क्या होती है 800 से 925 ग्रेड वाली चांदी, मुनाफा कमाना है तो खरीदने से पहले चेक करें ये फार्मूला; कीमत 3 लाख के पार
सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतें भी रिकॉर्ड ऊंचाई पर पहुंच चुकी हैं और रिटेल मार्केट में भाव 3 लाख रुपये प्रति किलो के पार निकल गया है. ऐसे में फिजिकल सिल्वर खरीदते वक्त उसकी शुद्धता सबसे अहम हो जाती है. 999 फाइन सिल्वर से लेकर 925 स्टर्लिंग सिल्वर तक, सही ग्रेड की पहचान ही तय करती है कि आपकी खरीदारी असली वैल्यू देगी या नहीं.
Silver Purity Grades Check: सोने के साथ-साथ चांदी की कीमतों में भी जबरदस्त उछाल देखने को मिल रहा है. मौजूदा समय में रिटेल मार्केट में चांदी 3 लाख रुपये प्रति किलो के स्तर को पार कर चुकी है. ऐसे में निवेश, गिफ्टिंग या रोजमर्रा के इस्तेमाल के लिए फिजिकल सिल्वर खरीदने की प्लानिंग कर रहे लोगों की संख्या तेजी से बढ़ी है. लेकिन ऊंची कीमतों के इस दौर में सबसे बड़ा सवाल यही है कि जो चांदी आप खरीद रहे हैं, क्या वह वाकई असली है?
दरअसल, चांदी की चमक देखकर या सस्ते दाम के लालच में कई बार लोग सोने की तरह कम शुद्धता वाली या सिल्वर-प्लेटेड चीजें खरीद लेते हैं और बाद में पछताते हैं. इसलिए चांदी खरीदने से पहले उसकी शुद्धता को समझना बेहद जरूरी हो जाता है. यही एक पैमाना है जो तय करता है कि आपकी चांदी की असली कीमत और वैल्यू क्या है.
क्या होती है चांदी की ग्रेड या शुद्धता?
चांदी अपनी शुद्ध अवस्था में काफी नरम होती है, इसलिए इसमें थोड़ी मात्रा में अन्य धातु (अक्सर तांबा) मिलाई जाती है ताकि वह मजबूत बन सके. किसी भी सिल्वर आइटम में मौजूद शुद्ध चांदी की मात्रा को उसकी ग्रेड या प्योरिटी कहा जाता है. इसे आमतौर पर parts per thousand में मापा जाता है जैसे 999 या 925. यानी जितना बड़ा यह नंबर होगा, उतनी ज्यादा शुद्ध चांदी उस आइटम में मौजूद होगी.
भारतीय बाजार में मिलने वाली प्रमुख सिल्वर ग्रेड
- सबसे पहले बात करते हैं 999 फाइन सिल्वर की. इसे शुद्ध या प्योर सिल्वर भी कहा जाता है. इसमें 99.9 फीसदी चांदी होती है. यह काफी नरम होती है, इसलिए इससे रोजमर्रा की ज्वेलरी नहीं बनती. आमतौर पर इसका इस्तेमाल सिल्वर बार, कॉइन, धार्मिक वस्तुओं और निवेश के लिए किया जाता है. अगर आप चांदी को वैल्यू स्टोर या गिफ्ट के तौर पर खरीद रहे हैं, तो यही सबसे बेहतर विकल्प है.
- इसके बाद आता है 925 स्टर्लिंग सिल्वर, जो ज्वेलरी में सबसे ज्यादा इस्तेमाल होता है. इसमें 92.5 फीसदी चांदी और बाकी 7.5 फीसदी दूसरी धातु होती है. यह मजबूत भी होती है और दिखने में भी शानदार. अंगूठी, चेन, ब्रेसलेट या इयररिंग्स खरीदते समय अगर उस पर “925” की स्टैम्पिंग दिखे, तो समझिए यह अच्छी क्वालिटी की चांदी है.
- कुछ कम प्रचलित लेकिन ज्यादा शुद्ध ग्रेड है 958 सिल्वर, जिसे ब्रिटानिया सिल्वर कहा जाता है. इसमें 95.8 फीसदी चांदी होती है. यह स्टर्लिंग सिल्वर से ज्यादा शुद्ध लेकिन थोड़ी नरम होती है. भारत में यह बहुत आम नहीं है, लेकिन सिल्वरवेयर या खास कलेक्शन में देखने को मिल सकती है.
- 900 सिल्वर को कॉइन सिल्वर भी कहा जाता है. इसमें 90 फीसदी चांदी होती है. पुराने जमाने में सिक्कों को पिघलाकर इससे ज्वेलरी या अन्य वस्तुएं बनाई जाती थीं. यह मजबूत तो होती है, लेकिन जल्दी टार्निश यानी काली हो सकती है.
- इसके अलावा यूरोपियन सिल्वर ग्रेड जैसे 800, 825, 830 और 850 भी होते हैं, जिनमें 80 फीसदी से 85 फीसदी तक चांदी होती है. ये भारत में कम देखने को मिलते हैं और आमतौर पर एंटीक या हेरिटेज आइटम्स में पाए जाते हैं.
चांदी की शुद्धता क्यों है सबसे अहम?
जब चांदी की कीमतें रिकॉर्ड ऊंचाई पर हों, तब थोड़ी सी भी लापरवाही बड़ा नुकसान करा सकती है. कम शुद्धता वाली चांदी के लिए ज्यादा पैसा चुकाना, या सिल्वर-प्लेटेड आइटम को असली समझकर खरीद लेना ये दोनों ही स्थितियां आपके निवेश या खरीदारी को खराब कर सकती हैं. शुद्धता की जानकारी आपको सही दाम चुकाने, असली वैल्यू समझने और फेक या नकली प्रोडक्ट से बचने में मदद करती है. खासकर जब बात गिफ्ट या लॉन्ग टर्म निवेश की हो, तो यह भरोसे का भी सवाल बन जाता है.
खरीदने से पहले कैसे पहचानें असली चांदी?
सबसे आसान तरीका है प्योरिटी स्टैम्प देखना. असली चांदी पर आमतौर पर 999, 925 या 800 जैसे निशान होते हैं, जो उसकी शुद्धता बताते हैं. यह स्टैम्प अक्सर आइटम के पीछे या अंदर की तरफ होती है. इसके अलावा कई प्रोडक्ट्स पर अस्सेयर या मेकर मार्क भी होता है, जो यह बताता है कि किस संस्था या ज्वेलर ने उसकी शुद्धता की जांच और प्रमाणन किया है. कुछ मामलों में डेट या कोड भी लिखा होता है, जिससे ट्रेसेब्लिटी आसान हो जाती है. अगर किसी आइटम पर कोई भी मार्किंग न हो, तो बिना सवाल किए खरीदने से बचें. सीधे सेलर से पूछें और जरूरत पड़े तो बिल में शुद्धता का जिक्र जरूर करवाएं.
सिल्वर-प्लेटेड से रहें सावधान
मार्केट में कई ऐसी चीजें मिलती हैं जो देखने में चांदी जैसी लगती हैं, लेकिन असल में वे सिल्वर-प्लेटेड होती हैं. यानी किसी दूसरी धातु पर चांदी की बेहद पतली परत चढ़ी होती है. ये सस्ती जरूर होती हैं, लेकिन इनमें न तो वैल्यू होती है और न ही टिकाऊपन. समय के साथ इनकी चांदी की परत उतरने लगती है. अगर आप लंबे समय के लिए खरीद रहे हैं, तो सिल्वर-प्लेटेड नहीं बल्कि सॉलिड सिल्वर ही लें.
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