20 की उम्र में हर महीने 6000 रुपये की बचत, 40 तक बन सकता है 55 लाख रुपये का फंड, यह है पूरा गणित

कम उम्र में की गई छोटी लेकिन नियमित बचत लंबे समय में बड़ा फाइनेंशियल सहारा बन सकती है. अगर कोई व्यक्ति 20 साल की उम्र से हर महीने 6000 रुपये की बचत शुरू करता है, तो कंपाउंडिंग के जरिए 40 साल की उम्र तक करीब 55 लाख रुपये का फंड तैयार हो सकता है. सही समय पर निवेश, अनुशासन और नियमित बचत से फाइनेंशियल फ्रीडम हासिल की जा सकती है.

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SIP investment calculation: कम उम्र में की गई छोटी लेकिन नियमित बचत लंबे समय में एक मजबूत फाइनेंशियल सहारा बन सकती है. अक्सर लोग यह सोचकर बचत टाल देते हैं कि सैलरी अभी कम है या आगे चलकर ज्यादा पैसा कमा कर निवेश करेंगे, लेकिन फाइनेंशियल प्लानिंग में सबसे बड़ी गलती यही होती है. असलियत यह है कि फाइनेंशियल फ्रीडम किसी एक बड़े फैसले से नहीं, बल्कि समय पर लिए गए छोटे, अनुशासित और लगातार कदमों से हासिल होती है. अगर कोई व्यक्ति 20 साल की उम्र से ही हर महीने 6000 रुपये की बचत शुरू कर देता है, तो 40 साल की उम्र तक एक ऐसा फंड तैयार हो सकता है, जो भविष्य की कई जरूरतों को पूरा करने में सक्षम हो.

जल्दी शुरुआत क्यों है सबसे बड़ा फायदा

बचत और निवेश की असली ताकत सैलरी की रकम में नहीं, बल्कि उस उम्र में छिपी होती है, जब आप शुरुआत करते हैं. उदाहरण के तौर पर, अगर कोई व्यक्ति 20 साल की उम्र से हर महीने 6000 रुपये निवेश करता है, तो 20 साल में उसका कुल निवेश लगभग 14.40 लाख रुपये का होता है.

अगर इस निवेश पर औसतन सालाना 12 फीसदी का रिटर्न मिलता है, तो कंपाउंडिंग के असर से यही रकम बढ़कर करीब 55 लाख रुपये तक पहुंच सकती है. इसमें सबसे अहम भूमिका समय निभाता है, क्योंकि लंबी अवधि तक पैसा निवेश में बना रहने से उस पर मिलने वाला रिटर्न भी आगे चलकर रिटर्न कमाने लगता है.

देर से शुरुआत करने का नुकसान

अब इसी उदाहरण को दूसरी तरफ से समझते हैं. अगर कोई व्यक्ति यही बचत 30 साल की उम्र से शुरू करता है, तो उसके पास निवेश के लिए 10 साल कम समय रह जाता है. ऐसे में 40 साल की उम्र तक 55 लाख रुपये का फंड तैयार करने के लिए उसे हर महीने लगभग तीन गुना ज्यादा रकम बचानी पड़ेगी. यह न केवल मानसिक दबाव बढ़ाता है, बल्कि कई बार नियमित निवेश को बनाए रखना भी मुश्किल हो जाता है. यही वजह है कि फाइनेंशियल एक्सपर्ट्स हमेशा जल्दी शुरुआत करने की सलाह देते हैं.

छोटी रकम भी बड़ा असर डालती है

कई लोगों को लगता है कि 6000 रुपये या 3000 रुपये जैसी रकम से क्या फर्क पड़ेगा, लेकिन लंबी अवधि में यही छोटी रकम बड़ा बदलाव लाती है. नियमित निवेश की आदत न केवल फाइनेंशियल डिसिप्लिन सिखाती है, बल्कि खर्च और जरूरतों के बीच संतुलन बनाना भी सिखाती है. समय के साथ जब सैलरी बढ़ती है, तो इसी निवेश को बढ़ाया भी जा सकता है, जिससे फंड और तेजी से ग्रो करता है.

फाइनेंशियल फ्रीडम का रास्ता

फाइनेंशियल फ्रीडम का मतलब यह नहीं है कि आप करोड़पति बन जाएं, बल्कि इसका मतलब यह है कि आपके पास इतने संसाधन हों कि आप अपने फैसले मजबूरी में नहीं, बल्कि अपनी पसंद से ले सकें. कम उम्र में शुरू की गई नियमित बचत आपको यही आजादी देती है. चाहे भविष्य में घर खरीदना हो, बच्चों की पढ़ाई का खर्च हो या रिटायरमेंट की चिंता, एक मजबूत फंड हर स्थिति में आत्मविश्वास देता है.

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