EPF vs PPF: हर महीने ₹10000 का निवेश; जानें किस स्कीम से मिलेगा ज्यादा पैसा? यहां समझें पूरा गणित
रिटायरमेंट के लिए सुरक्षित बचत बनाने में EPF और PPF दोनों ही लोकप्रिय सरकारी योजनाएं हैं. अगर कोई व्यक्ति हर साल 1.2 लाख रुपये इन योजनाओं में 15 साल तक निवेश करे, तो किस स्कीम से ज्यादा रिटर्न मिल सकता है? जानिए ब्याज दर, लॉक-इन और संभावित रिटर्न का पूरा गणित.
EPF vs PPF Which is Better: रिटायरमेंट की योजना बनाना अपने फाइनेंस मैनेज करने का एक बेहद अहम हिस्सा है. हर व्यक्ति चाहता है कि नौकरी या कामकाज के वर्षों के बाद उसकी आर्थिक स्थिति मजबूत रहे और उसे किसी तरह की वित्तीय परेशानी का सामना न करना पड़े. इसी उद्देश्य से कई लोग सरकार समर्थित बचत योजनाओं में निवेश करना पसंद करते हैं, क्योंकि इनमें सुरक्षा, स्थिर रिटर्न और टैक्स लाभ जैसे कई फायदे मिलते हैं.
EPF और PPF
भारत में Employee Provident Fund (EPF) और Public Provident Fund (PPF) ऐसी ही दो लोकप्रिय लॉन्ग टर्म निवेश योजनाएं हैं, जिन पर लाखों लोग भरोसा करते हैं. दोनों ही योजनाओं का मुख्य उद्देश्य लोगों को नियमित बचत के लिए प्रोत्साहित करना और भविष्य के लिए एक मजबूत फंड तैयार करने में मदद करना है. हालांकि इन दोनों योजनाओं में कई समानताएं हैं, लेकिन एलिजिबिलिटी, ब्याज दर, निवेश की फ्लेक्सिबिलिटी और निकासी के नियमों के मामले में इनके बीच स्पष्ट अंतर भी मौजूद है.
1.2 लाख का नियमित निवेश
ऐसे में एक सामान्य सवाल अक्सर सामने आता है कि अगर कोई व्यक्ति हर साल 1.2 लाख रुपये (यानी हर महीने 10,000 रुपये) इन दोनों योजनाओं में 15 साल तक निवेश करे, तो किस योजना में उसे ज्यादा रिटर्न मिल सकता है. आइए इसे विस्तार से समझते हैं.
क्या है EPF?
एम्प्लॉयी प्रोविडेंट फंड (EPF) मुख्य रूप से संगठित क्षेत्र में काम करने वाले वेतन भोगी कर्मचारियों के लिए बनाई गई रिटायरमेंट सेविंग स्कीम है. इस योजना का संचालन Employees’ Provident Fund Organisation (EPFO) द्वारा किया जाता है. इस स्कीम के तहत कर्मचारी अपनी बेसिक सैलरी और महंगाई भत्ते (DA) का लगभग 12 फीसदी हिस्सा EPF खाते में जमा करते हैं. वहीं नियोक्ता यानी कंपनी भी कर्मचारी के खाते में लगभग इतनी ही राशि का योगदान करती है, हालांकि नियोक्ता के योगदान का एक हिस्सा पेंशन स्कीम में चला जाता है.
क्या है ब्याज दर?
EPF खाते में जमा राशि पर हर साल EPFO की ओर से ब्याज घोषित किया जाता है. फिलहाल इस योजना पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज दिया जा रहा है. इस स्कीम का मुख्य उद्देश्य कर्मचारियों के लिए लंबी अवधि में एक बड़ा रिटायरमेंट फंड तैयार करना है. हालांकि जरूरत पड़ने पर इसमें आंशिक निकासी की सुविधा भी दी गई है. उदाहरण के तौर पर शिक्षा, शादी, घर खरीदने या मेडिकल जरूरतों जैसी परिस्थितियों में EPF से कुछ राशि निकाली जा सकती है.
क्या है PPF?
