7 दिन में 3 वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, पहाड़ी राज्यों में बारिश-बर्फबारी के आसार; दिल्ली, यूपी और बिहार का जानें मौसम

फरवरी के मध्य में मौसम पूरी तरह स्थिर नहीं रहने वाला है. पहाड़ी राज्यों में बार-बार एक्टिव हो रहे वेस्टर्न डिस्टर्बेंस से बारिश दौर बना रहेगा. वहीं कुछ मैदानी इलाकों में भी इसका हल्का असर देखने को मिल सकता है. ऐसे में पहाड़ों की यात्रा करने वालों और किसानों को मौसम को लेकर सतर्क रहने की जरूरत है.

क्या है मौसम का हाल Image Credit: social media

IMD WEATHER UPDATE: फरवरी के दूसरे हफ्ते में मौसम ने फिर करवट लेनी शुरू कर दी है. पश्चिमी विक्षोभ यानी वेस्टर्न डिस्टर्बेंस एक के बाद एक सक्रिय हो रहे हैं, जिनका सीधा असर पश्चिमी हिमालयी राज्यों पर दिखेगा. 11 फरवरी से शुरू होकर 13 फरवरी और फिर 16–17 फरवरी तक मौसम में उतार-चढ़ाव बना रहने की संभावना है. इसका असर न सिर्फ पहाड़ों में बारिश और बर्फबारी के रूप में दिखेगा, बल्कि कुछ मैदानी इलाकों में भी हल्की बारिश और गरज-चमक देखने को मिल सकती है.

तीन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस, लगातार बिगड़ता मौसम

IMD के मुताबिक पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र में तीन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस तेजी से असर दिखाने वाले हैं. पहला वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 10 फरवरी को एक्टिव हुआ है. दूसरा 13 फरवरी से असर दिखाएगा. वहीं तीसरा वेस्टर्न डिस्टर्बेंस 16 से 17 फरवरी के बीच क्षेत्र को प्रभावित करेगा. इन सिस्टम्स की वजह से जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है.

कहां सामान्य से कम और कहां ज्यादा रहा तापमान

न्यूनतम तापमान सामान्य से 1.6 से 3.0 डिग्री सेल्सियस तक कम उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, पूर्वी मध्य प्रदेश, ओडिशा, गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल, बिहार, कर्नाटक, मराठवाड़ा, विदर्भ, तेलंगाना, तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल, असम और मेघालय, गुजरात क्षेत्र और झारखंड में दर्ज किया गया. इसके उलट पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र, पश्चिम मध्य प्रदेश, राजस्थान, कोंकण और गोवा, केरल और माहे में तापमान सामान्य से 1.6 से 3.1 डिग्री सेल्सियस तक अधिक रहा. देश के बाकी हिस्सों में तापमान लगभग सामान्य के आसपास बना रहा. मैदानी भारत में सबसे कम न्यूनतम तापमान 5.6 डिग्री सेल्सियस पश्चिम राजस्थान के पाली में दर्ज किया गया.

एक्टिव मौसम प्रणालियां क्या कहती हैं

इस समय पंजाब और उससे सटे उत्तर पाकिस्तान पर 3.1 किलोमीटर ऊंचाई पर एक पश्चिमी विक्षोभ साइक्लोनिक सर्कुलेशन के रूप में बना हुआ है, जिसके साथ ऊपरी वायुमंडल में एक ट्रफ भी मौजूद है. इसके अलावा निचले वायुमंडलीय स्तरों पर दक्षिण-पश्चिम राजस्थान और आसपास के इलाकों में प्रेरित साइक्लोनिक सर्कुलेशन सक्रिय है. पूर्वोत्तर भारत के ऊपर सबट्रॉपिकल वेस्टर्ली जेट स्ट्रीम 12.6 किलोमीटर की ऊंचाई पर करीब 125 नॉट्स की रफ्तार से बह रही है. दक्षिण-पूर्व बांग्लादेश और उसके आसपास निचले वायुमंडल में एक और साइक्लोनिक सर्कुलेशन बना हुआ है. साथ ही पूर्वी भूमध्यरेखीय हिंद महासागर और उससे सटे दक्षिण-पूर्व बंगाल की खाड़ी में भी ऊपरी हवा का साइक्लोनिक सर्कुलेशन एक्टिव है.

तीन वेस्टर्न डिस्टर्बेंस का सीधा असर भले ही पश्चिमी हिमालयी इलाकों में दिखेगा, लेकिन इसका अप्रत्यक्ष प्रभाव दिल्ली, उत्तर प्रदेश और बिहार जैसे मैदानी राज्यों में भी महसूस किया जाएगा. मौसम विभाग के मुताबिक, इन राज्यों में फिलहाल भारी बारिश या बर्फबारी की संभावना नहीं जताई गई है, लेकिन वायुमंडलीय बदलाव के चलते मौसम में हल्की हलचल बनी रह सकती है.

कहां-कहां कैसा रहेगा मौसम?

इन सभी मौसम प्रणालियों के असर से 10 फरवरी को जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में अलग-अलग जगहों पर बारिश और बर्फबारी होने की संभावना है. हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में 10 फरवरी को गरज-चमक, बिजली गिरने और 30 से 40 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवाओं के साथ बारिश और बर्फबारी हो सकती है. 13 और 16 फरवरी को भी इन्हीं पहाड़ी इलाकों में अलग-अलग स्थानों पर हल्की बारिश और बर्फबारी की संभावना बनी हुई है. वहीं 16 फरवरी को पंजाब और हरियाणा-चंडीगढ़ में गरज-चमक और बिजली के साथ हल्की बारिश हो सकती है.

आने वाले दिनों में तापमान का अनुमान

पूर्वी भारत में अगले तीन दिनों के दौरान न्यूनतम तापमान में 2 से 3 डिग्री सेल्सियस की धीरे-धीरे बढ़ोतरी होने की संभावना है. इसके बाद तापमान में कोई बड़ा बदलाव नहीं होने के आसार हैं. देश के बाकी हिस्सों में न्यूनतम तापमान में फिलहाल किसी बड़े बदलाव की संभावना नहीं जताई गई है.

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