पश्चिम एशिया संकट के चलते सेबी ने बढ़ाई IPO और राइट्स इश्यू की मंजूरी की वैधता, ऐसी कंपनियों को मिलेगी राहत
मौजूदा नियमों के तहत, कंपनियों को सेबी के ऑब्जर्वेशन जारी होने की तारीख से 12 महीने या 18 महीने (जैसा भी लागू हो) के भीतर अपने पब्लिक इश्यू लॉन्च करने होते हैं. इस कदम से उन कई कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जिन्होंने बाजार की अस्थिर स्थितियों के कारण अपने IPO प्लान टाल दिए थे.

सिक्योरिटी एंड एक्सचेंज बोर्ड ऑफ इंडिया (SEBI) ने मंगलवार को IPO और राइट्स इश्यू की मंजूरी की वैधता 30 सितंबर तक बढ़ा दी, ताकि कंपनियों को पश्चिम एशिया में चल रहे तनाव के बीच अपने ऑफर लॉन्च करने के लिए और समय मिल सके. सेबी के एक सर्कुलर के अनुसार, बाजार नियामक के वे ऑब्जर्वेशन लेटर जो 1 अप्रैल, 2026 और 30 सितंबर, 2026 के बीच खत्म हो रहे थे, अब 30 सितंबर, 2026 तक वैध रहेंगे.
कब तक ओपन करना होता है ऑफर
मौजूदा नियमों के तहत, कंपनियों को सेबी के ऑब्जर्वेशन जारी होने की तारीख से 12 महीने या 18 महीने (जैसा भी लागू हो) के भीतर अपने पब्लिक इश्यू लॉन्च करने होते हैं.
जियो-पॉलिटिकल तनाव से समस्याएं
हालांकि, नियामक ने कहा कि उसे उद्योग निकायों से कई आवेदन मिले हैं, जिनमें जारीकर्ताओं को मौजूदा अनिश्चितता, जिसमें पश्चिम एशिया में भू-राजनीतिक तनाव और निवेशकों की कम भागीदारी शामिल है, के कारण संसाधन जुटाने और पूंजी बाजारों तक पहुंचने में आ रही कठिनाइयों पर प्रकाश डाला गया है.
कब तक वैध रहेंगे ऑब्जर्वेशन लेटर?
नियामक ने कहा, ‘उद्योग निकाय के आवेदन, चल रहे भू-राजनीतिक तनाव के कारण बाजार की मौजूदा अनिश्चित स्थितियां और निवेशकों की कम भागीदारी को ध्यान में रखते हुए, सेबी ने एक बार की छूट देने का फैसला किया है, जिसके तहत 1 अप्रैल, 2026 से 30 सितंबर, 2026 के बीच खत्म होने वाले सेबी के ऑब्जर्वेशन लेटर की वैधता 30 सितंबर, 2026 तक बढ़ा दी जाएगी.’
इस कदम से उन कई कंपनियों को फायदा होने की उम्मीद है, जिन्होंने बाजार की अस्थिर स्थितियों के कारण अपने IPO प्लान टाल दिए थे या उनमें बदलाव किया था, जिससे नियामक प्रक्रियाओं की दोबारा करने की जरूरत से बचा जा सकेगा.
नहीं लगेगा जुर्माना
रेगुलेटर ने कहा कि एक्सचेंज उन कंपनियों पर कोई जुर्माना नहीं लगाएंगे जो पब्लिक के पास कम से कम 25% शेयर होने की शर्त पूरी नहीं कर पाती हैं. यह छूट भी 30 सितंबर तक ही रहेगी.
COVID-19 महामारी के दौरान भी इसी तरह की छूट दी गई थी. ये छूट बाजार में हिस्सा लेने वालों के अनुरोध पर दी गई हैं, क्योंकि युद्ध और उसके कारण बाजार में आई उथल-पुथल की वजह से कई कंपनियों ने अपने शेयर जारी करने की योजनाएं टाल दी हैं या वापस ले ली हैं.
रायटर्स के अनुसार, जानकारी देने वाली कंपनी ‘प्राइम डेटाबेस’ के आंकड़ों के मुताबिक, लगभग 40 ऐसी कंपनियां जो 435 अरब रुपये (4.68 अरब डॉलर) की पूंजी जुटाने की योजना बना रही थीं, उनकी रेगुलेटरी मंजूरी 30 सितंबर तक खत्म हो जाती.
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