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF) भी सरकार समर्थित एक लोकप्रिय लॉन्ग टर्म निवेश योजना है. EPF के विपरीत, PPF केवल नौकरीपेशा लोगों तक सीमित नहीं है. इसमें कोई भी भारतीय नागरिक निवेश कर सकता है, चाहे वह वेतनभोगी हो, स्वरोजगार में हो या माता-पिता अपने बच्चों के नाम पर निवेश करना चाहते हो.
ब्याज दर?
PPF खाता बैंकों या डाकघरों में खोला जा सकता है. इस योजना में सरकार समय-समय पर ब्याज दर की समीक्षा करती है. फिलहाल PPF पर 7.1 फीसदी सालाना ब्याज मिल रहा है. इस योजना की सबसे अहम विशेषता इसका 15 साल का लॉक-इन पीरियड है. यानी निवेशक को पूरी राशि निकालने के लिए 15 साल का इंतजार करना होता है. हालांकि कुछ शर्तों के साथ आंशिक निकासी और लोन की सुविधा भी दी जाती है.
EPF और PPF में प्रमुख अंतर
- पात्रता- EPF केवल उन कर्मचारियों के लिए उपलब्ध है जो EPFO में पंजीकृत संस्थानों में काम करते हैं. इसके विपरीत, PPF में कोई भी व्यक्ति निवेश कर सकता है.
- ब्याज दर- वर्तमान में EPF पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है, जबकि PPF में 7.1 फीसदी की दर से ब्याज मिलता है. यही कारण है कि लंबी अवधि में EPF से अपेक्षाकृत अधिक रिटर्न मिल सकता है.
- लॉक-इन अवधि- PPF में 15 साल की निश्चित लॉक-इन अवधि होती है. वहीं EPF में जरूरत के अनुसार कुछ स्थितियों में आंशिक निकासी की अनुमति दी जाती है.
- न्यूनतम निवेश- PPF में सालाना कम से कम 500 रुपये निवेश करना अनिवार्य है. जबकि EPF में निवेश कर्मचारी की सैलरी के आधार पर तय होता है.
- टैक्स में फायदा- दोनों योजनाओं में निवेश आयकर अधिनियम की धारा 80C के तहत टैक्स छूट के लिए पात्र होता है. एक वित्त वर्ष में अधिकतम 1.5 लाख रुपये तक की कटौती का लाभ लिया जा सकता है. इसके अलावा, दोनों योजनाओं में मिलने वाला ब्याज और परिपक्वता राशि भी निर्धारित शर्तों के तहत टैक्स-फ्री होती है.
अगर हर साल 1.2 लाख रुपये निवेश किए जाएं तो क्या होगा?
अब एक उदाहरण के जरिए समझते हैं कि अगर कोई व्यक्ति हर महीने 10,000 रुपये यानी हर साल 1,20,000 रुपये दोनों योजनाओं में निवेश करता है और यह निवेश लगातार 15 साल तक जारी रहता है. ऐसे में 15 साल में कुल निवेश की राशि 1,20,000 × 15 यानी 18,00,000 रुपये (18 लाख रुपये) होगी. यह राशि दोनों योजनाओं के लिए समान रहेगी.
EPF vs PPF: संभावित रिटर्न
अगर इस निवेश पर 8.25 फीसदी सालाना ब्याज मिलता है, तो 15 साल बाद कुल फंड लगभग 35,96,445 रुपये (लगभग 35.96 लाख रुपये) हो सकता है. इसमें मूल निवेश और उस पर अर्जित ब्याज दोनों शामिल हैं. वहीं अगर यही राशि PPF में 7.1 फीसदी ब्याज दर पर निवेश की जाए, तो 15 साल बाद इसकी कुल वैल्यू लगभग 32,54,567 रुपये (करीब 32.54 लाख रुपये) तक पहुंच सकती है. दोनों योजनाओं की तुलना करें तो 15 साल बाद मिलने वाली राशि में करीब 3.4 लाख रुपये का अंतर दिखाई देता है. इसका मुख्य कारण EPF की अपेक्षाकृत अधिक ब्याज दर है.
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