सरकार का बड़ा फैसला, LIC में 20% FDI को हरी झंडी; जानें निवेशकों और पॉलिसीहोल्डर्स पर क्या होगा असर

केंद्र सरकार ने FDI पॉलिसी में संशोधन कर LIC में 20% तक विदेशी निवेश को ऑटोमैटिक रूट से मंजूरी दे दी है. DPIIT की प्रेस नोट 1 (2026) के तहत यह बदलाव लागू हुआ. साथ ही बीमा कंपनियों में 100% FDI की अनुमति भी दी गई है. LIC को 10% न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने के लिए 2027 तक समय मिला है.

LIC में 20 फीसदी तक विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो गया है Image Credit: TV9

LIC FDI: अब LIC में 20 फीसदी तक विदेशी निवेश का रास्ता साफ हो गया है. केंद्र सरकार ने इसके लिए FDI पॉलिसी में बदलाव किया है.डिपार्टमेंट फॉर प्रमोशन ऑफ इंडस्ट्री एंड इंटरनल ट्रेड ने वर्ष 2026 की प्रेस नोट 1 के जरिए यह बदलाव लागू किया है. LIC में 20% तक FDI ऑटोमैटिक रूट से अनुमति दी गई है, जबकि बीमा कंपनियों में 100% तक FDI ऑटोमैटिक रूट से संभव होगा.

5.6 लाख करोड़ का मार्केट कैप

LIC का मार्केट कैप करीब 5.6 लाख करोड़ रुपये है. कंपनी को न्यूनतम पब्लिक शेयरहोल्डिंग के नियमों को पूरा करने के लिए Offer for Sale (OFS) करना जरूरी है. मई 2024 में SEBI ने LIC को 10% मिनिमम पब्लिक शेयरहोल्डिंग हासिल करने के लिए 16 मई 2027 तक का समय दिया था.

नियम के अनुसार, लिस्टेड कंपनियों को लिस्टिंग के दो साल के भीतर 10% पब्लिक होल्डिंग सुनिश्चित करनी होती है. वर्तमान में LIC में पब्लिक फ्लोट करीब 3.5% है. सरकार ने मई 2022 में हिस्सेदारी बेचकर 20,516 करोड़ रुपये जुटाए थे.

इंश्योरेंस इंटरमीडियरी में 100% FDI

इंश्योरेंस ब्रोकर्स, री-इंश्योरेंस ब्रोकर्स, इंश्योरेंस कंसल्टेंट, कॉरपोरेट एजेंट, थर्ड पार्टी एडमिनिस्ट्रेटर (TPA), सर्वेयर और लॉस असेसर, मैनेजिंग जनरल एजेंट, इंश्योरेंस रिपॉजिटरी और अन्य संबंधित संस्थाओं में 100% FDI ऑटोमैटिक रूट के तहत अनुमति होगी.

कानूनों में बदलाव

सरकार ने 21 दिसंबर 2025 को सबका बीमा सबका रक्षा (Amendments of Insurance Laws) Act, 2025 के तहत Insurance Act, 1938, Life Insurance Corporation Act, 1956 और IRDAI Act, 1999 में बदलावों को लिस्ट किया था. इन संशोधनों के तहत बीमा कंपनियों में FDI की सीमा 74% से बढ़ाकर 100% कर दी गई है.

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रेगुलेटरी नियमों की शर्तें

नए नियमों के तहत विदेशी निवेश वाली किसी भी भारतीय बीमा कंपनी में चेयरपर्सन, मैनेजिंग डायरेक्टर या चीफ एग्जीक्यूटिव ऑफिसर (CEO) में से कम से कम एक पद पर भारतीय निवासी नागरिक होना अनिवार्य होगा.

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