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FD-RD छोड़िए… 8.2% तक रिटर्न दे रही ये 6 सरकारी योजनाएं, ₹1.5 लाख तक मिलती है टैक्स छूट, एक क्लिक में समझें पूरा गणित

सुरक्षित निवेश की तलाश में ज्यादातर लोग फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और छोटी बचत योजनाओं जैसे PPF, NSC या सुकन्या समृद्धि योजना का सहारा लेते हैं. ये विकल्प तय रिटर्न और टैक्स से छूट भी देते हैं, लेकिन इनमें ब्याज, लॉक-इन और लचीलापन अलग-अलग होता है. सही चुनाव के लिए इन दोनों के बीच फर्क समझना जरूरी है.

छोटी बचत योजनाएं Image Credit: @AI/Money9live

FD vs Small Saving Schemes: अगर आप अपने पैसे को सुरक्षित तरीके से बढ़ाना चाहते हैं, तो फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) और छोटी बचत योजनाएं जैसे पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF), नेशनल सेविंग्स सर्टिफिकेट (NSC), किसान विकास पत्र (KVP), सुकन्या समृद्धि योजना (SSY) और सीनियर सिटीजन सेविंग्स स्कीम (SCSS) लोकप्रिय विकल्प हैं. ये सभी निवेश सुरक्षित माने जाते हैं और तय रिटर्न देते हैं. अब निवेशक के मन में यह सवाल उठ सकता है कि पैसे को कहां निवेश करें FD में रखें या SSS में निवेश करें, तो ऐसे में यह जानना आपके लिए बेहद जरूरी है कि आपका पैसा कहां तेजी से बढ़ने वाला है. सेफ्टी की बात करें तो सेविंग और निवेश के दोनों विकल्प सेफ हैं. इसलिए, इन सबमें अंतर समझना जरूरी है ताकि आप सही चुनाव कर सकें.

कहां मिल रहा ज्यादा फायदा?

अगर सिर्फ रिटर्न की बात करें तो छोटी बचत योजनाएं आमतौर पर ज्यादा ब्याज देती हैं. अप्रैल 2026 में बैंकों की FD पर ब्याज दर लगभग 6.25% से 6.66% के बीच है. वहीं, छोटी बचत योजनाओं में ब्याज 4% से 8.2% तक मिलता है. यानी अगर आप ज्यादा रिटर्न चाहते हैं, तो इन योजनाओं पर नजर डाल सकते हैं. हालांकि, निवेश का फैसला सिर्फ ब्याज देखकर नहीं करना चाहिए. नीचे दिए गए टेबल में आप देख सकते हैं कि कहां आपको कितना रिटर्न मिल सकता है.

श्रेणीयोजना / बैंकब्याज दर (%)
SSS (स्मॉल सेविंग स्कीम)सुकन्या समृद्धि योजना8.2%
पब्लिक प्रोविडेंट फंड (PPF)7.1%
पोस्ट ऑफिस सेविंग डिपॉजिट4.0%
किसान विकास पत्र (KVP)7.5%
नेशनल सेविंग सर्टिफिकेट (NSC)7.7%
मंथली इनकम स्कीम7.4%
बैंकस्टेट बैंक ऑफ इंडिया (SBI)6.25%
कोटक महिंद्रा बैंक6.50%
एचडीएफसी बैंक6.25%
यस बैंक6.66%
आईसीआईसीआई बैंक6.25%

पैसे की जरूरत कब पड़ेगी?

छोटी बचत योजनाओं में लॉक-इन पीरियड की एक बड़ी शर्त होती है.

  • NSC में पैसा 5 साल के लिए लॉक रहता है.
  • PPF में 15 साल का लंबा लॉक-इन होता है.

इसके मुकाबले FD में ज्यादा लचीलापन होता है. आप अपनी जरूरत के हिसाब से अवधि चुन सकते हैं और जरूरत पड़ने पर FD तोड़ भी सकते हैं (कुछ पेनल्टी के साथ). अगर आपको जल्दी पैसे की जरूरत पड़ सकती है, तो FD बेहतर विकल्प हो सकता है.

टैक्स का क्या है हिसाब?

FD-RD से मिलने वाला ब्याज आपकी इनकम में जुड़ता है और टैक्स स्लैब के हिसाब से टैक्स लगता है. वहीं PPF, NSC जैसी योजनाओं में निवेश पर धारा 80C के तहत ₹1.5 लाख तक छूट मिल सकती है. इसलिए एक ही विकल्प पर निर्भर रहने के बजाय अपने पोर्टफोलियो में दोनों विकल्प को शामिल कर सकते हैं. इसलिए, अगर आप ज्यादा रिटर्न और टैक्स बचत चाहते हैं तो छोटी बचत योजनाएं बेहतर हैं. लेकिन लचीलापन और आसान निकासी के लिए FD सही विकल्प है.