मार्केट गिरा तो SIP रोकनी चाहिए या नहीं? इस निवेशक ने 15 साल में तय किया 2.1 करोड़ तक का सफर, जानें सफलता का राज
शेयर बाजार में गिरावट के दौर में एसआईपी रोकनी चाहिए या नहीं, इस सवाल का जवाब एक निवेशक की कहानी देती है. इस निवेशक ने बाजार के उतार चढाव के बावजूद एसआईपी जारी रखी और 15 साल में 51,420 रुपये के निवेश से 2.1 करोड़ रुपये का कॉर्पस बनाया.
SIP investment: जब भी शेयर बाजार में गिरावट आती है, तो सबसे पहला सवाल यही उठता है कि क्या SIP रोक देनी चाहिए या म्युचुअल फंड से पैसा निकाल लेना बेहतर होगा. मौजूदा समय में जब इक्विटी बाजार दबाव में है, तब निवेशकों की यह चिंता और बढ़ गई है. ऐसे माहौल में एक निवेशक की कहानी सामने आई है, जिसने बाजार के उतार-चढ़ाव के बावजूद SIP जारी रखी और 15 साल में करीब 2.1 करोड़ रुपये का मजबूत कॉर्पस तैयार किया.
Reddit पोस्ट से सामने आई निवेश की कहानी
यह अनुभव Reddit पर शेयर किया गया, जहां एक यूजर ने अपनी निवेश यात्रा के 15 साल पूरे होने पर पूरी कहानी बताई. निवेशक ने बताया कि उसने कुल 51,420 रुपये से निवेश की शुरुआत की थी, जो समय के साथ बढ़कर 2.1 करोड़ रुपये तक पहुंच गया. इस दौरान उसे करीब 17.1 फीसदी का सालाना रिटर्न मिला.

गिरते बाजार में नहीं किया पैनिक
निवेशक के मुताबिक, उसकी सफलता का सबसे बड़ा कारण बाजार गिरने पर घबराहट में फैसले न लेना रहा. उसने लिखा कि जब बाजार नीचे जाता है, तब उसी रकम में ज्यादा यूनिट्स मिलती हैं और जब बाजार ऊपर जाता है, तो लंबे समय तक टिके रहने का फायदा मिलता है. उसने न तो बाजार को टाइम करने की कोशिश की और न ही बार-बार फंड बदलने पर भरोसा किया.
उतार-चढ़ाव के बावजूद निवेश जारी
15 साल की इस अवधि में निवेशक ने कई बड़े बाजार उतार-चढ़ाव देखे. कुछ समय SIP रोकी भी गई, कुछ फंड स्विच किए गए, लेकिन म्युचुअल फंड से पूरी तरह बाहर निकलने का फैसला कभी नहीं लिया गया. निवेशक का मानना है कि बाजार समय के साथ रिकवर करता है और धैर्य रखने वाले निवेशकों को इसका लाभ जरूर मिलता है.
निवेशकों के लिए अहम सीख
निवेशक ने अपने अनुभव से कुछ अहम बातें साझा कीं. उसने कहा कि केवल स्टार रेटिंग देखकर फंड का चयन नहीं करना चाहिए, क्योंकि ये अक्सर शॉर्ट टर्म परफॉर्मेंस दिखाती हैं. डायरेक्ट प्लान चुनना, लो एक्सपेंस रेशियो पर ध्यान देना और समय-समय पर पोर्टफोलियो रिव्यू करना उसकी रणनीति का अहम हिस्सा रहा. इसके अलावा, केवल अतिरिक्त पैसे का निवेश करना और पहले से की गई रिसर्च पर भरोसा बनाए रखना भी जरूरी बताया गया.
निवेशकों को मिला भरोसा
इस पोस्ट पर कई यूजर्स ने प्रतिक्रिया दी. कुछ नए निवेशकों ने इसे बेहद प्रेरणादायक बताया, वहीं कुछ ने पूछा कि फंड रिव्यू करते समय किन मेट्रिक्स पर ध्यान देना चाहिए. खासतौर पर सैलरीड निवेशकों के लिए यह कहानी भरोसा जगाने वाली साबित हुई है.
क्या है असली मंत्र
यह अनुभव एक बार फिर साबित करता है कि SIP और इक्विटी निवेश में सबसे बड़ा हथियार समय और अनुशासन है. बाजार चाहे जितना भी अस्थिर क्यों न हो, “मार्केट में समय बिताना, मार्केट को टाइम करने से कहीं ज्यादा अहम है.”
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