सड़क हादसे के घायलों को अब 1 घंटे में मिलेगा 1.5 लाख तक कैशलेस इलाज, सरकार लाएगी नया हेल्थ प्लान, गडकरी का ऐलान
केंद्रीय मंत्री नितिन गडकरी ने कहा कि सरकार जल्द ही नया हेल्थ प्लान लाने जा रही है, जिसके तहत सड़क हादसों के पीड़ितों को 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. यह योजना देशभर में लागू होगी और आयुष्मान भारत से जुड़े अस्पतालों में यह सुविधा उपलब्ध होगी.
Cashless treatment in road accidents: सड़क दुर्घटनाओं में घायल लोगों को जल्द ही राहत मिलने वाली है. अब सड़क हादसे के बाद इलाज के लिए उन्हें पैसों की चिंता नहीं करनी होगी. क्योंकि सरकार उनके लिए एक नई हेल्थकेयर योजना लाने जा रही है. इससे सड़क दुर्घटना पीड़ितों को तुरंत और कैशलेस इलाज मिलेगा. इसकी घोषणा केंद्रीय सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्री नितिन गडकरी ने की.
दिल्ली में राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों के परिवहन मंत्रियों के साथ बैठक के बाद पत्रकारों से बात करते हुए गडकरी ने बताया कि नए हेल्थकेयर प्लान तैयार किया जा रहा है. ये जिम्मेदारी सड़क परिवहन और राजमार्ग मंत्रालय निभा रहा है. इसका औपचारिक ऐलान जज्द ही पीए नरेद्र मोदी करेंगे.
गोल्डन आवर में मिलेगा इलाज
गडकरी ने बताया कि यह योजना राष्ट्रीय राजमार्गों और राज्य सड़कों पर होने वाले सभी सड़क हादसों पर लागू होगी. खास बात यह है कि जिन वाहनों का बीमा नहीं है उनके पीड़ितों को भी इलाज से वंचित नहीं किया जाएगा. उन्होंने बताया कि हादसे के बाद पहला एक घंटा यानी ‘गोल्डन आवर’ सबसे अहम होता है. इसी दौरान सही इलाज मिलने से जान बचने की संभावना कई गुना बढ़ जाती है. इसलिए घायलों को इस दौरान कैशलेस इलाज की सुविधा मिलेगी.
1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस कवर
इस योजना के तहत हर सड़क दुर्घटना में घायल व्यक्ति को प्रति हादसा 1.5 लाख रुपये तक का कैशलेस इलाज मिलेगा. इलाज की सुविधा हादसे की तारीख से सात दिनों तक उपलब्ध रहेगी. यह सुविधा Ayushman Bharat योजना से जुड़े सभी लिस्टेड अस्पतालों में मिलेगी.
बीमा कंपनियां बनाएंगी कॉमन फंड
थर्ड पार्टी मोटर इंश्योरेंस देने वाली बीमा कंपनियां अपने प्रीमियम का लगभग 1 प्रतिशत एक साझा फंड में देंगी. इसी फंड से दुर्घटना पीड़ितों के इलाज का खर्च चुकाया जाएगा. इसके साथ ही केंद्र सरकार राह-वीर योजना भी जारी रखेगी. इसके तहत सड़क हादसे के शिकार लोगों को तुरंत अस्पताल पहुंचाने वाले शख्स को 25,000 रुपये का इनाम दिया जाता है.
पायलट प्रोजेक्ट शुरू
इस योजना का पायलट प्रोजेक्ट असम, चंडीगढ़, उत्तराखंड, हरियाणा, पंजाब, उत्तर प्रदेश और पुडुचेरी में सफलतापूर्वक चलाया गया है. अब इसे पूरे देश में लागू करने की तैयारी है.
हादसों में कितने लोगों की गई जान
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, पिछले साल भारत में करीब 5 लाख सड़क दुर्घटनाएं हुईं, जिनमें 1.8 लाख से ज्यादा लोगों की मौत हो गई. यह संख्या दुनिया में सबसे ज्यादा है. गडकरी ने कहा कि यह योजना सड़क मौतों को कम करने और इमरजेंसी रिस्पॉन्स सिस्टम को मजबूत करने की दिशा में बड़ा कदम होगा.
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अनिवार्य होगा V2V सिस्टम
सड़क सुरक्षा को और मजबूत करने के लिए मंत्रालय चार पहिया वाहनों में वाहन-से-वाहन यानी V2V कम्युनिकेशन सिस्टम को अनिवार्य करने की योजना बना रहा है. इससे गाड़ियां बिना मोबाइल नेटवर्क के रेडियो सिग्नल के जरिए एक-दूसरे से बात कर सकेंगी और कोहरा, अंधे मोड़, खड़ी गाड़ियाें या हादसों की जानकारी पहले ही मिल सकेगी.
बस बॉडी कोड होगा सख्त
हाल के महीनों में हुई कई घातक बस दुर्घटनाओं के बाद सरकार बस बॉडी कोड यानी इससे जुड़े नियमों को और सख्त करने जा रही है. गडकरी ने कहा कि खराब डिजाइन और घटिया सामानों के कारण पिछले तीन महीनों में ही छह बड़े बस हादसों में 145 लोगों की जान गई है. नियम के तहत अब सभी बस निर्माताओं को ऑथराइज्ड टेस्टिंग एजेंसियों से टाइप अप्रूवल लेना अनिवार्य होगा. बता दें पहले मैनुअल बस बॉडी बिल्डर्स खुद ही सर्टिफिकेशन कर लेते थे, जिसे अब खत्म किया जाएगा.
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