₹10 लाख हैं निवेश के लिए? एकमुश्त लगाएं या ₹10,000 की SIP करें, जानें 10 साल में कौन बनाएगा बड़ा फंड?

अगर आपके पास निवेश के लिए 10 लाख रुपये हैं, तो 10 साल में Lump Sum निवेश आमतौर पर SIP की तुलना में बड़ा फंड बना सकता है, क्योंकि पूरी रकम पहले दिन से ही कंपाउंडिंग शुरू कर देती है. हालांकि, SIP बाजार के उतार-चढ़ाव का असर कम करने में मदद करती है.

एसआईपी बनाम एकमुश्त

SIP vs Lump Sum: म्यूचुअल फंड में निवेश करने वाले ज्यादातर लोगों के मन में एक सवाल जरूर आता है. अगर निवेश के लिए 10 लाख एक साथ उपलब्ध हों, तो क्या पूरी रकम एक बार में निवेश करना चाहिए या फिर हर महीने 10,000 की SIP के जरिए धीरे-धीरे पैसा लगाना बेहतर रहेगा? अगर दोनों निवेशों पर समान सालाना रिटर्न मिले, तो 10 साल बाद किस ऑप्शन से ज्यादा बड़ा फंड तैयार होगा? आइए आंकड़ों के जरिए समझते हैं.

मान लीजिए,

  • निवेश की अवधि: 10 साल.
  • अनुमानित रिटर्न: 11% सालाना.
  • अगर SIP: 10,000 रुपये प्रति माह.
  • एकमुश्त : 10 लाख रुपये का एकमुश्त निवेश.

₹10,000 की SIP से कितना बनेगा फंड?

Groww कैलकुलेशन के मुताबिक, अगर कोई निवेशक 10 साल तक हर महीने 10,000 रुपये की SIP करता है और उसे 11% सालाना रिटर्न मिलता है, तो मैच्योरिटी पर कुल फंड 21,24,297 रुपये हो सकता है.

  • कुल निवेश: ₹12,00,000.
  • अनुमानित रिटर्न: ₹9,24,297.
  • मैच्योरिटी पर कुल फंड: ₹21,24,297.

₹10 लाख के एकमुश्त से कितना बनेगा फंड?

अगर यही 10 लाख रुपये एक साथ निवेश किए जाएं और 10 साल तक 11% सालाना रिटर्न मिले, तो कुल फंड बढ़कर 28.39 लाख रुपये हो सकता है. इस दौरान 10 लाख के निवेश पर करीब 18,39,421 रुपये का अनुमानित रिटर्न मिलेगा.

आखिर Lump Sum क्यों बना सकता है ज्यादा बड़ा फंड?

अगर दोनों निवेशों पर समान रिटर्न मिले, तो एकमुश्त निवेश आमतौर पर SIP की तुलना में ज्यादा बड़ा फंड बना सकता है. इसकी सबसे बड़ी वजह निवेश का बाजार में बने रहने का समय यानी जितने लंबे समय तक आपका पैसा बाजार में निवेशित रहता है, उतना ज्यादा उसे कंपाउंडिंग का फायदा मिलता है.

एकमुश्त (Lump Sum) में पूरी रकम पहले दिन से ही बाजार में निवेश हो जाती है और पूरे 10 साल तक लगातार कंपाउंडिंग का फायदा उठाती है. वहीं SIP में पैसा हर महीने थोड़ा-थोड़ा निवेश होता है. ऐसे में शुरुआती सालों में पूरी रकम बाजार में नहीं होती और कंपाउंडिंग का फायदा भी कम समय के लिए मिलता है.

क्या हर स्थिति में Lump Sum बेहतर होता है?

ऐसा जरूरी नहीं है. अगर बाजार में बड़ी गिरावट से ठीक पहले Lump Sum निवेश किया जाए, तो कुछ समय तक रिटर्न पर असर पड़ सकता है. वहीं SIP में रुपया कॉस्ट एवरेजिंग का फायदा मिलता है. बाजार गिरने पर तय रकम में ज्यादा यूनिट खरीदी जाती हैं और बाजार चढ़ने पर कम यूनिट मिलती हैं. इससे निवेश की औसत लागत संतुलित रहती है और बाजार की टाइमिंग का जोखिम काफी हद तक कम हो जाता है.

बाजार की उठापटक का दोनों पर क्या असर पड़ता है?

बाजार में उतार-चढ़ाव का असर Lump Sum और SIP पर अलग-अलग पड़ता है. Lump Sum में निवेश का समय काफी अहम होता है, जबकि SIP में निवेश धीरे-धीरे होता है. यही वजह है कि बाजार गिरने पर भी SIP निवेशकों को कम कीमत पर ज्यादा यूनिट खरीदने का मौका मिलता है, जिससे लंबी अवधि में बेहतर औसत रिटर्न मिलने की संभावना रहती है.

किसके लिए SIP बेहतर विकल्प हो सकता है?

  • नियमित सैलरी पाने वाले लोग.
  • पहली बार निवेश शुरू करने वाले.
  • जो हर महीने छोटी रकम निवेश करना चाहते हैं.
  • जो बाजार की टाइमिंग को लेकर ज्यादा जोखिम नहीं लेना चाहते.
  • लंबी अवधि के वित्तीय लक्ष्य रखने वाले निवेशक.

किन लोगों के लिए Lump Sum सही हो सकता है?

  • जिनके पास एक साथ बड़ी रकम निवेश के लिए हो.
  • जिनका निवेश का समय लंबा हो.
  • जो बाजार के उतार-चढ़ाव को सहन कर सकते हों.
  • जो आकर्षक वैल्यूएशन के समय निवेश करना चाहते हों.

इसे भी पढ़ें- यहां से आया था JIO का नाम, अब देगा NSE को टक्कर; जानें कितने हैं कस्टमर