शानदार नतीजे, कर्ज जीरो… फिर भी क्यों नहीं दौड़ रहा HDFC AMC का शेयर, ग्रोथ पर क्यों लग रही है सीमा

बाजार अब HDFC AMC की क्षमता पर नहीं, बल्कि उसके आगे के विकास पर सवाल कर रहा है. पहले निवेशक इस कंपनी को भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका मानते थे. लेकिन जब अच्छे नतीजे रोजमर्रा की बात बन जाते हैं, तो ध्यान इस पर जाता है कि अब इससे ज्यादा तेजी कहां से आएगी.

HDFC AMC के शेयर में क्यों आई गिरावट. Image Credit: Money9live

HDFC AMC: शेयर बाजार में कई बार ऐसा होता है कि कंपनी के नतीजे शानदार होते हैं, मुनाफा हाई रहता है, कर्ज बिल्कुल नहीं होता और फिर भी शेयर की कीमत में ज्यादा हलचल नहीं दिखती. HDFC Asset Management Company यानी HDFC AMC इस वक्त इसी दौर से गुजर रही है. कंपनी ने FY25 में बिना किसी खास खर्च को जोड़े 2,461 करोड़ रुपये का नेट प्रॉफिट कमाया.

ऑपरेटिंग मार्जिन 80 फीसदी से ज्यादा रहा. SIP के जरिए लगातार निवेश आने से कंपनी के एसेट्स भी बढ़ते रहे. बैलेंस शीट पूरी तरह कर्ज मुक्त रही. इसके बावजूद बाजार में शेयर ने कोई खास उत्साह नहीं दिखाया. यही सवाल निवेशकों के मन में है कि जब सब कुछ इतना अच्छा है तो स्टॉक आगे क्यों नहीं भाग रहा. आइए विस्तार से जानते है.

पुरानी बढ़त, अब स्थिर बाजार हिस्सेदारी

बाजार अब HDFC AMC की क्षमता पर नहीं, बल्कि उसके आगे के विकास पर सवाल कर रहा है. पहले निवेशक इस कंपनी को भारत में म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री के बढ़ने का सबसे अच्छा तरीका मानते थे. लेकिन जब अच्छे नतीजे रोजमर्रा की बात बन जाते हैं, तो ध्यान इस पर जाता है कि अब इससे ज्यादा तेजी कहां से आएगी. पिछले दशक में HDFC AMC ने जल्दी विस्तार किया और खर्चों पर सख्त नियंत्रण रखा.

FY18 तक इसके ऑपरेटिंग मार्जिन 50 फीसदी से ऊपर चले गए थे. रिटर्न ऑन इक्विटी 27 से 32 फीसदी के बीच रहा. लेकिन FY20 से FY25 के बीच, जबकि पूरी इंडस्ट्री में इक्विटी AUM तेजी से बढ़ा, HDFC AMC की बाजार हिस्सेदारी लगभग स्थिर रही. यानी कंपनी की ग्रोथ अब बाजार के साथ-साथ चल रही है, उससे आगे नहीं निकल रही.

बड़ा आकार बन गया चुनौती

FE के मुताबिक जब कोई AMC बहुत बड़ी हो जाती है तो उसके लिए बाजार से तेज बढ़ना मुश्किल हो जाता है. HDFC AMC अब उसी मोड़ पर है. ज्यादा तेजी पाने के लिए या तो फीस घटानी होगी या नए प्रोडक्ट लाने होंगे. दोनों ही रास्तों से मार्जिन पर दबाव पड़ता है. कंपनी ने मुनाफा बचाने का रास्ता चुना और इसी वजह से उसके मार्जिन अब भी मजबूत बने हुए हैं.

नंबर क्या कहते हैं

FY25 में कंपनी का ऑपरेटिंग मार्जिन 83 फीसदी रहा और मुनाफा 2461 करोड़ रुपये रहा. Q3 FY26 में रेवेन्यू करीब 1,233 करोड़ रुपये रहा और मार्जिन 82 फीसदी के आसपास टिका रहा. इस दौरान इक्विटी AUM में कंपनी की हिस्सेदारी 13 फीसदी रही. कुल औसत AUM करीब 9.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया. HDFC AMC की खासियत यह है कि उसका कैश फ्लो मुनाफे के साथ चलता है. कंपनी को ज्यादा पूंजी लगाने की जरूरत नहीं पड़ती. कर्ज नहीं है और अतिरिक्त नकदी शेयरधारकों को लौटाई जाती है. इसी वजह से बाजार गिरने पर भी इसके शेयर में बड़ी गिरावट नहीं आती.

नए दौर की चुनौतियां

अब म्यूचुअल फंड इंडस्ट्री में SIP से स्थिर पैसा तो आ रहा है, लेकिन तेजी कम हो रही है. पैसिव और कम फीस वाले फंड तेजी से बढ़ रहे हैं, जहां मार्जिन कम होता है. इससे आगे चलकर मुनाफे पर दबाव बन सकता है. बैंक और प्लेटफॉर्म भी अपने सस्ते प्रोडक्ट आगे बढ़ा रहे हैं. नियमों में बदलाव भी ज्यादा मार्जिन वाली कंपनियों पर ज्यादा असर डाल सकता है.

डिस्क्लेमर: Money9live किसी स्टॉक, म्यूचुअल फंड, आईपीओ में निवेश की सलाह नहीं देता है. यहां पर केवल स्टॉक्स की जानकारी दी गई है. निवेश से पहले अपने वित्तीय सलाहकार की राय जरूर लें.

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