्फाबेट्स में प्रॉपर यू तक नहीं था. इसलिए हिंदू आगे चल के इंडूज बोला जाने लगा. फिर इंडूज की आगे चल के लैटिन फॉर्म इंडिया बनी बनी.

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