UTI Flexi Cap Fund अपने बेंचमार्क को मात देने के लिए क्यों कर रहा संघर्ष? जानिए आखिर इसके पीछे की क्या है वजह
यह फंड कुछ समय से अपने बेंचमार्क और साथियों, दोनों से पीछे चल रहा है, जिससे निवेशकों के सब्र का इम्तिहान हो रहा है. यह खराब परफॉर्मेंस सिर्फ UTI फ्लेक्सी कैप फंड तक ही सीमित नहीं है. मीडियम और लॉन्ग-टर्म में, AMC की लार्ज-कैप और मिड-कैप स्कीम्स भी पीछे रह गई हैं.
पिछले साल UTI फ्लेक्सी कैप फंड ने 4.15 फीसदी का रिटर्न दिया, जो इसके बेंचमार्क, निफ्टी 500 TRI से काफी पीछे है, जिसने इसी दौरान 14.18 फीसदी दिया था. लेकिन यह कोई एक बार की गिरावट नहीं है. यह फंड कुछ समय से अपने बेंचमार्क और साथियों, दोनों से पीछे चल रहा है, जिससे निवेशकों के सब्र का इम्तिहान हो रहा है.
क्वालिटी-ग्रोथ की तरफ झुकाव
वैल्यू रिसर्च के अनुसार, UTI म्यूचुअल फंड में इक्विटी के हेड अजय त्यागी इस लंबे अंतराल का कारण साइक्लिकल और वैल्यू स्टॉक्स के दबदबे वाले मार्केट में फंड की क्वालिटी-ग्रोथ की तरफ झुकाव को बताते हैं. उनके अनुसार, यह अंतर फंड के इन्वेस्टमेंट प्रोसेस में किसी बदलाव के बजाय एक बड़े मार्केट स्टाइल साइकिल को दिखाता है. उनका तर्क है कि फोकस शॉर्ट-टर्म मार्केट लीडरशिप के पीछे भागने के बजाय लगातार बने रहने पर रहता है.
जब क्वालिटी पसंद नहीं आती
UTI फ्लेक्सी कैप फंड की हालिया मुश्किलें किसी एक गलत दांव की वजह से नहीं, बल्कि पिछले कुछ सालों में हमने जिस तरह का मार्केट देखा है, उसकी वजह से हुई हैं. लीडरशिप मेटल्स, ग्लोबल साइक्लिकल्स और दूसरे वैल्यू-हैवी सेगमेंट्स की तरफ शिफ्ट हो गई है, जबकि कंजम्प्शन-ओरिएंटेड और स्टेबल कंपाउंडिंग वाले बिजनेस पीछे छूट गए हैं.
क्योंकि यह फंड अनुमानित कैश फ्लो, मजबूत बैलेंस शीट और अर्निग्स ड्यूरेबलिटी के आस-पास है, इसलिए इसे सस्ते, साइक्लिकल शेयरों के लिए मार्केट की पसंद के साथ तालमेल बिठाने में मुश्किल हुई है.
लॉन्ग-टर्म फैक्टर डेटा
त्यागी इस बात को सपोर्ट करने के लिए लॉन्ग-टर्म फैक्टर डेटा की ओर इशारा करते हैं. पिछले दो दशकों में, क्वालिटी स्टॉक्स ने ऐतिहासिक रूप से कम वोलैटिलिटी के साथ थोड़ा बेहतर रिटर्न दिया है, भले ही पिछले चार साल इस स्टाइल के लिए बहुत मुश्किल रहे हों. लंबे समय तक मंदी के बावजूद, फंड की स्ट्रैटेजी अर्निंग्स ग्रोथ पर टिकी हुई है, इस विश्वास के साथ कि फंडामेंटल्स आखिरकार खुद को साबित करते हैं.
खराब परफॉर्मेंस का असर दूसरे फंड्स पर भी पड़ा
यह खराब परफॉर्मेंस सिर्फ UTI फ्लेक्सी कैप फंड तक ही सीमित नहीं है. मीडियम और लॉन्ग-टर्म में, AMC की लार्ज-कैप और मिड-कैप स्कीम्स भी पीछे रह गई हैं. त्यागी इस बात पर जोर देते हैं कि एक तय इन्वेस्टमेंट अप्रोच पर टिके रहना जरूरी है, न कि ऐसे समय में जब मार्केट उस स्टाइल के खिलाफ हो जाए तो उसे छोड़ देना चाहिए.
उन्होंने कहा, ‘असलियत यह है कि हमारे फंड जिस तरह से रखे गए हैं, उसकी वजह से ऐसे समय आएंगे जब कुछ स्कीम पर दबाव रहेगा, सिर्फ इसलिए कि उनका स्टाइल पसंद नहीं किया जा रहा है. यह अपने आप में जरूरी नहीं कि प्रोसेस में कोई समस्या हो.
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